‘स्वीप’ का सर्वाधिक खर्च अमरावती में होने के बावजूद मतदान का प्रतिशत रहा कम
अधिकारियों ने बताए अलग-अलग कारण

* ग्रामीण क्षेत्र में शानदार प्रतिसाद
* स्थलांतरीत नागरिकों सहित मृत मतदाताओं के नाम सूची में
अमरावती/दि. 22– मतदान का प्रतिशत बढाने के लिए इस बार भी जिले में स्वीप अभियान चलाया गया. इस अभियान के सर्वाधिक कार्यक्रम जिला मुख्यालय में लिए जाने से सर्वाधिक खर्च भी अमरावती में ही करना पडा. लेकिन ऐसा होने के बावजूद सबसे कम मतदान अमरावती और शहर का अधिकांश हिस्सा आनेवाले बडनेरा निर्वाचन क्षेत्र में हुआ. इस कारण स्वीप के कामकाज बाबत संदेह उपस्थित किया जा रहा है.
एक अनुमान के मुताबिक स्वीप के संपूर्ण जिले में उपक्रम के लिए 40 से 50 लाख रुपए खर्च किए गए. इस कारण यह खर्च उपयोगी साबित हुआ क्या, ऐसा सवाल अधिकारी और कर्मचारियों के सामने इस निमित्त निर्माण होता है. मतदान की आंकडेवारी के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्र के मतदान में काफी बढोतरी हुई. लेकिन शहरी इलाकों में स्थित अमरावती में हमेशा की तरह कम मतदान हुआ. यही स्थिति पिछले लोकसभा चुनाव के समय भी सामने आई थी. लेकिन इस चुनाव के बाद करीबन 6 माह बाद हो रहे विधानसभा चुनाव के लिए उस समय की खामी दूर होगी, ऐसा अनुमान था. लेकिन यह अनुमान विफल साबित हुआ है. स्वीप के माध्यम से शासकीय व अर्ध शासकीय कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारियों की मानव श्रृंखला, साईकिल रैली, मोटर साईकिल रैली, पथनाट्य, शहर की सामाजिक संस्था के सहभाग के लिए सभा, बैठक, पोस्टर-बैनर, होर्डींग आदि विविध उपक्रम चलाए गए. इन सभी उपक्रमों का केंद्रबिंदू अमरावती था. लेकिन यही मतदान का प्रतिशत कम हुआ. यह बात मतदान के लिए जनजागृति करनेवाली यंत्रणा को ठेच पहुंचानेवाली है. आम नागरिक इसका अलग-अलग अर्थ निकाल रहे है. कुछ लोगों के मुताबिक यह प्रशासन की ही विफलता है.
* अधिकारियों की भागदौड का क्या?
स्वीप अभियान के अमल के लिए जिला परिषद की विविध यंत्रणा के अधिकारी और कर्मचारियों को कुछ दिनों के लिए प्रतिनियुक्त किया था. इस कारण इस अवधि में वे अपनी मूल जिम्मेदारी से दूर थे. इसके अलावा शहर व जिले के कुछ महाविद्यालय के प्राध्यापक और पथनाट्य तथा गीत गायन, शायरी के लिए विद्यार्थियों का भी सहयोग लिया गया. इन सभी यंत्रणा पर प्रशासन ने काफी खर्च किया. लेकिन इसका प्रत्यक्ष नतीजा समाधानकारक नहीं रहा, यह सच्चाई है.
* मतदान प्रतिशत कम होने का कारण
अमरावती शहर के अनेक युवक रोजगार और नौकरी निमित्त अन्य जिलो में गए है. इसके अलावा कुछ शहरी मतदाताओं के नाम अन्य स्थानों पर शामिल रहने से वे यहां मतदान नहीं करते. कुछ मतदाता स्थलांतरीत और मृत है, फिर भी उनके नाम मतदाता सूची में है. इस कारण अमरावती का मतदान कम होता है. लोकसभा के समय यह बात सामने आई थी, ऐसा यंत्रणा के एक अधिकारी का निरीक्षण है.
* जनजागरण लगातार चाहिए
मतदाताओं में जागरुकता के लिए इतने प्रयास करने के बावजूद शहरी इलाकों में मतदान का प्रतिशत नहीं बढता यह बात मुंबई सहित राज्य के अन्य शहरों में भी लागू है. इस कारण मतदान किस तरह महत्व का है, उसके फायदे क्या है आदि बाते लगातार नागरिकों को कहनी चाहिए. इसके लिए चुनाव आयोग द्वारा कायमस्वरुप कार्यक्रम तैयार करना चाहिए, ऐसा लगता है.
– संजीता मोहपात्रा, स्वीप नोड