देऊरवाडा में मिला भगवान भोलेनाथ का प्राचीन मंदिर
खुदाई दौरान जमीन में दबे मंदिर का पता चला
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* शिवलिंग व पत्थर की नक्काशीदार मूर्तियां मिली
चांदुर बाजार/दि. 21 – भगवान नृसिंह के मंदिर हेतु विख्यात समिपस्थ श्री क्षेत्र देऊरवाडा में कल गुरुवार को एक खेत परिसर में खुदाई दौरान भगवान भोलेनाथ का बेहद प्राचीन मंदिर मिला है. जिसके बारे में इस गांव के सरपंच व पुलिस पाटिल द्वारा तुरंत ही पुरातत्व विभाग को सूचना दी गई.
उल्लेखनीय है कि, श्री क्षेत्र देऊरवाडा में भी अपनी तरह का एक अनूठा त्रिवेणी संगम है. यहां पर उत्तर दिशा की और बहती पूर्णा नदी व मेघा नदी तथा गुप्त मानी जाती शारदा नदी के संगम स्थल से कुछ ही दूरी पर स्थित खेत में एक पुराना मंदिर है. 10 बाय 10 के इस पुराने मंदिर की विगत कुछ दिनों से गांव में रहनेवाले युवाओं द्वारा खुदाई की जा रही थी और गत रोज खुदाई के दौरान युवाओं को तीन-चार फीट की गहराई पर चुने से बनी छत नजर आई. इसके बाद छत के चारों और खुदाई करने पर एक मंदिर का दरवाजा दिखा. इसके भीतर की मिट्टी को बाहर निकालने पर काले पत्थर से बना प्राचीन शिवलिंग तथा देवी की नक्काशीदार मूर्ति बरामद हुए. जिसे देखकर खुदाई करनेवाले युवाओं के आश्चर्य व खुशी का ठिकाना न रहा.
इस पुरातन मंदिर में खुदाई करनेवाले युवाओं के मुताबिक उनके गांव के बडे बुजुर्ग हमेशा यह दावा किया करते थे कि, किसी समय गांव में नदी किनारे एक मंदिर हुआ करता था. जिसे लेकर पैदा हुई उत्सुकता के चलते उन्होंने समूह बनाकर नदी से कुछ दूरी पर खुदाई करते हुए मंदिर का खोज कार्य शुरु किया और उन्हें गत रोज इस काम में सफलता भी मिली.
* धार्मिक मान्यता से जुडा है देऊरवाडा
धार्मिक किवदंती के मुताबिक जब भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लेकर भक्त प्रल्हाद के पिता हिरण्यकश्यप के सीधे व पेट को अपने नाखूनों से फाडकर वध किया था तब भगवान नृसिंह के नाखूनों से हिरण्यकश्यप का रक्त कई प्रयासों के बावजूद धुल नहीं रहा था. ऐसे में भगवान नृसिंह ने देऊरवाडा स्थित पूर्णा, मेघा व गुप्त शारदा नदी के संगम में आकर अपने नाखूनों पर लगे रक्त को धोने में सफलता पाई थी. उसी समय से देऊरवाडा में भगवान नृसिंह का मंदिर स्थापित किया गया. जो संभवत: समूचे देश में इकलौता नृसिंह मंदिर है.