आदित्य शिंगोरे व एड. रघुवंशी ने अदालती आदेश को लेकर दी गलत जानकारी
अदालत ने 15 दिन में जांच पूरी कर रिपोर्ट देने व मामला दर्ज नहीं करने का दिया था निर्देश
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* शिंगोरे व रघुवंशी ने बिलकुल उलट प्रेसनोट जारी कर छपवाई खबरे
मृगनयनी असो. के नितिन बाहे व संतोष टारपे ने पत्रवार्ता में दी जानकारी
अमरावती /दि. 14– विगत 21 जनवरी को भाजपा नेता दिवंगत डॉ. प्रदीप शिंगोरे के बेटे आदित्य शिंगोरे व उनके वकील एड. सत्यजीत सिंह रघुवंशी ने प्रेसनोट जारी करते हुए अखबारों के जरिए खबर प्रकाशित करवाई थी कि, अमरावती की अदालत के न्या. खाडे ने मृगनयनी असोसिएटस् की जांच करते हुए गाडगे नगर पुलिस को मामला दर्ज करने और 15 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश जारी किए है. जबकि हकीकत में न्या. खाडे की अदालत ने ऐसा कोई आदेश ही जारी नहीं किया था. बल्कि संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने अगली तारीख तक इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं करने तथा प्राथमिक जांच को 15 दिन के भीतर पूरा करते हुए अपनी रिपोर्ट अदालत के सामने प्रस्तुत करने हेतु कहा था. ऐसे में आदित्य शिंगोरे व एड. सत्यजीत सिंह रघुवंशी ने अदालती आदेश का गलत मतलब निकालते हुए प्रेसनोट जारी कर अखबारों के जरिए गलत खबरे छपवाई. जिससे मृगनयनी असोसिएटस् की बदनामी हुई. इस आशय की जानकारी आज मृगनयनी असोसिएटस् के भागीदार नितिन रामभाऊ बाहे व संतोष निरंजन टारपे द्वारा दी गई.
इस पत्रवार्ता में मृगनयनी असो. के दोनों भागीदारों ने बताया कि, उनका 17 जुलाई 2018 को डॉ. प्रदीप शिंगोरे के साथ मौजे रहाटगांव, प्रगणे नांदगांव पेठ, तह. जि. अमरावती स्थित शेत सर्वे नं. 161/2 में प्लॉट नं. 22 बी/24 बी-1, प्लॉट नं. 22 बी/24 बी-5, प्लॉट नं. 22 बी/24 बी-6 ऐसे तीन प्लॉट और उस पर रहनेवाले अधूरे निर्माणकार्य का सौदा 78 लाख रुपए में हुआ था. साथ ही उस समय यह तय हुआ था कि, डॉ. प्रदीप शिंगोरे खरीदी लेने की बजाए शेष निर्माण कार्य मृगनयनी असोसिएटस् के जरिए अपने खर्च पर पूरा करवाएंगे और दोनों पक्षों की आपसी सहमती से इन प्लॉट पर बने रो-हाऊसेस की बिक्री की जाएगी. साथ ही इसी रकम में से डॉ. प्रदीप शिंगोरे व मृगनयनी असोसिएटस् के बीच पूरे व्यवहार के अंत में हिसाब-किताब करते हुए आर्थिक लेनदेन किया जाएगा. मृगनयनी असोसिएटस् के भागीदारों के मुताबिक यह करार हो जाने के बाद उन तीनों प्लॉट पर रो-हाऊसेस बनाते हुए डॉ. प्रदीप शिंगोरे की सहमति के अनुसार रो-हाऊसेस की अलग-अलग लोगों को बिक्री की गई. इन रो-हाऊसेस के निर्माण में मृगनयनी असोसिएटस् का 8 लाख 30 हजार रुपए का खर्च हुआ था और अंतिम रकम के तौर पर उन्होंने प्रदीप शिंगोरे के कहने पर 7 लाख रुपए अपने पास रखी थी. परंतु इसी दौरान 4 सितंबर 2022 को डॉ. प्रदीप शिंगोरे की मौत हो गई और तब तक पूरा व्यवहार साफसुथरा था. परंतु प्रदीप शिंगोरे की मौत के बाद उनके बेटे आदित्य शिंगोरे के मन में खोट आ गई और आदित्य शिंगोरे ने अपने वकील एड. सत्यजीत सिंह रघुवंशी के मार्फत मृगनयनी असोसिएटस् के खिलाफ झूठा मामला दर्ज किया. इस मामले की सुनवाई करते हुए 21 जनवरी 2025 को अदालत ने आदेश जारी किया कि, इस मामले में केवल प्राथमिक जांच कर उसकी रिपोर्ट 15 दिन के भीतर कोर्ट में पेश की जाए और अगले आदेश तक गाडगे नगर पुलिस द्वारा मृगनयनी असोसिएटस् के खिलाफ कोई अपराध दर्ज न किया जाए. परंतु आदित्य शिंगोरे व उनके अधिवक्ता सत्यजीत सिंह रघुवंशी ने इस मामले को लेकर प्रेसनोट जारी करते हुए इस आशय की खबर फैलाई की अदालत ने मामले में युक्तिवाद पूरा होने के बाद गाडगे नगर पुलिस को एफआईआर दर्ज कर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है. साथ ही वादी को उचित राहत व मुआवजा दिए जाने की बात कही है. जबकि हकिकत में अदालत ने एफआईआर दर्ज करने को लेकर कोई निर्देश नहीं दिए थे.