
अमरावती-दि.11 कम पटसंख्या वाली शालाएं बंद न करने का प्रस्ताव ग्रामसभा मेें लेने की शुरुआत हो गई है. यह प्रस्ताव राज्यशासन के पास भेजा जाएगा, ऐसी जानकारी महाराष्ट्र राज्य प्राथमिक शिक्षक समिति ने दी है.
इस बाबत समिति द्वारा जारी किये गए ज्ञापन में कहा गया है कि 86 वीं घटना की दुरुस्ती कर बालकों के निःशुल्क व सख्ती की शिक्षा का कानून करते समय सभी धाराओं को जोड़कर आरटीई कानून किया गया. लेकिन अब 20 से कम पटसंख्या के नाम पर शाला बंद करने की साजिश की जा रही है. कम पटसंख्या के नाम पर शालाएं बंद हुई तो गरीब, शोषित, वंचित, किसान, खेतीहर मजदूर और कामगार परिवार के पाल्यों की शिक्षा में दुविधा होगी. शाला बंद न करने के लिए अब विविध शिक्षक संगठना आक्रमक हो रही हैं. ग्रामपंचायतों में प्रस्ताव लेकर इन प्रस्तावों की प्रति शासनस्तर पर भेजी जाएगी. शिक्षा पर काफी खर्च होने से सरकार को शालाएं चलाना मुश्किल हो गया है. ऐसा दर्शाकर अथवा कोई भी कारण बताकर शालाएं बंद करना या सरकारी शिक्षा की तरफ अनदेखी करना यानि सरकार द्वारा मूलभूत अधिकार का हनन करना है. शाला बंद होने पर बहुल क्षेत्र में रहनेवाले गरीबों के बच्चे शिक्षा से वंचित रह सकते हैं. इस कारण राज्य की कोई भी शाला बंद न हो, इसके लिए प्रामाणिक प्रयास करने के वर्तमान में आवश्यकता है. राज्य की कोई भी शाला बंद न हो, इसके लिए ग्रामपंचायत, शाला व्यवस्थापन समिति का प्रस्ताव लेने के लिए जनप्रतिनिधि, समाज के जिम्मेदार, संवेदनशील घटकों द्वारा प्रयास करने, गांव में शाला का महत्व समझाकर बताने, ग्रामपंचायत में प्रस्ताव लेकर इसकी प्रति प्रशासनिक यंत्रणा के पास भेजने का आवाहन महाराष्ट्र राज्य प्राथमिक शिक्षक समिति ने किया है.
कम पटसंख्या के नाम पर कोई भी शाला बंद न करने बाबत प्रस्ताव वाशिम जिले के खरोड तथा ब्रह्मा ग्रामपंचायत द्वारा तथा हदगांव, सायलवाड़ी, नांदेड़, नागझिरी और वर्धा जिले के मोमिनपुर सहित अन्य जिलों में लिया गया है. इस कारण राज्य के विविध गांवों की ग्रामपंचायतों व्दारा ग्रामसभा में प्रस्ताव लेकर शासन तक उस प्रस्ताव की प्रति भेजने का आवाहन प्राथमिक शिक्षक समिति ने किया है.
—