पिंगलादेवी गड पर आज देवी प्रदक्षिणा समारोह
अंबादेवी के ‘खापरी’ की 200 वर्षों की परंपरा

* रात 12 बजे भक्तों की उमडेंगी भीड
लेहेगांव/दि.10-मिट्टी के घडे को शुद्ध करके अग्निदेवता को साक्षी मानकर पिंगलादेवी सामग्री का हवन और होमहवन से लाल तप्त हुए घडे को ‘खापरी’ कहा जाता है. इस खापरी को कंधों पर लेकर देवी को प्रदक्षिणा लगाने के इस समारोह को देखने की विदर्भवासियों को उत्सुकता लगी है. शरीर पर रौंगटे लाने वाला और भक्तों को अचरज में डालने वाला यह समारोह है. तप्त लाल खापरी ब्राह्मण पुजारी हथेली पर, और सिर पर रखकर तेजी से देवी को प्रदक्षिणा लगाता है. फिरभी उसके हाथ या सिर पर कोई जख्म नहीं होता. यह खापरी 10 अक्टूबर को सप्तमी सहित अष्टमी को रात 12 बजे उठायी जाएगी.
अंबादेवी की खापरी को 200 साल की परंपरा है. 72 वर्ष्ज्ञीय पुजारी नारायणराव मारूडकर अपने परिवार समेत नवरात्रि महोत्सव में पिंगलादेवी की पूजा अर्चना, श्रृंगार के लिए और आराधना के लिए पहुंचे है. उम्र की 14 वीं आयु से वे खापरी उठा रहे है, किंतु अब उनके पुत्र महेश मारूडकर को खापरी उठाने का सम्मान मिला है. खापरी के अंदर कपूर का दीया अग्निदेवता को साक्षी मानकर प्रज्वलित किया जाता है. सप्तशक्ति का पाठ होता है, इसके बाद सोलह प्रकार की सामग्री के हवन के साथ घी की आहुति दी जाती है.