अमरावती

व्याघ्र प्रकल्प के एसटीपीएस के 104 जवान सालभर से वेतन से वंचित

टूटपूंजी अग्रिम रकम पर करना पड़ रहा परिवार का उदरनिर्वाह

* जवानों की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा, लेकिन वेतन केंद्र सरकार से
अमरावती/दि.13- देश में बाघों की संख्या बढ़ाने के साथ ही विदेश से चीता भी लाकर छोड़े हैं. एक ओर इन वन्य प्राणियों के संवर्धन के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास जारी रहते मेलघाट के बाघों की सुरक्षा के लिए तैयार किए गए विशेष व्याघ्र संरक्षण दल (एसटीपीएस) के 104 जवान गत वर्षभर से वेतन के बगैर है. सिर्फ टूटपुंजे हफ्ते पर उन्हें काम चलाना पड़ रहा है. उन्हें शीघ्र वेतन मिले, इसके लिए वन विभाग के काफी प्रयास जारी है. अग्रिम रकम की भी सुविधा करवाई गई है. लेकिन वह काफी कम होने के कारण जब तक वेतन नहीं मिलता, तब तक इन जवानों सहित उन पर अवलंबित परिवार पर भूखमरी की नौबत आयी है.
एसटीपीएस जवानों की नियुक्ति राज्य शासन द्वारा की गई है. बावजूद उनका वेतन शासन द्वारा होता है. यह वेतन प्रक्रिया काफी कठिन है. राज्य शासन द्वारा इन जवानों के वेतन का कोई नियोजन नहीं किया है. अब कही जाकर उनके लिए वन विभाग की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं. उन्हें पुरानी बकाया रकम मिलेगी, ऐसा कहा जाता है. इस पर वन विभाग में बदलियों का दौर रहने से और कितने दिनों बाद वेतन मिलेगा, यह बताया नहीं जा सकता. तब तक इन जवानों को आधा पेट रहना पड़ेगा. एसटीपीएस की देशभर में निर्मिति करने के लिए केंद्र सरकार ने 50 करोड़ रुपए दिए थे. इस दल में 25 आयु उम्र के स्थानीयों को नियुक्ति दी जाए.क्योंकि उन्हें उस परिसर की इत्थंभूत जानकारी होती है. वनसंपदा के बारे में उनके दिलों में अपनत्व की भावना होती है, यहीं इसका उद्देश्य था. जिसके अनुसार काम भी हुआ. बाघों की सुरक्षा व संवर्धन भी हुआ. उनकी संख्या भी बढ़ी. इसका आनंद भी मनाया गया, लेकिन बाघों की सुरक्षा करने वालों का भी व्यवस्थि संवर्धन हो, इस ओर भी वन विभाग को ध्यान देना चाहिए, ऐसी प्रतिक्रिया व्यक्त की जा रही है.

* वेतन प्रक्रिया सुलभ बनाएंगे
एसटीपीएस की वेतन प्रक्रिया काफी कठिन है. वेतन के लिए पहले मंजूरी लेकर फिर उसे शासन को भेजनी पड़ती है. पश्चात कोषागार में वेतन के पत्र तैयार होते हैं. उसे भी मंजूरी लेने के बाद फिर वेतन होता है. शासन ने इसके लिए अलग हेड ही तैयार किया नहीं, मात्र अब वेतन प्रक्रिया सुलभ करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है.
– मनोजकुमार खैरनार, डीएफओ
मेलघाट व्याघ्र प्रकल्प

बाघों की संख्या कम होने से एसटीपीएस की निर्मिति
देशभर के व्याघ्र प्रकल्पों में बाघों की संख्या शिकारी सहित अन्य कारणों के कारण कम होते देख केंद्र शासन द्वारा एसटीपीएस की 2016 में निर्मिति की गई राज्य शासन को जवानों की नियुक्ति की जिम्मेदारी सौंपी गई. उद्देश्य यही था कि 24 बाय 7 के जंगल में तैनात रहेंगे. इसके साथ ही श्वान पथक व अत्याधुनिक हथियार भी दिए गए. जिसके चलते शिकार कम हुए. बाघों की संख्या भी बढ़ी

एसीएफ ही नहीं, बदलियों के कारण कामकाज हुआ ठप
मेलघाट व्याघ्र प्रकल्प के सहायक वनरक्षकों की बदलियां एक ही समय में हुई. इसलिए यहां का काम ठप होकर वन्य जीव के साथ ही वन सुरक्षा के काम किस तरह पूर्ण किए जाए ऐसा गहन प्रश्न निर्माण हुआ है. इस बदली प्रक्रिया का भड़े पैमाने में विरोध शुरु रहने के साथ ही शायद एसीएफ की बदलियां रद्द होने की संभावना है.

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