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सिडको ने फूंक दिए 40 करोड़

डेढ़ दशक से हिल स्टेशन में विकास ठप

* स्कॉयवाक का मसला उच्च कमेटी के पास प्रलंबित
* चिखलदरा में केवल प्लानिंग ही प्लानिंग
चिखलदरा/दि.24- विदर्भ का नंदनवन स्कॉयवाक प्रकल्प के कारण देशभर में चर्चित जरुर हुआ है, मगर हकीकत बहुत अलग है. यहां सिडको को विकास की जिम्मेदारी देने के बाद खर्च तो करोड़ों का होने का दावा किया जा रहा, मगर देखा जाये तो कोई डेवलपमेंट नजर नहीं आता. उसी प्रकार कोई नागरिक अथवा सरकारी विभाग भी किसी प्रस्ताव को साकार करने की सोचना है तो उसमें सिडको की एनओसी जरुरी बताकर अड़ंगा लगाया जाता है. मजे की बात है कि सिडको ने शासन से फंड नहीं मिलने पर भी गत अनेक वर्षों में चिखलदरा की तरक्की पर 40 करोड़ रुपए खर्च करने का दावा किया है. उसमें अनेक पॉईंट के विकास के दावे हैं. सच्चाई यहीं है कि सिर्फ लफ्फाजी हुई है. स्कॉयवॉक के केवल दो पिलर नजर आ रहे. बाकी काम ठप पड़ा है. एक नई जानकारी यह दी जा रही कि स्कॉयवाक को लेकर वनविभाग की आवश्यक अनुमति दे दी गई है. अब मामला एमबीडब्ल्युएल कमेटी के सामने प्रलंबित है. जिसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री हैं.
विदर्भ के अच्छे, सुखद हिल स्टेशन के रुप में चिखलदरा प्रसिद्ध है. यहां पर्यटक भी बड़ी संख्या में आते हैं. यहीं सोचकर पर्यटकों के लिए सुख सुविधा बढ़ाने तथा चिखलदरा की सुंदरता को कायम रखते हुए उसकी शोभा गरिमा बढ़ाने सिडको को दो चरणों में प्लानिंग और डेवलपमेंट के तहत जिम्मेदारी दी गई थी. यहां सिडको का कार्यालय आरंभ हुआ. आज भी एक दर्जन अधिकारी-कर्मी वहां कार्यरत हैं. गत 15 वर्षों से काम शुरु रहने का दावा किया जाता है. जबकि सच्चाई यह है कि यहां के अधिकारियों को कोई निर्णय लेने अथवा किसी प्रकल्प को मंजूरी देने का अधिकार ही नहीं है. वह काम मुंबई स्थित कार्यालय से होता है. इस वजह से भी कई विकास प्रकल्प अटके पड़े होने का दावा लोग करते हैं.
* दर्शनीय स्थलों का विकास
सिडको की तरफ से बताया गया कि पिछले कुछ वर्षों में इस एजंसी ने सरकार की मदद के बगैर यहां विकास कामों पर तकरीबन 40 करोड़ रुपए खर्च कर दिये. जिसमें सात दर्शनीय स्थलों की डेवलपमेंट पर 3 करोड़ 35 लाख रुपए का खर्च शामिल है. सिडको ने बताया कि पासपेन्ट पॉईंट पर 17 लाख रुपए, रानी पार्क पर 27 लाख रुपए, गोराघाट पॉईंट पर 51 लाख रुपए, बेलेंसिंग पॉईंट पर 58 लाख रुपए, देवी पॉईंट पर 38 लाख रुपए, मालवीय पॉईंट पर 18 लाख रुपए, क्षिरसागर पर 1 करोड़ 23 लाख रुपए का खर्च बताया गया है. यह भी कहा गया कि पर्यटकोें की सुविधा के लिए यहां खर्च किये गए. कुछ पॉर्ईंट चिखलदरा पालिका को सौंप दिए हैं. बाकी का जिम्मा सिडको के ही पास है.
* बंद पड़े हैं पाइंट
चिखलदरा भले ही लाखों करोड़ो रुपए खर्च करने का दावा कर रही है. पर्यटकों के लिए सुविधाएं करने का दावा है. मगर हकीकत कुछ और है. सच्चाई यह है कि कुछ पॉर्ईंट बंद पड़े है तो कुछ पॉइंट खंडहर बन गए है. सुरक्षा की जिम्मेदारी नहीं लेने के कारण ही यह पॉइंट बंद पड़े होने की जानकारी स्वयं अधिकृत सूत्र देते हैं. सूत्रों ने बताया कि यहां के बेंच, पाइप, ग्रेनाइट सभी चीजें चोर उड़ाकर ले गए. उसकी संबंधित विभाग ने पुलिस थाने में सादी रिपोर्ट भी नहीं की. जिससे खर्च की गई राशि का जाया होना साबित हो रहा है.
* स्कॉयवाक के दो टावर खड़े है
कांच का एशिया का सबसे लंबा स्कॉयवाक बनाये जाने की घोषणा जोर शोर से हुई थी. इसका काम भी उतने ही तामझाम के साथ आरंभ हुआ. इंदौर की कंपनी को ठेका दिया गया था. उसने तुरंत दो टावर खड़े कर दिये. जिसके बाद वनविभाग की मंजूरी का मसला आया. सिडको ने स्कॉयवाक के लिए भी बड़ा खर्च करने का दावा किया है. जबकि वहां मात्र दो टावर खड़े नजर आ रहे हैं. सिडको के कारण चिखलदरा के अन्य प्रोजेक्ट भी लटके हैं. किसी भी विकास काम के लिए सिडको की अनापत्ति आवश्यक है. जबकि इसका कार्यालय मुंबई में है, जहां भेजा गया प्रस्ताव महीनों वापस नहीं आता.

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