
अमरावती/दि.2-जनसामान्य के साहित्य, संस्कृति और कला अभिरुचि के संवर्धन के लिए समर्पित लोकप्रिय मराठी पत्रिका (मासिक) ‘अक्षरवैदर्भी’ अब नए रूप में पाठकों से मिलने आ रही है. पत्रिका ने अपने 42वें वर्ष में पदार्पण किया है और गुढीपाडवा तथा मराठी नववर्ष के शुभ अवसर पर, यानी 30 मार्च को, ‘अक्षरवैदर्भी’ ऑनलाइन स्वरूप में पाठकों के लिए उपलब्ध हो गई है.
इस अवसर पर पत्रिका का ऑनलाइन उद्घाटन विभागीय सूचना उपनिदेशक अनिल आलुरकर के हाथों संपन्न हुआ. इस दौरान सहायक निदेशक विजय राऊत प्रमुख रूप से उपस्थित थे.इस अवसर पर अनिल आलुरकर ने कहा कि ‘अक्षरवैदर्भी’ डिजिटल स्वरूप में पाठकों के लिए उपलब्ध होने से पत्रिका दूर-दूर तक पहुंचेगी और पाठक इसे कभी भी पढ़ सकेंगे. इससे पत्रिका के पाठकों की संख्या और लोकप्रियता बढ़ेगी.
सहायक निदेशक विजय राऊत ने लगातार 41 वर्षों तक बिना किसी बाधा के ‘अक्षरवैदर्भी’ पत्रिका को मुद्रित रूप में पाठकों तक पहुंचाने के लिए संपादक डॉ. सावरकर और उनकी टीम के अथक प्रयासों की सराहना की. पत्रिका के मुख्य संपादक डॉ. सुभाष सावरकर ने पिछले 41 वर्षों से नियमित रूप से एक भी अंक न चूकते हुए ‘अक्षरवैदर्भी’ को पाठकों के लिए उपलब्ध कराया है. उन्होंने समाज के सभी वर्गों के साहित्य प्रेमियों और पाठकों के लिए हमेशा गुणवत्तापूर्ण साहित्य प्रदान किया है. कार्यक्रम की सफलता के लिए डॉ. सुभाष सावरकर की धर्मपत्नी सौ. निर्मला सावरकर, उनके पुत्र इंजीनियर समीर सावरकर, पुत्रवधू मिनल सावरकर, प्रो. अनिल प्रांजले, डॉ. योगिता पिंजरकर, इंजीनियर प्रकाश आमले, डॉ. निरंजनमाधव अंजनगर, प्रो. कृष्णकांत पराते, इंजीनियर आशीष देशपांडे, रवि डहाके और ‘अक्षरवैदर्भी’ का पूरा परिवार बड़ी संख्या में उपस्थित था.
कार्यक्रम का संचालन प्रो. अनिल प्रांजले ने किया, जबकि डॉ. योगिता पिंजरकर ने आभार व्यक्त किया. कार्यक्रम में प्रो. सतीश तराल, प्रो. लक्ष्मीधर मुले, नीलिमा मुले, मंजू आमले, प्रो. दिनेश राऊत, प्रो. मनीष चोपडे, प्रो. शीतल राऊत, संजय वाघुले, डॉ. खोजरे, प्रो. विश्वनाथ धुमाल और कवि, साहित्यकार प्रमुख रूप से उपस्थित थे.