
परतवाडा/दि.19– साहसी पर्यटन के लिए तेजी से प्रसिद्ध हुआ मध्य प्रदेश का धारखोरा प्रपात हाल ही में जानलेवा सिद्ध हुआ है. गत 15 अगस्त की घटना से इस पर मुहर लगी है. अचलपुर तहसील के नर्सरी गांव का विनय बोरेकर यह युवक पत्थर गिरने से मारा गया. इससे पहले विगत 23 जुलाई 2020 को अमरावती के तीन युवक धारखोरा प्रपात में डूब गए थे. तीनो ही अपने-अपने परिवार के इकलौते थे. ऐसी समाज को हिलाकर रख देने वाली दुर्घटनाएं बार-बार होती है.
* परतवाडा से 14 किमी दूर
मध्य प्रदेश के क्षेत्र में भैसदेही थाना अंतर्गत धारखोरा प्रपात है. यह पर्यटन स्थल के रुप में उभर रहा है. अधिकृत स्थल के रुप में भले ही दर्ज नहीं है, किंतु काफी संख्या में पर्यटक वहां जाते हैं. यहां से धारणी मार्ग पर 14 किमी के फासले पर बुरडघाट गांव से 7 किमी दूर यह प्रपात है. सुरक्षा के वहां कोई उपाय नहीं है. परतवाडा-अचलपुर में माना जाता है कि बिच्छन नदी का उदगम धारखोरा से होता है. बिच्छन नदी महाराष्ट्र सीमा पर गिरती है तो, धारखोरा प्रपात में रुपांतरित होती है. लगभग 300 फीट उंचाई से पानी गिरता है. झरने के आसपास अर्धगोलाकार उंची चट्टानें है. चट्टनों के बीच खाई है. जंगल से नदी के पास जानेवाले धारखोरा के मार्ग पर दोनों ओर पर्वत है और संकरी खाई बनती है. आगे यह मार्ग नदी में मिल जाता है जो अधिकांश लोगों के लिए खतरनाक हो जाता है.
* और कितनी जानें लेगा हाथी डोह
श्री क्षेत्र सालबर्डी में दर्शन हेतु आए 21 वर्षीय युवक की हाथी डोह में डूबने से मृत्यु हो गई. एक माह के अंदर यह तीसरी जान गई है. सौरभ भीमराव चौधरी अपने मित्रों के साथ सालबर्डी आया था. वह नदी पात्र में उतरा और लापता हो गया. उसका शव गाद में फंसा नजर आया. जिसे बाहर निकाल वरुड के शासकीय अस्पताल में लाया गया. लोगों का कहना है कि मध्य प्रदेश से बहकर आनेवाली माडू नदी पात्र में सालबर्डी का हाथी डोह है. उपर से पानी आराम से बहता नजर आता है. किंतु अब तक डोह में डूबकर सैकडों की जान गई है. 15 दिन पहले पिंपलखुटा के कार्तिक भुजाडे (17) और लक्ष्मी नागले (35) इन दोनों की मृत्यु हो गई. यहां सुरक्षा रेलिंग नहीं है. खतरे के बोर्ड भी नहीं लगाए गए हैं. देशभर के लोग निसर्गरम्य सालबर्डी आते हैं. फिर भी मध्य प्रदेश प्रशासन कोई व्यवस्था नहीं कर रहा. लोगों का आरोप है कि प्रशासन की अनदेखी के कारण यह क्षेत्र कितनी जानें लेगा, कोई नहीं बता सकता.