अमरावतीमहाराष्ट्र

वजन घटाने के लिए ज्वार का सेवन फायदेमंद

पचनक्रिया के लिए भी ज्वार बेहतरीन

* मांग बढते ही दाम भी बढे
अमरावती/दि.23– प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनंदीन जीवन में अपने खानपान की ओर विशेष ध्यान देता है. परंतु इन दिनों बेहद व्यस्त जिवनशैली हो जाने के चलते लोगबाग अपने दैनंदीन आहार व भोजन में रहनेवाले घटकों की ओर विशेष ध्यान नहीं दे पाते जिसकी वजह से कई लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पडता है और कई लोगों का स्वास्थ्य बिगड भी रहा है. ऐसे समय बढते वजन को नियंत्रण में रखने के साथ ही पाचनक्रिया को चूस्त-दुरुस्त रखने के साथ ही ज्वार की रोटी का सेवन करना ज्यादा फायदेमंद साबित होता है. जिसके चलते डॉक्टर भी अक्सर ज्वार की रोटी खाने की ही सलाह देते है.
बता दें कि, कई लोगों को तले व भुने मसालेदार व्यंजन खाने की आदत होती है. जिसकी वजह से शरीर में चरबी बढती है. साथ ही पचनक्रिया में भी कई तरह की दिक्कते होती है. ऐसे समय हलका भोजन करने की सलाह दी जाती है. जिसमें प्रमुख तौर पर ज्वार की रोटी का चयन किया जाता है, जो काफी पौष्टिक होती है. क्योंकि ज्वार में काफी गुणधर्म भी होते है. यहीं वजह है कि, किसानों व खेतीहर मजदूरों सहित ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश नागरिक गेहूं की रोटी की बजाय ज्वारी की रोटी यानि भाकरी को ज्यादा पसंद करते है. यहीं वजह है कि, शहरी नागरिकों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्र के नागरिक कही अधिक निरोगी व सुदृढ होते है. क्योंकि शहरी क्षेत्र में गेहूं के आटे सेबनी रोटी, पराटा, चपाती, तंदुरी रोटी तथा बटर व मैदे से बनने वाले बे्रेड, नान व केक जैसे पदार्थों का जमकर प्रयोग किया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक साबित होते है और इन खाद्य पदार्थों की वजह से शरीर में कई तरह की समस्याएं भी पैदा होती है.

* अब ज्वार की रोटी खाने पर झलकती है रईसी
उल्लेखनीय है कि, किसी जमाने में गेहूं की रोटी को रईसों का तथा ज्वार की भाकरी को गरीबों व मेहनतकशों का भोजन माना जाता था. लेकिन अब ज्वार के दिन बदल गये है तथा गेहूं की बजाय ज्वार कही अधिक महंगी है तथा लोगबाग भी अब अपने स्वास्थ्य के लिए ज्वार की भाकरी खाना पसंद करते है. ऐसे में अब ज्वार का सेवन करना रईसी की निशानी हो चला है.

* होटलों में भी ‘भाकरी’ की डिमांड
इन दिनों लोगबाग होटल, ढाबे व भोजनालय में भी भोजन हेतु जाने पर रोटी की बजाय ज्वार से बनी भाकरी की मांग करते है. जिसके चलते इन दिनों ज्वार की भाकरी को लेकर अच्छी खासी मांग चल रही है.

* ज्वार में फाइबर का प्रमाण अधिक
ज्वार में फायइबर काफी अधिक प्रमाण में होता है. इसके साथ ही प्रोटीन, शर्करा व खनिज द्रव्य सहित पौष्टिक पदार्थ ही ज्वार में होते है और ज्वार के सेवन से कोलेस्ट्राल का स्तर भी कम होता है.

* स्ट्रोक व डायबिटीज का खतरा कम
स्वास्थ्य की दृष्टि से भी ज्वार का सेवन काफी फायदेमंद होता है तथा स्ट्रोक व डायबिटीज जैसी बीमारियों का खतरा भी इसकी वजह से कम होने में सहायता मिलती है. साथ ही अन्य बीमारियां भी ज्वार की वजह से कम होती है.

* पाचनशक्ति में सुधार, वजन में कमी
ज्वार का सेवन करना पाचनक्रिया में सुधार हेतु काफी उपयुक्त है. इसके साथ ही बढे हुए वजन को कम करने में भी ज्वार काफी लाभदायक साबित हेाती है. जिसके चलते ज्वार की भाकरी खाने की सलाह दी जाती है.

* जिले में ज्वार का बुआई क्षेत्र बढा
खरीफ सीजन के दौरान ज्वार की बुआई की जाती है. गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष ज्वार की बुआई का प्रमाण बढा है. इसके साथ ही रबी सीजन के दौरान भी किसानों द्वारा बडे पैमाने पर ग्रिष्मकालीन ज्वार की बुआई करते विशेष उल्लेखनीय है कि, खरीफ में निकलने वाली ज्वार की तुलना में रबी की ज्वार को काफी अधिक मांग होती है. ज्वार से इंसानों की भोजन संबंधित जरुरत पूरी होने के साथ ही जानवरों के लिए भी कडबा कुटा व चारे की व्यवस्था होती है.

* क्या हैं दाम? (रु. प्रति क्विंटल)
गेहूं                 3,800
बाजरी              4,000
ज्वारी              6,000

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