एक महिना रोजे की ट्रेनिंग के बाद बुरे कामों से बचने का तरीका सिखाता रमजान
शहर के डॉक्टरों ने रमजान महिने पर दैनिक अमरावती मंडल को दी प्रतिक्रिया

अमरावती/दि.23– रमजान का पवित्र महिना शुरू है. दुसरा अशरा गुनाहों की मगफिरत का शुरू हो चुका है. समाज के सभी भाई-बहने व बच्चे रोजा रख कर इबादत कर रहे है. बच्चे भी इसमें बढ चढ कर हिस्सा ले रहे है. मुस्लिम समाज बंधु सहित नौकरी पेशा लोग रमजान का रोजा रखने के साथ ही अपनी सेवाएं आमजन को दे रहे है. ऐसे में मुस्लिम समाज के अनेक डॉक्टरों व्दारा दिन भर मरिजों की सेवा के साथ ही रोजा, नमाज व इबादत में अपना दिन गुजारने के बाद अपने रब को राजी करने में लगे हुए है. साथ ही यह डॉक्टर शहरवासियों को रोजा रखने से होने वाले फायदे के साथ ही लोगों को दिनचर्या में कैसे बदलाव करना है तथा रोजे से शरीर को क्या लाभ मिलता है, इसकी जानकारी दे रहे है.
रोज़ा ये नही है के आप कितने मजबूत है के आप खाने से दूर रहे सकते है , बल्कि आप किन चीज़ों से दूर रहे सकते हो जो आपको अल्लाह से दूर रख सकता है. अल्लाह तमाम उम्मत को इस महीने की सही क़दरदानी अता फ़रमाए
डॉ. आसीफ भुरानी, ताज नगर
रोजा रखने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है और रक्तचाप नियंत्रित रहता है, जिससे हृदय रोगों का खतरा कम होता है.
रोजा रखने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है और पाचन क्रिया में सुधार होता है
डॉ. मोहसीन, ताज नगर
इस मुबारक महीने में हमें चाहिए के हम इबादत के साथ-साथ गरीब मिस्कीनो और मदारीसों का खास ख्याल रखें और अपने गरीब रिश्तेदारों का भी खास ख्याल रखें.अफ्तार में कोल्ड्रिंक्स और सोडे के इस्तेमाल से बचें.एक अहम गुज़ारिश ये भी है के अपनी दुआओं में फिलस्तीन के मुसलमान भाइयों और बहनों और बच्चों को ज़रूर याद रखें.
डॉ. ज़ाहिद नय्यर
संचालक जुनैरा होम्योपैथिक क्लीनिक
जमील कॉलोनी,अमरावती
अल्लाह ने अपने बंदो को इस जमीन पर अशरफुल मखलुकात बना कर भेजा है. और तमाम आलम के लिए सबसे अफजल तरीन महिना माहे रमजान को रखा है. पुरी दुनिया के लिए इस महिने में खुदा की बरकातें रहमतें और नवाजिशात नाजील होती है. और खुदा के तमाम नेक बंदे इस महिने मं अपनी इबादतों, नमाजों और रोजे रख कर अपने नमाए आमाल को पुख्ता बनाते है. रोजादार की कोई भी दुआ जाया नहीं जाती दुनिया का गरीब से गरीब इंसान भी माहे रमजान में खुदा के फजलो करम फैज-ए-आब होता है. बच्चे बुढे जनाव सभी लोग रोजे रख कर खुदा की बारगाह में जब दुआ के लिए हाथ उठाते है तो अल्लाह उनकी दुआएं पूरी करता है. अल्लाह ताला से मेरी दुआ है कि पूरे भारत और तमाम दुनिया में अमन और मोहब्बतत कायम कर दे. दुनिया से जुल्म ओ सितम का खात्मा कर दे और पूरे अलाम(दुनिया) पर अपने फजलो करम बरसा दें.ताकि इस दुनिया में रहने वाले तमाम इंसान अमन और सुकुन से रहें.
