भरत चरित्र एक आदर्श : आनंद महाराज
प्रयागराज निवासी मानसप्रेमी के मुखारविंद से श्रीराम कथा
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* महाशिवरात्रि निमित्त श्री जलाराम सत्संग मंडल का आयोजन
अमरावती/दि.25– भाई का भाई के प्रति प्रेम-व्यवहार कैसा हो, यह भरत चरित्र से सीखने को मिलता है. भरत जी का अपने बडे भाई श्रीराम जी के प्रति असीम प्रेम था. भरत जी प्रेम की मूर्ति थे. वर्तमान में भाई का भाई से प्रति बढ रहा वैर भाव मिटाने के लिए भरत चरित्र एक आदर्श है, हमें भी भरत जी के आदर्शों पर चलकर रिश्ते की डोर एवं संस्कारों की नींव मजबूत करने का हितोपदेश प्रयागराज निवासी प. पू. आनंद महाराज (मानसप्रेमी) ने दिया.
स्थानीय बडनेरा मार्ग पर स्थित भक्तिधाम में श्री जलाराम सत्संग मंडल द्वारा महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम चरित मानस कथा का आयोजन किया गया है. कथा के सप्तम दिवस प्रयागराज (श्रृंगवेरपुर धाम) निवासी प. पू. आनंद महाराज (मानसप्रेमी) ने कहा कि, माता कैकेई ने दशरथ जी से वरदान में अपने पुत्र भरत के लिए राज्य मांगा था, लेकिन भरत जी का अपने भाई श्रीराम जी के प्रति अनन्य प्रेम होने से उन्होंने राज्य का त्याग कर दिया. बड़े भाई के लिए छोटे भाई का यह प्रेम भरत जी के आदर्श चरित्र एवं संस्कारों को दर्शाता है. वर्तमान में जहां भाई ही भाई का दुश्मन बन रहा है. भाई का भाई के प्रति वैर भाव मिटाने के लिए भरत जी के चरित्र से हमें शिक्षा लेने की आवश्यकता है. भरत जी के आदर्शों पर चलकर हम अपने रिश्तों की डोर के साथ संस्कारों की नींव भी मजबूत कर सकते हैं. इस दौरान महाराज जी ने भरत चरित्र के साथ प्रभु श्रीराम की की चित्रकूट की लीलाओं का वर्णन किया. सूर्पनखा की नाक काटने के साथ खर-दूषण के वध का प्रसंग भी सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया. इस दौरान ‘मिल जाओ राम तरस रहीं अंखियां, अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे’ जैसे भजन गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. भक्तिधाम में चल रही श्रीराम कथा के दौरान बुधवार 26 फरवरी को रावण वध, श्रीराम राज्याभिषेक के प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा. हर दिन कथा दोपहर 3.30 बजे से रात 7.30 बजे तक प्रस्तुत हो रही है. बुधवार, 26 फरवरी को सुबह 9.30 से दोपहर 12.30 बजे तक कथा का आयोजन कर दोपहर 12.30 बजे से महाप्रसाद के साथ कथा का समापन होगा. ज्यादा से ज्यादा संख्या में इस कथा में उपस्थिति दर्ज कर कथा का लाभ लेने का आवाहन श्री जलाराम सत्संग मंडल ने भक्तों से किया है.