300 तीर्थयात्रियों ने विदर्भ की कुलस्वामिनी के दर्शन का लिया लाभ
पीठाधीश्वर पूज्य संत युधिष्ठिरलाल साहिब की उपस्थिति

अमरावती/दि.4-भारत के कई हिंदु साधू-संतों ने पाकिस्तान में यात्रा के दौरान विचरण किया था. उस समय स्थानीय नागरिक उनके विचारों से प्रभावित होकर आज भी अपने जीवन में उसे आत्मसात करते है. उन संतों की विरासत का दर्शन करने तथा भारत के विविध धार्मिक स्थलों की आस्था व इतिहास को जानने पाकिस्तान से 300 यात्रियों का जत्था शहर में दाखिल हुआ है. पूज्य शदाणी दरबार के नवम पीठाधीश्वर पूज्य संत युधिष्ठिरलाल साहिब के सानिध्य तथा नेतृत्व में इन 300 यात्रियों के जत्थे ने गुरुवार को विदर्भ की कुलस्वामिनी माता अंबादेवी व माता एकवीरा देवी के दर्शन किये. पाकिस्तान से पधारे 300 यात्रियों के जत्थे ने पैदल यात्रा की शुरुआत सिंधु नगर स्थित पूज्य शदाणी दरबार से की. शाम 5 बजे आरंभ हुई इस यात्रा में उन्होंने फरशी स्टॉप, कंवर नगर चौक, राजापेठ मार्ग, राजापेठ चौक से अंबादेवी मार्ग, भूतेेशर चौक से होते हुए एकवीरा देवी मंदिर प्रांगण के पीछे हनुमान व्यायाम प्रसारक मंडल के गेट पर उनका आगमन हुआ. शाम 6:30 बजे नवम पीठाधिेशर पूज्य संत युधिष्ठिरलाल साहिब की उपस्थिति में सभी ने मां का जयकारा लगाया. इस संपूर्ण यात्रा में नवम पीठाधिेशर पूज्य संत युधिष्ठिरलाल साहिब भी पाकिस्तानी जत्थे के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे थे. सर्वप्रथम सभी ने मां अंबादेवी का दर्शन किया. यहां अंबादेवी मंदिर संस्थान के सचिव रवींद्र कर्वे, डॉ. जयंत पांढरीकर, एड. राजेंद्र पांडे आदि ने नवम पीठाधिेशर पूज्य संत युधिष्ठिरलाल साहिब का पुष्पों की माला पहनाकर स्वागत किया. पश्चात साई सभेत सभी ने मां का दर्शन कर उनकी ओटी भरी. इस समय नवम पीठाधिेशर पूज्य संत युधिष्ठिरलाल साहिब द्वारा मां के मंदिर में चादर भी चढाई गई, पश्चात उन्होंने सभी को संबोधित करते हुए मंदिर के इतिहास से अवगत कराया. संतों के साथ उपस्थित जत्थे ने पश्चात माता एकवीरा देवी का भी दर्शन किया. इस अवसर पर एकवीरा देवी मंदिर संस्थान के अध्यक्ष डॉ. अनिल खरैया, सचिव चंद्रशेखर कुलकर्णी द्वारा नवम पीठाधिेशर पूज्य संत युधिष्ठिरलाल साहिब का शॉल, श्रीफल व पुष्पमाला पहनाकर स्वागत किया गया. इस अवसर पर उपस्थित जत्था में आयी संगत को उन्होंने अपने कीर्तन द्वारा निहाल किया. दर्शन समारोह में पूज्य शदाणी महिला मंडल, बहु मंडल, युवा मंडल, पूज्य शदाणी सेवा मंडल व बालक मंडल के पदाधिकारी, सदस्य बडी संख्या में शामिल थे.