अमरावती लोकसभा इतिहास 1952 से 1977
1952 में डॉ. पंजाबराव देशमुख की एकतरफा जीत के बात बने थे केंद्रीय मंत्री

* प्रतिद्वंदी सभी उमीदवारों की हुई थी जमानत जब्त
* 1977 के पूर्व अमरावती संसदीय क्षेत्र में दर्यापुर, मेलघाट, वलगांव, अमरावती, बडनेरा और चांदूर रेलवे विधानसभा क्षेत्र का था समावेश
अमरावती /दि. 13– लोकसभा चुनाव के 1952 में पहले आम चुनाव हुए थे. इस चुनाव में कृषि व शिक्षण महर्षि के नाम से पहचाने जाते डॉ. पंजाबराव देशमुख ने एकतरफा जीत हासिल की थी और सभी प्रतिद्वंदी उमीदवारों की जमानत जब्त हुई थी. उनकी इस शानदार जीत के कारण पंडित जवाहरलाल नेहरु ने खुष होकर उन्हें केंद्रीय मंत्री बनाया था.
अमरावती लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में 1977 के पूर्व दर्यापुर, मेलघाट, वलगांव, अमरावती, बडनेरा और चांदूर रेलवे ऐसे 6 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र का समावेश था. लेकिन 1977 की पुनर्रचना के बाद चांदूर रेलवे विधानसभा क्षेत्र को अलग कर अचलपुर, दर्यापुर, वलगांव, अमरावती, बडनेरा और मेलघाट ऐसे 6 विधानसभा क्षेत्र का समावेश किया गया. 1967 के चुनाव में अमरावती लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में 5 लाख 13 हजार 828 मतदाता थे.
1952 में हुए पहले आम चुनाव में अमरावती लोकसभा के लिए कांग्रेस के उमीदवार डॉ. पंजाबराव देशमुख थे. उन्होंने इस चुनाव में अपने सभी प्रतिद्वंदी उमीदवारों को बुरी तरह पराजित किया. साथ ही सभी की जमानत जब्त करवाई. इस शानदार जीत के कारण पंडित जवाहरलाल नेहरु काफी खुश हुए और उन्होंने डॉ. पंजाबराव देशमुख को केंद्रीय मंत्रीमंडल में शामिल किया था. 1957 के चुनाव में भी डॉ. पंजाबराव देशमुख कांग्रेस के उमीदवार थे. इस चुनाव में 6 उमीदवार मैदान में थे. डॉ. पंजाबराव देशमुख को इस चुनाव में 62.3 प्रतिशत वोट यानि 1 लाख 57 हजार 523 वोट मिले थे. जबकि उनके प्रतिद्वंदी एस. एच. मशानकर को केवल 26 हजार 535 वोट मिल पाए थे. मशानकर सहित अन्य सभी उमीदवारों की जमानत जब्त हुई थी. 1962 में भी डॉ. पंजाबराव देशमुख कांग्रेस के उमीदवार के रुप में तीसरी बार चुनावी मैदान में उतरे. इस चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के रा. सू. गवई उनके प्रतिद्वंदी उमीदवार थे. यह चुनाव भी एकतरफा हुआ. डॉ. पंजाबराव देशमुख को 52.8 प्रतिशत तथा रा. सू. गवई को 34.8 प्रतिशत वोट मिले थे. 1967 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने के. जी. देशमुख को उमीदवारी दी. उनका मुकाबला फिर रिपब्लिकन पार्टी के रा. सू. गवई से हुआ. देशमुख को 47.72 यानि 1 लाख 62 हजार 887 वोट मिले. जबकि रा. सू. गवई को 1 लाख 41 हजार 813 यानि 41.5 प्रतिशत वोट मिले. 1971 के मध्यावधि चुनाव में विदर्भ के सभी निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के सभी उमीदवार भारी मतो से निर्वाचित हुए. अमरावती लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र भी इसमें अपवाद नहीं था. कांग्रेस के के. जी. देशमुख को 2 लाख 71 हजार 2 वोट मिले. जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (खोब्रागडे) के प्रत्याशी सुखदेव फगोजी तिडके को केवल 55 हजार 98 वोट मिले. इस चुनाव में कुल 4 उमीदवार मैदान में थे. इनमें कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के सुदाम देशमुख और निर्दलिय के रुप में यशवंत भगवंत बदुकले ने चुनाव लडा था. सुदाम देशमुख को 21 हजार 743 और यशवंत बदुकले को मात्र 1347 वोट मिले थे. के. जी. देशमुख 2 लाख 16 हजार वोट से निर्वाचित हुए थे.
बॉक्स – फोटो – नानासाहेब बोंडे, हरीभाऊ कलोती – नेट से
* 1977 में कांग्रेस ने नानासाहेब बोंडे को दी उमीदवारी
1977 के लोकसभा चुनाव में अमरावती संसदीय क्षेत्र से कुल तीन उमीदवार मैदान में थे. इस चुनाव में कांग्रेस ने नानासाहेब बोंडे को उमीदवारी दी. जबकि भारतीय लोकदल के हरीभाऊ कलोती और निर्दलिय के रुप में श्यामभाऊ बाबुलाल श्रीवास ने चुनाव लडा था. इस चुनाव में कुल 5 लाख 80 हजार 735 मतदाता थे. कुल 3 लाख 71 हजार 295 मतदाताओं ने मतदान किया था. नानासाहेब बोंडे को 2 लाख 59 हजार 62 यानि 71.62 प्रतिशत वोट मिले. जबकि हरीभाऊ कलोती को 98 हजार 40 वोट मिले और श्यामभाऊ श्रीवास को केवल 4254 वोट प्राप्त हुए. कांग्रेस के नानासाहेब बोंडे इस चुनाव में 1 लाख 60 हजार 662 वोटो के अंतर से चुनाव जीते थे.