इमारत का खर्च 69 करोड पर कम, लागत बढी, मान्यता अडी
प्रस्ताव अटका मंत्रालय में, सुसज्जित बिल्डिंग का सपना अधूरा

अमरावती/दि.2– जिला परिषद की नई प्रशासकीय इमारत के लिए तत्कालिन सत्ताधारी दल न महाविकास आघाडी की सरकार रहते समय आवश्यक प्रयास करते हुए, करीब 58 करोड रुपयों का प्रस्ताव सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया था. इसे मंजूरी भी मिल गई थी. परंतु इसके बाद इस काम के लिए निधि टोकन भी नहीं मिलने के चलते विभाग की नई इमारत का सपना अधूरा रह गया. इसी बीच विगत 3 फरवरी 2023 को नई इमारत के लिए 69 करोड 85 लाख रुपए का संशोधित प्रस्ताव सरकार के पास पेश किया गया. परंतु यह प्रस्ताव भी मान्यता के लिए मंत्रालय में अटका हुआ है.
बता दें कि फिलहाल जिला परिषद का मुख्यालय रहने वाली ब्रिटिशकालीन इमारत का निर्माण वर्ष 1915 में हुआ था और अब यह इमारत प्रशासकीय कामकाज की दृष्टि से अपर्याप्त साबित होने लगी है. इस इमारत में जिला परिषद के 14 अलग-अलग विभागों के मुख्यालय है. ऐसे में जिला परिषद के गल्स हाईस्कूल परिसर स्थित जगह पर 4 मंजिला नई प्रशासकीय इमारत के निर्माण का नियोजन किया गया है. जिसके लिए 22 जुलाई 2021 को सरकार के पास प्रारुप व प्रस्ताव पेश किया गया था. साथ ही तत्कालीन पालकमंत्री के जरिए जिप के पदाधिकारियों ने आवश्यक प्रयास करते हुए तत्कालीन महाविकास आघाडी की सरकार से नई इमारत के लिए 58 करोड रुपए की मान्यता भी हासिल की थी. जिसके अनुसार नई प्रशासकी इमारत का काम जल्द शुरु होने की उम्मीद थी. परंतु सरकार व्दारा निधि का टोकन भी उपलब्ध नहीं कराया गया. जिसके परिणामस्वरुप काम उपलब्ध नहीं हो सका. इसी दौरान राज्य में सत्ता परिवर्तन हो गया और महाविकास आघाडी के स्थान पर शिंदे-फडणवीस सरकार अस्तित्व में आई. जिसके चलते नई इमारत के लिए एक बार फिर संशोधित प्रस्ताव पेश किया गया है, जिसे मान्यता मिलने की प्रतिक्षा की जा रही है.
* प्रस्ताव अटका है मंत्रालय में
जिला परिषद की नई प्रशासकीय इमारत का संशोधित प्रस्ताव विगत फरवरी माह में सरकार के पास पेश किया गया है. सूत्रों के मुताबिक जिले के मौजूदा मंत्री तथा राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास कुछ माह पूर्व ही इस प्रस्ताव को लेकर संक्षिप्त टिप्पणी पहुंचाई गई है. लेकिन तब से लेकर अब तक यह मामला पूरी तरह से अधर में अटका हुआ है.
* जनप्रतिनिधियों की अनदेखी
ग्रामविकास का केंद्र बिंदू रहनेवाली जिला परिषद की नई प्रशासकीय इमारत का प्रस्ताव सरकार के पास नए सिरे से प्रस्तुत किया गया. परंतु यह प्रस्ताव सरकार के समक्ष मंत्रालय में अटका रहने के बावजूद जिले के विकास की दृष्टि से ग्रामीण जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले जनप्रतिनिधियों व्दारा भी इसकी ओर अनदेखी की जा रही है.