अमरावती

राज्य के 11 आदिवासी प्रकल्पों को मिलेंगे स्वतंत्र प्रकल्प अधिकारी

मेलघाट सहित गडचिरोली व अन्य क्षेत्रों का समावेश

अमरावती /दि.13– राज्य के 11 आदिवासी प्रकल्प कार्यालयों को स्वतंत्र प्रकल्प अधिकारी देने का निर्णय विगत दिनों मुंबई स्थित मंत्रालय में राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे व दोनों उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस व अजित पवार की उपस्थिति में हुई राज्य जनजातिय सलाहकार परिषद की बैठक में लिया गया. इस बैठक के दौरान राज्य के सांसदों व विधायकों द्बारा इसे लेकर प्रश्न उपस्थित किया गया था. जिसके चलते अब मेलघाट के धारणी सहित राज्य के 11 आदिवासी प्रकल्प कार्यालयों को स्वतंत्र प्रकल्प अधिकारी मिलेगा.

अदालत के निर्देशानुसार कुपोषण का कलंक रहने वाले मेलघाट सहित राज्य के अन्य आदिवासी क्षेत्रों में बालमृत्यु को रोकने हेतु भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को प्रकल्प अधिकारी का पदभार का आदेश दिया गया था. परंतु आईएएस अधिकारी द्बारा उपविभागीय अधिकारी व प्रकल्प अधिकारी ऐसे 2 विभागों का कामकाज देखे जाने की वजह से दोनों विभागों को पूरी तरह से न्याय नहीं मिलने की बात कई बार सामने आ चुकी है. जिसे ध्यान में रखते हुए विगत दिनों सीएम शिंदे की अध्यक्षता में राज्य जनजाति सलाहकार परिषद की बैठक संपन्न हुई. जिसमें दोनों उपमुख्यमंत्रियों सहित विधानसभा उपाध्यक्ष नरहरी झिरवल, आदिवासी विकास मंत्री डॉ. विजयकुमार गावित, अन्न व औषध प्रशासन मंत्री धर्मरावबाबा आत्राम सहित आदिवासी क्षेत्र के सांसद व विधायक भी उपस्थित थे. जिनमें मेलघाट निर्वाचन क्षेत्र के विधायक राजकुमार पटेल का भी समावेश था. इस अवसर पर अन्य महत्वपूर्ण विषयों के साथ-साथ विधायक राजकुमार पटेल ने विशेष तौर पर आदिवासी प्रकल्प कार्यालयों को स्वतंत्र प्रकल्प अधिकारी दिए जाने का मुद्दा उठाया. जिसके चलते आदिवासी प्रकल्पों को स्वतंत्र अधिकारी दिए जाने की मांग मंजूर की गई.

इन स्थानों पर है दोहरी जिम्मेदारी राज्य के धारणी, पांढरकवडा, अहेरी, भामरागड, किनवट, नाशिक, गडचिरोली, तालोदा, घोडेगांव, देवरी व चंद्रपुर में स्थित 11 एकात्मिक आदिवासी प्रकल्प कार्यालयों का कामकाज वहीं पर आईएएस रहने वाले उपविभागीय अधिकारियों के पास विगत 30 वर्षों से है. चूंकि एक ही अधिकारी द्बारा 2 महत्वपूर्ण विभागों का जिम्मा संभाला जा रहा है. जिसके चलते आदिवासियों हेतु चलाई जाने वाली सैकडों योजनाएं गतिमान ही नहीं हो पाती है. जिसके चलते स्वतंत्र तौर पर प्रकल्प अधिकारी दिए जाने की मांग संबंधित क्षेत्र के आदिवासी विधायकों द्बारा विगत लंबे समय से की जा रही है.

* राज्य के 11 प्रकल्पों में एसडीओ के पास ही प्रकल्प अधिकारी के पद का जिम्मा है. जिससे दोनों विभागों के काम प्रभावित हो रहे है. जिसे ध्यान में रखते हुए स्वतंत्र अधिकारी देने की मांग राज्य जनजाति परिषद के जरिए की गई थी. जिसे मुख्यमंत्री व दोनों उपमुख्यमंत्रियों द्बारा स्वीकार किया गया.
– राजकुमार पटेल,
विधायक, मेलघाट.

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