शिवसेना व राकांपा के महकमों की ओर 8 हजार करोड रूपये बकाया
उर्जा मंत्री नितीन राउत ने दिया आघाडी को ‘शॉक’

* महावितरण के संकट का कारण किया उजागर
नागपुर/दि.24– इस समय शिवसेना व राष्ट्रवादी कांग्रेस के पास रहनेवाले नगरविकास व ग्रामविकास विभाग की ओर ही महावितरण के 8 हजार करोड रूपयों के विद्युत बिल बकाया है. ऐसे में यदि लगातार बढते घाटे की वजह से आगे चलकर महाराष्ट्र को अंधेरे का सामना करना पडता है, तो इसके लिए कांग्रेस कतई जिम्मेदार नहीं रहेगी. इस आशय का प्रतिपादन करते हुए राज्य के उर्जा मंत्री नितीन राउत ने राज्य में चल रहे बिजली संकट का ठीकरा शिवसेना व राष्ट्रवादी कांग्रेस के सिर पर फोडा है. उर्जा मंत्री राउत द्वारा दिये गये जबर्दस्त शॉक की वजह से अब महाविकास आघाडी में एक बार फिर आपसी सिर-फुटव्वल होने की पूरी उम्मीद है.
यहां पर एक मराठी न्यूज चैनल के साथ संवाद साधते हुए उर्जा मंत्री नितीन राउत ने पहली बार शिवसेना व राष्ट्रवादी के पास रहनेवाले महकमों की ओर महावितरण की बकाया राशि पर बात की और आघाडी में शामिल दोनोें घटक दलोें को सीधे आरोपी के कटघरे में खडा कर दिया. उन्होंने कहा कि, इस समय राज्य में महावितरण की स्थिति बेहद बिकट है. वहीं राज्य के नगरविकास तथा ग्रामीण विकास विभाग की ओर करीब 8 हजार करोड रूपयों का बिल बकाया है. इन दोनों महकमों ने अब तक यह रकम महावितरण को अदा नहीं की है. साथ ही उद्योगों को भी अनुदान के तौर पर 3 हजार करोड से अधिक की रकम नहीं दी गई है. जिसके चलते महावितरण आर्थिक संकट का सामना कर रही है. ऐसे में यदि राज्य अंधेरे का सामना करता है, तो केवल कांग्रेस ही जिम्मेदार नहीं रहेगी, बल्कि इसके लिए पूरी महाविकास आघाडी सरकार जिम्मेदार रहेगी. अत: राज्य सरकार ने महावितरण को निधी उपलब्ध करानी चाहिए. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि, राज्य में इस समय बडे पैमाने पर कोयले की भी टंचाई है और यदि पर्याप्त मात्रा में कोयला नहीं मिलता है, तो राज्य में लोडशेडिंग करने की भी नौबत आ सकती है. साथ ही अगर राज्य सरकार द्वारा नगर विकास, ग्राम विकास विभाग के बिल अदा करते हुए उद्योगोें के अनुदान के पैसे दिये जाते है, तो हम किसानों को राहत दे सकते है. इस समय उर्जामंत्री नितीन राउत ने यह भी बताया कि, वे इस संदर्भ में राज्य के मुख्यमंत्री उध्दव ठाकरे सहित उपमुख्यमंत्री अजीत पवार तथा राजस्व मंत्री बालासाहब थोरात को भी पत्र लिख चुके है तथा तीनोें को महावितरण के संकट के संदर्भ में बताया जा रहा है.