डॉ. खालिद नैय्यर, जमील कॉलोनी अमरावती
सिर्फ भूखे रहने का नाम नहीं है रोजा
रमजान का पाक महिना सिर्फ भूखे रहने का नाम नहीं है. इसमें खाने पीने के रोजे के साथ ही बुरी बात, बुरे व्यवहार, बुरा देखना, बुरा सोचना, बुरी लत को छोडना ही सही तरीके से रोजा है. हर बुरे काम से बचने का महिना है. एक महिना रोजे की ट्रेनिंग के बाद एक महिना बुरे कामों से बचने के बाद आपसे उम्मीद की जाती है कि बाकि के 11 महिने भी आप एक अच्छे इंसान बन कर अपनी जिंदगी गुजारे. आपसे दुनिया के हर व्यक्ति को फायदा ही होना चाहिए. किसी किस्म का नुकसान नहीं होना चाहिए.
डॉ. अबरार अहमद (डेंटिस्ट, नागपूरी गेट चौक)
रोजा रखने का मतलब भूखा प्यासा रहना नहीं होता है. यह शरीर की कोशिकाओं को साफ करने के लिए बहुत फायदेमंद होता है. ब्लड शुगर लेवल काम करता है. दिल को ताकत देता है. ब्लड प्रेशर नॉर्मल रहता है. शरीर का वजन नियंत्रित रहता है.
डॉ शेख अकिब, हबीब नगर
रोजा रखने से हमारे शरीर को बहुत फायदे होते है. जैसे- ये शरीर से जहरीले माद्दो को खतम करता है. यह पाचन शक्ति को बढाता है. दिल के अमराज से बचाव करता है. इम्युनिटी पॉवर बढाता है. शुगर के मरीज में इन्सुलेंस इनसेन्सीटीवटी को इम्प्रूव करता है. दिमाग के फंक्शन को बढाता है. इसी लिए हर किसी ने रोजा रख कर अपने शरीर में होने वाले बदलाव लाना जरूरी है.
डॉ. असलाफ शेख( जमील कॉलोनी)
रमजान के रोजे के साइंटिफिक बहुत से फायदे हैं. सबसे पहले तो रोजा रखने से इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत बनता है. हमारे शरीर के जितने भी बड़े अंग है जैसे दिल, लिवर, किडनी, ब्रेन इन सब से शरीर में पैदा होने वाले टॉक्सिन बाहर निकल जाते हैं. यही टॉक्सिन हमारे शरीर में कैंसर जैसी बीमारी पैदा होने का सबब बनते हैं.
डॉ जैनुल आबेदीन, इकबाल कॉलोनी अमरावती
* रोजा एक महिने का प्रशिक्षण है
रमजान महिना में अल्ला तआला ने सभी पर रोजा फर्ज किया है. इसमें मरिजों, बुजुर्गो व छोटे बच्चों को जरूर कुछ रियायत दी गई है. रमजान महिने में रोजा एक हिसाब से एक महिने का ऐसा प्रशिक्षण है जिसके जरिए शेष 11 महिने चुस्त- तंदुरुस्त होकर काम किया जा सकता है. शरीर में उर्जा रोजे के माध्यम से निर्माण होती है.
डॉ. मो.मसुद रफत, पाकिजा कॉलोनी
* शरीर के भीतर की करता है सफाई
रमजान के रोजे के साथ मरिजों की सेवा करना,यह दोनों साथ साथ करना यह भी एक इबादत की तरह ही है. मैंने जब से होश संभाला है, तब से रोजा रख रहा हुं. मेडिकल पश्चात मरिजों की सेवा के साथ भी रमजान के रोजे व इबादत में दिन गुजरता है.
डॉ. फिरोज खान, जमील कॉलोनी
* शरीर को मिलती है नयी उर्जा
रोजा रखने से शरीर को उर्जा मिलती है. साथ ही प्रतिरोधक शक्ति भी बढती है. शरीर के हर अंग को नयी उर्जा मिलती है. रोजा रख कर इबादत किया जा रहा है. क्लिनिक पर मरिजों की सेवा के साथ मस्जिदों में इबादत व घर पर कुरआन की तिलावत में दिन गुजर रहा है. कुल मायनों में पुरा दिन व्यस्त गुजर रहा है.
डॉ. असलम भारती, अरफात कॉलोनी, (सचिव अ.यु.डॉ.अ.)