तीन सहायक आयुक्तों पर शहर की जिम्मेदारी
चार पद अब भी रिक्त ; एक एसीपी सेवानिवृत्ति की कगार पर

अमरावती/दि.17- पुलिस आयुक्तालय की बढ़ती जिम्मेदारी को देखते हुए फिलहाल के मनुष्य बल पर तनाव बढ़ा है. शहर में सात सहायक पुलिस आयुक्तों की आवश्यकता रहने के बावजूद सिर्फ तीन को ही नियुक्त किए जाने के साथ ही इसी दर्जे के अधिकारियों के चार पद रिक्त है.
उपलब्ध मनुष्यबल के आधार पर अपराधों पर नियंत्रण रखा जा रहा है. सिर्फ दो ही सहायक पुलिस आयुक्तों पर संपूर्ण आयुक्तालय की जिम्मेदारी है. चार एसीपी के पद रिक्त होने के साथ ही उपस्थितों में तीन में से एक सहायक पुलिस आयुक्त सेवानिवृत्त होने वाले हैं. आयुक्तालय की हद में नाकाबंदी, ऑल आऊट व कोम्बिंग ऑपरेशन चलाया जाता है. गिरफ्तारी वॉरंट के लोगों को ताबे में लेने के लिए विशेष अभियान चलाया जाता है. बावजूद इसके शस्त्र अधिनियम अंतर्गत कार्रवाई की जाती है. अवैध जुआं और दारु बिक्री करने वालों के खिलाफ परिणामकारक कार्रवाई किये जाने के कारण शहर में शांति का वातावरण होने का दावा पुलिस आयुक्त डॉ. आरती सिंह ने किया. जनवरी से जून 2021 इन 6 महीने की कालावधि में राज्य में मर्डर की घटना में 15..33 प्रतिशत बढ़ोत्तरी होने के साथ ही इसमें अमरावती शहर का समावेश नहीं है. प्राणघातक हमले का प्रतिशत भी गत वर्ष की तुलना में 15.5 प्रतिशत से बढ़ा है.
पुणे, मुंबई, पिंपरी चिंचवड इन आयुक्तालयों का इनमें समावेश होकर प्रथम पांच घटक में अमरावती का समावेश नहीं है. इतना ही नहीं तो 4.52 प्रतिशत दंगे का प्रमाण बढ़ा है. मारपीट के अपराध 12.16 प्रतिशत से बढ़ने के साथ ही इसमें मुंबई, ठाणे, औरंगाबाद आयुक्तालय का समावेश है. मालमत्ता के अपराध 10.29 प्रतिशत से बढ़कर इनमें नागपुर, मुंबई, ठाणे व पुणे आयुक्तालय का समावेश है. डाके घटना भी 35.41 प्रतिशत बढ़कर इसमें मुख्य रुप से पिंपरी चिंचवड इन घटकों का समावेश दिखाई दे रहा है. 24.82 प्रतिशत से चोरी की घटना बढ़ने के साथ ही इसमें अमरावती आयुक्तालय का समावेश नहीं है.
* 3 हजार से अधिक प्रतिबंधात्मक कार्रवाई
शहर में अगस्त तक करीबन 3 हजार 387 सक्रिय अपराधियों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई. ऐसे लोगों के पूर्व इतिहास की जांच कर अपराधों को रोकने का काम शुरु है.
* ठाणे विभाजन का प्रस्ताव वरिष्ठों को भेजा
शहर की बढ़ती लोकसंख्या को ध्यान में रखते हुए राजापेठ और गाडगेनगर इन दो पुलिस थानों के विभाजन का प्रस्ताव गत कुछ वर्षों से वरिष्ठ स्तर पर भेजा गया, जिसे अब तक मंजूरी नहीं मिली है.