ट्रैफिक सिग्नल लगाकर भूल गई अमरावती शहर पुलिस
किसी भी सिग्नल पर सडक सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं

* शहर पुलिस का पूरा ध्यान केवल टारगेट और वसूली पर
* चौराहों से जान जोखिम में डालकर गुजरते है नागरिक
* ट्रैफिक पुलिस कर्मी की गैरमौजूदगी का जमकर उठाया जाता है फायदा
* ‘सिग्नल जंप’ के चलते कभी भी कोई बडा हादसा घटित होने की बनी रहती है संभावना
* जेब्रा क्रॉसिंग और सीसीटीवी को लेकर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी ढकेल रहे शहर पुलिस व मनपा
* राजकमल रेलवे पुल के बंद रहने से भी शहर की सडकों पर बढ रहा यातायात का दबाव
* पूरे शहर में यातायात व्यवस्था बुरी तरह से अस्तव्यस्त, आम नागरिक हलाकान
अमरावती /दि.19 – अमरावती शहर में यातायात व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्थित होती जा रही है. कई प्रमुख चौक-चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल तो लगाए गए हैं, लेकिन वहां सड़क सुरक्षा के आवश्यक इंतजाम नहीं होने से नागरिकों को रोज जान जोखिम में डालकर रास्ता पार करना पड़ रहा है. शहर के अधिकांश सिग्नलों पर ट्रैफिक पुलिस कर्मियों की नियमित मौजूदगी नहीं रहती. जेब्रा क्रॉसिंग स्पष्ट नहीं है. सीसीटीवी कैमरे अब तक लग ही नहीं पाए है. साथ ही चौराहे पार करनेवाले पैदल यात्रियों के लिए कोई मार्गदर्शन नहीं है. नतीजतन वाहन चालक खुलेआम सिग्नल जंप कर रहे हैं और कभी भी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है.
यहां यह कहना कतई अतिशयोक्तिपूर्ण नहीं होगा कि, शहर यातायात पुलिस का ध्यान यातायात नियंत्रण से अधिक चालान लक्ष्य और वसूली पर केंद्रित है, जबकि भीड़भाड़ वाले चौकों पर नियंत्रण के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की जाती. ट्रैफिक पुलिस की गैरमौजूदगी का वाहन चालक खुलकर फायदा उठाते हैं. जेब्रा क्रॉसिंग और सीसीटीवी व्यवस्था को लेकर शहर पुलिस और मनपा एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, जिससे समस्या और गंभीर होती जा रही है. वहीं दूसरी ओर शहर के दो हिस्सों को आपस में जोडनेवाले राजकमल रेलवे पुल जैसे प्रमुख मार्ग के बंद होने के कारण यातायात का अतिरिक्त दबाव अंदरूनी सड़कों पर आ गया है. इससे जाम, अव्यवस्था और दुर्घटना की आशंका और बढ़ गई है. साथ ही आम नागरिक, व्यापारी, विद्यार्थी और कामकाजी लोग रोजाना जाम में फंस रहे हैं. पैदल चलने वालों और दोपहिया चालकों के लिए स्थिति सबसे अधिक खतरनाक बनी हुई है. लोगों ने प्रशासन से तत्काल ट्रैफिक पुलिस की तैनाती, स्पष्ट जेब्रा क्रॉसिंग, कार्यरत सीसीटीवी और सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की है. शहरवासियों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता.
* सिग्नल हैं, मगर सिस्टम गायब
– निगरानी शून्य, जिम्मेदारी शून्य, हादसे का इंतज़ार करता शहर
अमरावती की मौजूदा हालात को देखते हुए यह भी कहा जा सकता है कि, शहर में ट्रैफिक सिग्नल तो खड़े हैं, लेकिन उनके आसपास न नियम दिखते हैं, न व्यवस्था और न ही जिम्मेदार अमला. शहर के अधिकांश प्रमुख चौक आज स्वचालित अराजकता के हवाले हो चुके हैं, जहां हर वाहन चालक अपनी समझ से चलता है और हर पैदल यात्री अपनी जान पर खेलकर सड़क पार करता है. जिन चौराहों पर ट्रैफिक नियंत्रण का सबसे ज्यादा महत्व है, वहीं सबसे ज्यादा लापरवाही दिखती है. नियमों का पालन स्वैच्छिक बन चुका है. परिणाम के तौर पर हर सिग्नल संभावित दुर्घटना स्थल में बदल गया है. ऐसे समय ट्रैफिक प्रबंधन को प्राथमिकता देने की बजाए यातायात पुलिस का लक्ष्य चालान कार्रवाई पर पूरी तरह से केंद्रीत है. यही वजह है कि, भीड़भाड़ वाले समय पर पुलिस नहीं दिखती, लेकिन अलग-थलग स्थानों पर चालान अभियान जरूर दिखता है. इससे व्यवस्था सुधारने के बजाय अविश्वास बढ़ रहा है.
* संभावित संकट
विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान स्थिति हाई-रिस्क ट्रैफिक एनवायरनमेंट की श्रेणी में आती है. अनियंत्रित क्रॉस मूवमेंट, पैदल-वाहन टकराव की संभावना, अचानक ब्रेकिंग और साइड कटिंग, सामूहिक दुर्घटना का खतरा बना हुआ है.
* क्या है समाधान?
पीक आवर में अनिवार्य मैनुअल कंट्रोल, सभी सिग्नलों की तकनीकी ऑडिट, स्पष्ट जिम्मेदारी, सक्रिय सीसीटीवी और पेनल्टी ऑटोमेशन, पैदल यात्री प्राथमिकता क्षेत्र जैसे मुद्दों पर ध्यान देते हुए समस्या का समाधान किया जा सकता है. अन्यथा हर चौराहा एक चेतावनी बना रहेगा. हादसा कभी भी हो सकता है, और तब जिम्मेदारी तय करने से ज्यादा जरूरी होगा, यह सोचना कि आखिर देर क्यों हुई.





