अमरावतीमहाराष्ट्र

विदर्भ के 5 हजार प्रकल्पग्रस्त किसानों को 832 करोड रुपयों की प्रतीक्षा

सितंबर माह से लटका हुआ है सानुग्रह अनुदान का मामला

अमरावती/दि.17– विदर्भ सिंचाई विकास महामंडल के नियामक मंडल ने सितंबर माह के दौरान विदर्भ के 5 हजार प्रकल्पग्रस्त किसानों हेतु 832 करोड रुपयों का सानुग्रह अनुदान मंजूर किया था. जिसके प्रयोजनार्थ आवश्यकतानुसार विधान मंडल के आगामी सत्र में पूरक मांग के जरिए निधि उपलब्ध कराने हेतु आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश अमरावती व नागपुर के सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दिये गये थे. चूंकि इस समय नागपुर में विधान मंडल का शीतसत्र चल रहा है. ऐसे में विदर्भ के करीब 5 हजार प्रकल्पग्रस्तों किसानों को 832 करोड रुपए की प्रतीक्षा लगी हुई है.

* नये सिंचाई मंत्री की ओर टिकी प्रकल्प बाधितों की निगाहे
इस अधिवेशन के जरिए प्रावधान होने पर प्रकल्प प्रभावी किसानों को सानुग्रह अनुदान मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा. परंतु सानुग्रह अनुदान का मुद्दा जलसंपदा मंत्री से संबंधित रहने और अब तक मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा नहीं होने के चलते जलसंपदा मंत्री की नियुक्ति नहीं हुई है. जिससे प्रकल्प प्रभावित भी संभ्रम में है. बता दें कि, विदर्भ क्षेत्र में सिंचाई प्रकल्पों के लिए सीधी खरीदी के जरिए जमीन देने वाले किसानों को प्रति हेक्टेअर 5 लाख रुपए की दर से 832 करोड रुपयों का सानुग्रह अनुदान देने को विदर्भ सिंचाई विकास महामंडल के नियामक मंडल ने 24 सितंबर को मान्यता प्रदान की थी.

* किसे मिलने वाला है लाभ?
अमरावती संभाग के पांचों जिलों सहित नागपुर संभाग के नागपुर, वर्धा, भंडारा व गोंदिया जिलों की करीब 16 हजार 636 हेक्टेअर जमीन वर्ष 2006 से 2023 के दौरान सीधी खरीदी के जरिए संपादीत की गई थी. वर्ष 2013 में नया भूसंपादन कानून लागू होने के बाद पहले की तुलना में भूसंपादन का मुआवजा ज्यादा आकर्षक मिलने लगा. जिसकी तुलना में पहले सीधी खरीदी के चलते दिया जाने वाला मुआवजा कम महसूस होने तथा सीधी खरीदी के चलते अदालत के दरवाजे भी बंद रहने को ध्यान में रखते हुए विदर्भ सिंचाई विकास महामंडल ने 832 करोड रुपयों के अनुदान का प्रस्ताव मंजूर कर प्रभावित किसानों को राहत दी थी. जिस पर अमल करने हेतु 15 अक्तूबर को विदर्भ सिंचाई विकास महामंडल के अधीक्षक अभियंता के हस्ताक्षर से परिपत्रक भी जारी हुआ. परंतु उसी दिन दोपहर में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता भी लागू हो गई थी. जिसके तहत निधि वितरण के काम पर ब्रेक लग गया था. जो अब भी रुका हुआ है.

* शीतसत्र में होने वाली थी निधि की उपलब्धता
विधान मंडल के अगले सत्र में पूरक मांग के जरिए निधि उपलब्ध कराने हेतु आवश्यक कार्रवाई की जाये तथा मांग के अनुसार निधि प्राप्त होने के बाद प्रत्यक्ष अनुदान का वितरण विभागीय कार्यालय स्तर के जरिए किया जाये. ऐसे मार्गदर्शक निर्देश जारी हो चुके थे. लेकिन वे निर्देश आचार संहिता में अटक गये थे. वहीं अब विधान मंडल का शीतसत्र जारी रहते समय सिंचाई मंत्री का नाम ही तय नहीं रहने के चलते संबंधित अधिकारियों के लिए भी काफी मर्यादाएं आ गई है.

* 15 अक्तूबर को ही जारी हुआ था परिपत्रक
– संबंधित प्रस्ताव को मान्यता देते हुए नागपुर स्थित विदर्भ पाठबंधारे विकास महामंडल ने 15 अक्तूबर को मार्गदर्शक निर्देश रहने वाला परिपत्रक भी जारी किया था. लेकिन 15 अक्तूबर से ही विधानसभा चुनाव की आदर्श आचार संहिता लागू हो जाने के चलते विदर्भ क्षेत्र के प्रकल्पग्रस्तों को निराशा का सामना करना पडा.
– वहीं अब राज्य के नई सरकार तो गठित हो गई है, लेकिन सिंचाई मंत्री का नाम तय नहीं हुआ है. यद्यपि विदर्भ सिंचाई विकास महामंडल के नियामक मंडल ने निधि को मान्यता दी है. परंतु निधि की उपलब्धता वित्त मंत्री व सिंचाई मंत्री के अख्तियार वाली बात है. ऐसे में इस बात को लेकर संदेह जताया जा रहा है कि, बेहद अल्प अवधि वाले नागपुर शीतसत्र के दौरान सानुग्रह अनुदान का मसला हल हो पाता है अथवा नहीं.

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