अमरावतीमहाराष्ट्रमुख्य समाचार

अमरावती के 16 उपकेंद्र निजी हाथों में

महावितरण का निजीकरण प्रारंभ

* टेंडर हुए जारी
* श्रमिकों में असंतोष
अमरावती/दि. 28 – राज्य सरकार ने उर्जा क्षेत्र में 25 वर्ष का रोडमैप बना लेने और अगले दो वर्षों में बिजली सस्ती करने का ऐलान किया है. इसी बीच सरकार ने बिजली कंपनी महावितरण के चरण दर चरण निजीकरण की ओर भी कदम बढाने का समाचार है. अमरावती के 16 और अकोला के 35 उपकेंद्रो को चलाने के लिए निजी कंपनियां नियुक्त की जा रही है. इसके लिए निविदा जारी कर देने का दावा सूत्रों ने किया. यह भी बताया कि, आऊट सोर्सींग की कंपनी और सरकार की कोशिश कामगारों को रास नहीं आ रही है. सरकार पूरे प्रदेश के बिजली उपकेंद्र ठेकेदारों को हवाले करने जा रही है, इस प्रकार का आरोप भी श्रम संगठनों ने किया.
महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रीसीटी वर्कर्स फेडरेशन के महासचिव कृष्णा भोयर ने दावा किया कि, सरकार आत्मघाती निर्णय लेकर उपभोक्ता और कामगारों के हितों से खिलवाड कर रही है. कामगार संगठन सरकार का मनसूबा सफल नहीं होने देंगे. उन्होंने बताया कि, 2004 में तत्कालीन बिजली मंत्री दिलीप वलसे पाटिल ने भी कंपनी के निजीकरण का प्रयास किया था. तब उसे विरोध कर असफल किया गया. अगले वर्ष 2005 में विद्युत निगम का चार कंपनियों में विभाजन कर दिया गया.
कामगार संगठनों के अनुसार अमरावती और अकोला के साथ ही चंद्रपुर के 25, जलगांव के 12, नागपुर के 28, नांदेड के 21, लातूर के 32 उपकेंद्र को निजी हाथों में सौंपने का प्रयास चल रहा है. सरकार ने बडी कंपनियों को ही काम देने के लिए एक हजार करोड के टर्नओवर की भी शर्त रखी है. जिससे छोटे ठेकेदार अपनेआप होड से बाहर हो जाएंगे.

Back to top button