आम लोगों की जेबों पर डाका टाल रहे साइबर अपराधी
सालभर में पौने 8 करोड रुपयों का लगाया चूना

* प्रलोभन, डर व झांसा देकर लूट की 71 शिकायतें मिली
अमरावती/दि.26– इंटरनेट की वजह से जहां एक ओर जीवन काफी सुविधापूर्ण हो गया है. वहीं दूसरी ओर इसे लेकर कुछ दिक्कतें, विशेषकर ऑनलाइन जालसाजी के मामले भी बढे है. साइबर अपराधियों द्वारा कई तरह की युक्तियों पर अमल करते हुए सीधे आम लोगों की जेबों पर डाका डाला जा रहा है. विगत एक वर्ष के दौरान ही साइबर अपराधियों ने अमरावतीवासियों की जेब से करीब पौने 8 करोड निकाल लिये. जिसमें सर्वाधिक पौने 6 करोड रुपए का ऑनलाइन डाका तो शेयर मार्केटर के नाम पर डाला गया. इसके साथ ही डिजीटल अरेस्ट का भय दिखाते हुए जालसाजी करने के कई मामले सामने आये. जारी वर्ष में जनवरी माह से लेकर अब तक पूरे जिलेभर में साइबर ठगबाजी की कुल 71 शिकायतें प्राप्त हुई. यह संख्या विगत एक वर्ष के दौरान सबसे अधिक रही.
उल्लेखनीय है कि, इन दिनों साइबर अपराधों का आलेख लगातार बढता ही जा रहा है और विगत जनवरी से जारी दिसंबर माह के दौरान 71 मामलों मेें साइबर अपराधियों ने अमरावतीवासियों से करीब पौने 8 करोड रुपए लूट लिये है. अमरावती शहर पुलिस आयुक्तालय के साइबर विभाग ने रोजाना ही अलग-अलग मामलों को लेकर करीब 4 से 5 शिकायतें प्राप्त होती है. विगत एक वर्ष के दौरान साइबर अपराधियों द्वारा उडाई गई रकम में से 1 करोड 89 लाख 51 हजार 194 रुपए को सीज करने के साथ ही 75 लाख रुपए वापिस हासिल करने में शहर साइबर सेल को सफलता भी मिली.
* थोडा रुकों, तुरंत जवाब मत दो
इस संदर्भ में शहर साइबर सेल के एपीआई अनिकेत कासार ने बताया कि, यदि आपको किसी अनजान नंबर से कॉल या वीडियो कॉल आती है, तो पहले थोडा रुकना चाहिए और विचार करना चाहिए कि कही खुद से कोई गलती तो नहीं हो रही. साथ ही सामने वाले द्वारा पूछे गये सवालों से संभ्रम का शिकार होने की बजाय संभलकर जवाब दे और यदि कोई आपको ब्लैकमेल करता है, तो उसकी तुरंत ही साइबर सेल में शिकायत भी करे. क्योंकि एक बार पैसे चले जाने के बाद रकम को वापिस हासिल करना पुलिस के लिए भी काफी मुश्किल काम होता है.
* साइबर सेल में पूर्णकालीक पुलिस निरीक्षक ही नहीं
उल्लेखनीय है कि, अमरावती शहर पुलिस आयुक्तालय की साइबर सेल में पूर्णकालीक पुलिस निरीक्षक नहीं है. साथ ही पुलिस कर्मचारियों का भी अभाव है. ऐसे में गिने-चुने पुलिस कर्मचारियों पर ही सभी कामों की जिम्मेदारी रहने के चलते साइबर अपराधों की जांच में थोडा विलंब होता है.
* डिजीटल अरेस्ट यानि क्या?
डिजीटल अरेस्ट यानि डिजीटल स्वरुप में गिरफ्तारी. इसमें कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, ईडी व सीबीआई का अधिकारी बताते हुए मैसेज भेजने के साथ ही वीडियो कॉल करता है तथा सामने वाले व्यक्ति को ड्रग्ज तस्करी या मनी लॉन्ड्रिंग की बात करते हुए सामने वाले व्यक्ति को काफी समय तक वॉट्सएप या स्काइप कॉल पर रहने हेतु कहता है. अमरावती शहर में इसी तरह से दो लोगों के 24 लाख 99 हजार रुपए साइबर ठगबाजों ने लूट लिये.
* किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना आधार कार्ड, पैन कार्ड व बैंक संबंधित जानकारी तुरंत न दें. सोशल मीडिया अथवा मोबाइल पर आयी किसी भी लिंक को पडताल किये बिना स्वीकार न करे. साथ ही अपने साथ आर्थिक जालसाजी होने की बात ध्यान में आने पर तुरंत ही साइबर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराये अथवा 1930 हेल्प लाइन नंबर पर कॉल करें.
– कल्पना बारवकर,
पुलिस उपायुक्त, अमरावती शहर.
* जनवरी से दिसंबर के दौरान दर्ज साइबर मामले
मामले संख्या लूटी गई रकम
स्टॉक मार्केट जालसाजी 23 5,73,13,496
ऑनलाइन जॉब जालसाजी 01 10,38,744
इंटरनेट जालसाजी 01 2,29,340
ऑनलाइन टास्क जालसाजी 13 70,00,195
केवायसी जालसाजी 01 7,50,000
डिजीटल अरेस्ट व कुरीयर जालसाजी 05 16,87,194
विवाह संबंधित जालसाजी 01 28,65,193
मोबाइल रिचार्ज जालसाजी 02 2,96,716
कुल 71 7,73,59,785
* वर्ष निहाय साइबर अपराध
वर्ष मामले
2019 22
2020 68
2021 50
2022 42
2023 52
2024 61