संभाग में 24 वर्ष दौरान 21,286 किसान आत्महत्या
गत वर्ष सर्वाधिक 1069 किसान आत्महत्याएं अमरावती संभाग में

अमरावती/दि.2 – राज्य में गत वर्ष यानी 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2024 के दौरान 2706 किसानों द्वारा आत्महत्या की गई. जिसमें से सर्वाधिक 1069 किसान आत्महत्याएं अमरावती संभाग में हुई है. ज्ञात रहे कि, अमरावती संभाग विगत 25 वर्षो से किसान आत्महत्याओं के लिए बदनाम व कुख्यात है और सन 2001 से फरवरी 2025 के बीच 24 वर्ष 2 माह के दौरान अमरावती संभाग में 21 हजार 286 किसानों द्वारा आत्महत्या की गई है. ऐसे में किसान आत्महत्या के इस आंकडे को देखते हुए इस समस्या का समाधान करने हेतु धीरगंभीर उपाय किए जाने की सख्त जरुरत है.
किसान आत्महत्याओं को देखते हुए सवाल उपस्थित होते है कि, कृषि नीतियों को लेकर निश्चित तौर पर गलती कहां हो रही है, भविष्य में किसानों की स्थिति क्या रहेगी और खेती किसानी सहित किसानों को लेकर कोई विचार हो रहा है अथवा नहीं. विगत कुछ वर्षों के दौरान हमारे देश में किसान आत्महत्या कोई नई बात नहीं रही. किसान आत्महत्याओं का विगत कई दशकों का इतिहास रहा है और इस इतिहास की सतत पुनरावृत्ति हो रही है, जिस पर उपाय के तौर पर सितंबर 1986 में डॉ. एम. एस. स्वामिनाथन आयोग ने संसद के पटल पर अपनी रिपोर्ट रखी थी. जिसमें कहा गया था कि, कृषि उपज को उत्पादन खर्च से 50 फीसद से अधिक फायदा जोडकर दाम देने हेतु एमएसपी कानून बनाया जाना चाहिए और ऐसा कानून बनाए जाने के बाद उसी हिसाब से दाम दिए जाने चाहिए. इसके अलावा किसानों को संरक्षण देने हेतु किसान पेंशन का मुद्दा, किसानों के बच्चों को निशुल्क शिक्षा का मुद्दा एवं महंगाई की आड लेकर किसानों की होनेवाली लूट का मुद्दा जैसे विषयों को लेकर नीति तय करने की सिफारिश डॉ. स्वामिनाथन आयोग द्वारा की गई थी. लेकिन इसके बाद कई सरकारे आई और चली गई. परंतु स्वामिनाथन आयोग की सिफारिशों पर अमल करने का साहस किसी भी सरकार द्वारा नहीं किया गया. ऐसे में खेतो और किसानों को किसी तरह का संरक्षण नहीं है. कृषि उपज को न्यूनतम गारंटी मूल्य नहीं मिल रहा है. बीजों के दाम सहित उत्पादन खर्च में वृद्धि हो रही है. बाजार में किसानों के माल की बोली व्यापारियों द्वारा लगाई जाती है और उसी बोली के अनुसार किसानों को अपनी उपज बेचनी पडती है. ऐसे में किसानों के हाथ में कुछ भी नहीं रहता, जिसके चलते आवक कम व उत्पादन खर्च अधिक रहने की वजह से किसानों के सिर पर कर्ज का बोझ लगातार बढता चला जाता है. साथ ही रही-सही कसर बेमौसम बारिश, अतिवृष्टि व सूखे की वजह से फसलों के होनेवाले नुकसान द्वारा पूरी कर दी जाती है. जिससे परेशान होकर आए दिन कहीं न कहीं किसानों द्वारा अपने ही हाथों मौत को गले लगाया जा रहा है.
* जिलानिहाय आत्महत्या
जिला आत्महत्या पात्र अपात्र
अमरावती 5373 2856 2419
अकोला 3116 1864 1218
बुलढाणा 4431 1864 2500
यवतमाल 6177 2556 3588
वाशिम 2041 821 1211
* संभाग में किसान आत्महत्याओं के वर्षनिहाय आंकडे
वर्ष आत्महत्या पात्र अपात्र
2001 49 30 19
2002 80 57 23
2003 134 85 49
2004 419 238 289
2005 419 257 162
2006 1295 512 783
2007 1119 307 812
2008 1061 323 738
2009 905 245 660
2010 1068 251 817
2011 899 327 572
2012 862 382 480
2013 762 345 417
2014 862 570 292
2015 1184 828 356
2016 1103 551 552
2017 1066 547 519
2018 1053 518 535
2019 1055 592 463
2020 1136 549 587
2021 1183 638 554
2022 1202 714 488
2023 1156 654 502
2024 1169 411 456
* जारी वर्ष में 28 किसान आत्महत्याएं
इसके साथ ही यह जानकारी भी सामने आई है कि, जारी वर्ष के जनवरी व फरवरी इन दो माह के दौरान संभाग में 28 किसान आत्महत्याएं हुई है. इसमें से जनवरी माह में 15 व फरवरी माह में 13 किसान आत्महत्याएं हुई है.