अमरावती

हृदय की विशालता जितनी होगी उतना खुद का और दूसरों का लाभ होगा

संत डॉ. संतोषकुमार के आशीर्वचन

* पूज्य शिवधारा आश्रम में शिवधारा झूलेलाल चालिहा
अमरावती/ दि. 4- हृदय की विशालता जितनी होगी उतना ही खुद का और दूसरों का लाभ होगा. ऐसे आशीर्वचन शिवधारा आश्रम के पूज्य संत डॉ. संतोषकुमार ने व्यक्त किए. स्थानीय सिंधुनगर स्थित पूज्य शिवधारा आश्रम में शिवधारा झूलेलाल चालिहा का आयोजन किया गया है. जिसमें वे 19 वें दिन भाविको को प्रवचन द्बारा संबोधित कर रहे थे. संत श्री डॉ. संतोषकुमार ने अपने प्रवचन में कहा कि हमारे घर का तथा ऑफिस, फैक्टरी, व्यवसाय का वातावरण, हमारा पहनावा, हमारा बोलचाल, हमारे उठने बैठने का सलीखा हमारे विचारों को दर्शाते है.
वैसे ही यश-अपयश, सफलता-असफलता, समृध्दि या दरिद्रता, आस्था और नास्तिकता भी हमारी सोच को दर्शाते है और उस पर ही आधारित हमारा भविष्य क्योंकि कुछ लोग संकुचित सोच वाले रहते है. जिसके कारण ना वह खुद की उन्नति कर पाते है और ना ही दूसरो की उन्नति सहन कर पाते है और ना ही उनसे किसी ओर को लाभ होता है. वैसे ही जो विचारों के विशाल होते है वह सदैव खुश रहते है और उनका दूसरों की खुशी बढाने में योगदान रहता है. खुद उनका जीवन समृध्द रहता है और दूसरों के उत्थान की भी वे सीढी बनते है.
खुद भगवान की भक्ति में लीन रहते है और दूसरों की भक्ति भावना बढाने में सदैव प्रयास करते रहते है. समझदार वह है जो हृदय की विशालता बढाने में विश्वास रखते है. वैसे वातावरण में जाते रहते है. विशाल हृदय वालों से उनका नाता रहता है और उनका लक्ष्य भी दूरदृष्टि एवं विशालता वाला होता है और उसका परिणाम भी यशस्वी बनाता है. जैसे वर्तमान की भारत सरकार ने आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में हर घर तिरंगा अभियान चलाया है.
वैसे ही सत्य साईबाबा संस्था द्बारा भारत के कई प्रांतों में नव जन्में बच्चे से लेकर 10 साल के आयु तक के बच्चों के दिल की बीमारियोें के ऑपरेशन नि:शुल्क किए जा रहे है. यह कहीं तो भी संतो की हृदय की विशालता का ही परिणाम है. इस दूरदृष्टि से एवं हृदय की विशालता से 1008 सद्गुरू स्वामी शिवभजनजी महाराजजी की अपार कृपा से शिवधारा मिशन फाउंडेशन चारधाम मंदिर का शिलान्यास हो चुका है. गौशाला, गुरूकुल, वृध्दाश्रम, ध्यान केन्द्र एवं मल्टीस्पेशालिटी अस्पताल का कार्य चरणबध्द करने जा रहा है और यही सीख हम सबके लिए भी है कि हृदय की विशालता को अपनाए, ऐसे आशीर्वचन भाविको को संत श्री डॉ. संतोषकुमार ने दिए.

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