18 लाख मतदाताओं ने किया 37 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला
अमरावती संसदीय क्षेत्र में तिकोना रहा मुकाबला

* कई मुद्दों के चलते संसदीय क्षेत्र रहा चर्चा में
* चुनावी धामधूम हुई खत्म, अब सभी की निगाहे 4 जून पर
अमरावती /दि.26- विगत 16 मार्च को लोकसभा चुनाव की घोषणा होने के बाद जारी माह में 9 अप्रैल से अमरावती संसदीय क्षेत्र में चुनावी माहौल गरमाना शुरु हुआ था. जिसके तहत प्रत्येक राजनीतिक दल व प्रत्याशी ने अपने-अपने हिसाब से मतदाताओं तक पहुंचते हुए उनका समर्थन व वोट हासिल करने का प्रयास किया. साथ ही विगत 17 दिनों के दौरान सभी राजनेताओं ने अपने-अपने प्रत्याशियों के जीत के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी. जिसके चलते जारी माह में पूरा समय जबर्दस्त चुनावी धामधूम चलती रही, जो आज पूरी तरह से खत्म हो गई. क्योंकि लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के तहत आज अमरावती संसदीय क्षेत्र में मतदान की प्रक्रिया पूरी कराई गई. जिसके साथ ही अमरावती संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड रहे 37 प्रत्याशियों का राजनीतिक भविष्य इवीएम में कैद हो गया है और संसदीय क्षेत्र के लगभग 18 लाख मतदाताओं ने अपना फैसला सुना दिया है. इसके बाद अब 4 जून को होने वाली मतगणना के जरिए यह स्पष्ट होगा कि, इस बार अमरावती संसदीय क्षेत्र में जनादेश किसके पक्ष में गया है.
उल्लेखनीय है कि, इस बार अमरावती संसदीय क्षेत्र में भाजपा, कांग्रेस व प्रहार जनशक्ति पार्टी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला रहा. साथ ही साथ इस बार अमरावती संसदीय क्षेत्र कई बातों को लेकर काफी हद तक चर्चा में भी रहा. सबसे अव्वल तो भाजपा ने अपने पूरे राजनीतिक इतिहास के दौरान पहली बार अमरावती संसदीय क्षेत्र से पार्टी के कमल चुनावी चिन्ह के साथ ही अपना प्रत्याशी खडा किया और अमरावती में ईवीएम पर पहली बार कमल चुनावी चिन्ह दिखाई दिया. साथ ही साथ करीब 31 वर्ष के बाद कांग्रेस ने भी अमरावती संसदीय सीट पर अपने पंजा चुनावी चिन्ह के साथ अपना प्रत्याशी खडा किया. देश के दो प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच होने जा रही सीधी भिडंत को प्रहार पार्टी ने अपना प्रत्याशी खडा करते हुए त्रिकोणीय मुकाबले में तब्दील कर दिया. जिससे अमरावती में चुनाव काफी हद तक रोंचक हो गया.
* सभी राजनीतिक दलों ने प्रचार में झोंकी ताकत
विशेष उल्लेखनीय यह भी रहा कि, विदर्भ के अन्य किसी जिले की तुलना में अमरावती संसदीय क्षेत्र में अपने-अपने प्रत्याशियों के प्रचार हेतु सभी दलों के बडे-बडे नेताओं की प्रचार सभाएं हुई. जिनमें भाजपा प्रत्याशी के प्रचार हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस व अजीत पवार एवं भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले तथा कांग्रेस प्रत्याशी के प्रचार हेतु कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, राकांपा के मुखिया शरद पवार, शिवसेना उबाठा के मुखिया उद्धव ठाकरे, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष नाना पटोले, कांग्रेस सांसद मुकूल वासनिक एवं शिवसेना सांसद संजय राउत जैसे बडे-बडे नेताओं ने अमरावती संसदीय क्षेत्र का दौरा किया. एक निर्वाचन क्षेत्र में केवल दो उम्मीदवारों के लिए आये इन नेताओं की हाजिरी को देखते हुए अंदाजा लगाया जा सकता है कि, महायुति और महाविकास आघाडी के लिए अमरावती संसदीय क्षेत्र कितना अधिक प्रतिष्ठापूर्ण बन चुका है.
* इन मुद्दों को लेकर चर्चित रहा अमरावती
– दो दिन पहले प्रहार पार्टी द्वारा विधायक बच्चू कडू की सभा हेतु आरक्षित सायंस्कोर मैदान के आरक्षण की अनुमति अमित शाह की सभा के लिए प्रशासन ने ऐन समय पर रद्द कर दिया और सायंस्कोर मैदान पर सभा की अनुमति भाजपा को दी. जिसे लेकर 23 अप्रैल को अमरावती में जबर्दस्त घमासान मचा. जिसकी चर्चा राज्य सहित राष्ट्रीयस्तर पर हुई.
– भाजपा के स्थानीय पदाधिकारियों की ओर से जबर्दस्त विरोध रहने के बावजूद भाजपा ने सांसद नवनीत राणा को ही उम्मीदवारी दी. जिसके बाद भाजपा के कई नेताओं ने खुद को इस बार अमरावती संसदीय क्षेत्र में पार्टी के चुनाव प्रचार से अलग कर लिया. साथ ही महायुति में शामिल संजय खोडके भीे इस बार पूरी तरह से तटस्थ रहे.
– हनुमान चालीसा मामले के बाद से सांसद नवनीत राणा लगातार ही उद्धव ठाकरे को लेकर हमलावर रही तथा इस बार के चुनाव प्रचार दौरान भी उन्होंने उद्धव ठाकरे पर निशाना साधने का एक भी मौका नहीं छोडा.
– वहीं दूसरी ओर महाविकास आघाडी के सम्मेलन में हिस्सा लेने हेतु पहली बार अमरावती पहुंचे उद्धव ठाकरे ने अपने नेतृत्व वाली शिववसेना के पदाधिकारियों व शिवसैनिकों से ‘मातोश्री’ के अपमान का बदला लेने की बात कहीं.
– इसी सम्मेलन में राकांपा सुप्रीमों शरद पवार ने 5 वर्ष पहले नवनीत राणा का समर्थन करते हुए उन्हें विजयी बनाने को अपनी सबसे बडी भूल बताते हुए अमरावतीवासियों से माफी मांगी.
– कट्टर राजनीतिक विरोधक रहने के बावजूद पूर्व सांसद आनंदराव अडसूल के बेटे व पूर्व विधायक अभिजीत अडसूल एवं राणा दम्पति के बीच हुई मुलाकात सबसे अधिक चर्चा में रही. साथ ही नवनीत राणा के प्रचार हेतु केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की सभा में भी पूर्व विधायक अभिजीत अडसूल मंच पर दिखाई दिये.
* डेप्यूटी सीएम फडणवीस ने ली सर्वाधिक 4 सभाएं
अमरावती संसदीय क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी के प्रचार हेतु भाजपा नेता व उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जिले में अलग-अलग स्थानों पर सर्वाधिक 4 प्रचार सभाओं को संबोधित किया. जिससे संबोधित होता है कि, भाजपा के लिए अमरावती की सीट काफी प्रतिष्ठापूर्ण बनी हुई है.