अमरावती

प्रशासकीय अड़ंगे से त्रस्त नागरिको की मांग

निजी वाहनों को भी बगैर ई पास अनुमति दे

परतवाड़ा/अचलपुर/दि. २१ – प्रजातंत्र में सभी को एक समान अधिकार मिले है लेकिन महाराष्ट्र सरकार जो कर रही उससे मध्यम व उच्च श्रेणी के नागरिक सहमत नहीं हो रहे. कल से एसटी का सफर शुरू हो चुका है. एसटी से घूमने के लिए किसी भी स्वस्थ अथवा बीमार को ‘ ई पास ‘ निकालने की आवश्यकता नही होंगी. आप अब बिनधास्त राज्य परिवहन की बस से शान की सवारी कर पाएंगे. ऊपर से निर्देश है कि एसटी बस को पूर्णतः निरजंतुकरण के साथ दौड़ाया जाएंगा. 55 यात्रियों की जगह मात्र 22 ही को ही आसन दिए जाएंगे और सोशल डिस्टनसिंग , मास्क आदि अनिवार्य होंगा। अचलपुर , धारणी , चिखलदरा , चांदूर बाजार , अंजनगाव के लोग राज्य सरकार के इस निर्णय को बड़े ही विस्मयकारी ढंग से देख रहे है.
ऐसा लग रहा है कि राज्य सरकार के लिए एसटी सगी माँ की संतान है और अन्य निजी बस और चौपहिया वाहन किसी सौतेली से जन्मे है. तभी तो सिर्फ. एसटी को यात्री परिवहन की सुविधा दी गई. कल को प्रदेश सरकार मनोरंजन कर वसूली के लिए सिनेमा थियेटर खोल सकती. उस वक्त यह भी कहा जायेगा कि आप सिर्फ थियेटर में ही फ़िल्म देख सकेंगे , अन्य जगह पर देखने के लिए अनुमति लेनी होंगी .

राज्य सरकार के इस निर्णय की घोर आलोचना हो रही है. यहां गौरतलब है कि परतवाड़ा और अंजनगाव से बड़ी संख्या में मध्यप्रदेश के लिए बसों का संचालन किया जाता है. पिछले 70 सालों में राज्य सरकार की हिम्मत नही हुई कि वो परतवाड़ा से बैतूल , भैसदेही , इटारसी , छिंदवाड़ा , आठनेर , मुलताई , बुरहानपुर , इंदौर , खंडवा आदि जगह के लिए नियमित एसटी सेवा प्रारम्भ करे. अब प्रदेश के आला मंत्रियो ने एसटी शुरू कर दी और सिर्फ मध्यप्रदेश और अमरावती के लिए चलाई जाती निजी बस जस की तस खड़ी है. पिछले छह महीनों से निजी बस के माध्यम से अपना उदरनिर्वाह करते असंख्य लोग बेरोजगार पड़े है. इसी प्रकार जिन लोगो के पास अपने स्वयं के वाहन है , बडा परिवार है वो एसटी से क्यो जाएंगे भला ?? सरकार ने यह निर्णय लेकर अन्य सभी बस ऑपरेटरों पर कुठाराघात किया है.
आज शुक्रवार को दोपहर बारह बजे स्थानीय बैतूल स्टॉप पर एक एसटी ड्राइवर और निजी बस चालक आपस मे उलझ पड़े.  एसटी बस चालक का कहना था कि हम ‘ प्रवासांच्या सेवे साठी ‘ है. इस पर चिढ़कर निजी बस चालक ने कहा कि हम तो पैसेंजर की दुर्दशा के लिए है. अगर एसटी निगम में इतना ही दम है तो रोजाना एमपी की बसे चलाकर दिखाये.
एक अंदाज के मुताबिक परतवाड़ा होकर रोजाना एक सौ के करीब बस टाइमिंग एमपी के लिए संचालित होते है. एसटी की तुलना में निजी बस संचालक सिर्फ 40 रुपये में अमरावती भी छोड़ आते. एसटी बस की तुलना में निजी बसों की कंडीशन , रखरखाव भी काफी ज्यादा अच्छा होता …फिर भी राज्य सरकार को निजी बस और वाहनों से एलर्जी दिखाई पड़ती है. सिर्फ एसटी बस में बैठने से ही कोरोना नही होंगा यदि सरकार ऐसा मानती है तो शासन यह भी लगे हाथों घोषित कर दे कि यदि किसी पैसेंजर को एसटी सफर में कोरोना हो जाता तो उसके परिवार को योग्य मुआवजा भी दिया जायेगा.
बहरहाल राज्य सरकार के इस निर्णय की बेरोजगार बस कर्मचारियो , कमीशन एजेंट , वाहक , चालक , हेल्पर , हमाल आदि सभी के द्वारा तीखी आलोचना की जा रही है. शासन तत्काल आ0ने निर्णय पर पुनर्विचार कर अनु बसों और वाहनों को भी बगैर ई पास के अनुमति देने की मांग की जा रही है.

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