
शेंदुरजनाघाट/दि. 4– स्वास्थ्यवर्धक हल्दी उत्पादन के लिए शेंदुरजनाघाट प्रसिध्द है. यहां कई पीढियों से किसान हल्दी का उत्पादन ले रहे हैं. वर्तमान में हल्दी की बुआई कम हुई है. लेकिन फिर भी हल्दी की फसल को नगद फसल के रूप में देखा जाता है. उत्पादन कम होने पर भी हल्दी का दर्जा आज भी कायम रहने से यहां की हल्दी की मांग बढी है. यहां की हल्दी का पावडर व खडी हल्दी 250 से 300 रूपए प्रति किलो बेची जा रही है.
हल्दी उत्पादक किसानों द्बारा हल्दी की फसल निकालने के बाद गर्म पानी में उबाला जाता है और सुखाकर उसकी बिक्री की जाती है. गांव में कई पीढियों से हल्दी का उत्पादन लिया जाता था. लेकिन जगह के अभाव व बाजार उपलब्ध न होने व हल्दी को तैयार करने का खर्च बढने से हल्दी की बुआई का क्षेत्र कम हुआ है. हल्दी उत्पादक किसान ग्रीष्मकाल में खेती की मशागत कर मृग नक्षत्र की राह देखते है. जैसे ही मानसून शुरू हो जाता है तो किसान हल्दी की बुआई कर देते हैं. हल्दी के साथ एरंडी, मिर्ची, भिंडी, टमाटर की भी फसल लेते है.
पिछले कुछ सालों पूर्व हल्दी उत्पादक किसानों ने विक्री के लिए हल्दी तैयार की थी. किंतु अपेक्षित संख्या में बाहर गांव से व्यापारी खरीदी के लिए न आने से हल्दी को कौढियों के दाम बेचना पडा. लेकिन फिर भी हल्दी का उत्पादन शुरू ही है. इस साल हल्दी को अच्छे दाम मिलेंगे. इस आशा पर हल्दी उत्पादक किसान है.