काचबिंदू की न करें अनदेखी, हमेशा के लिए जा सकती है आंखे

अमरावती /दि.2– काचबिंदू यह दबे पांव आनेवाली आंखों की बीमारी है और अपरिवर्तनीय अंधत्व का दूसरा प्रमुख कारण है. योग्य समय पर निदान व उपचार नहीं करने पर आंखों के मज्जातंतू पर प्रभाव पडकर दुरुस्ती का अस्थायी या स्थायी नुकसान हो सकता है.
* 30 लोगों को काचबिंदू
जिला सामान्य अस्पताल में विगत तीन माह के दौरान नेत्र जांच हेतु आए मरीजों में से 30 मरीजों को काचबिंदू रहने की जानकारी सामने आई है.
* तीन माह में 2 हजार मरीजों की जांच
जिला सामान्य अस्पताल में रोजाना आंखों की जांच करने हेतु 50 मरीज आते है. जिसके अनुसार विगत तीन माह के दौरान करीब दो हजार मरीजों द्वारा जिला सामान्य अस्पताल में अपनी आंखों की जांच करवाई गई.
* आंखों की जांच कब करवाएं
नेत्र विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार साल में कम से कम दो बार अपने आंखों की जांच करना जरुरी होता है. साथ ही जिन परिवारों में अनुवांशिक रुप से आंखों की तकलीफ है, उन परिवारों के सदस्यों द्वारा नियमित रुप से अपनी आंखों की जांच करवाना बेहद आवश्यक है.
* अन्यथा हमेशा के लिए आ सकता है अंधत्व
प्रकाश उत्सर्जीत करनेवाली वस्तुओं के चारों ओर तेजोमंडल दिखना, दृष्टि नष्ट होना, आंखे लाल होकर अस्पष्ट दिखाई देना, आंखों में दर्द होना जैसे लक्षण कांचबिंदू के संकेत हो सकते है. जिनकी ओर अनदेखी करने पर हमेशा के लिए अंधत्व आने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता.
* आंखों का ध्यान कैसे रखे?
– आंखों का ध्यान रखने हेतु स्क्रीन पर ज्यादा समय काम न करें, बल्कि तनाव को टालने हेतु बिच-बिच में थोडा ब्रेक ले.
– परिवार में यदि किसी को कोई अनुवांशिक बीमारी है तो विशेष सतर्कता बरते और आंखों को लेकर किसी भी तरह की तकलीफ महसूस होने पर उसे अनदेखा करने की बजाए समय रहते डॉक्टर को दिखाएं.
– 90 फीसद मरीजों के काचबिंदू का निदान अंतिम चरण में होता है. जिसके चलते 40 वर्ष की आयु के बाद प्रति वर्ष अपनी आंखों की जांच करवाना चाहिए.
* काचबिंदू के लक्षण जल्दी ध्यान में नहीं आते. जिसके चलते उसे सायंलेट किलर भी कहा जाता है. परंतु समय रहते निदान व उपचार किए जाने पर संबंधित मरीज की दृष्टि को स्थिर रखा जा सकता है.
– डॉ. दिप्ती उमरे
नेत्रशल्य चिकित्सक, इर्विन अस्पताल.