अमरावतीमहाराष्ट्र

अपेक्षित दाम न मिलने से कपास व तुअर का बुआई क्षेत्र घटेगा!

अमरावती/दि. 4– इस बार किसानों की तुअर और कपास की फसल को बाजार में अपेक्षित दाम नहीं मिला. जिसकी वजह से किसानों  को आर्थिक नुकसान सहना पड रहा है. दाम घटने से किसान परेशानी में आ गये है. जिसका परिणाम आनेवाले खरीप सीजन पर होगा जिसमें कपास तथा तुअर का बुआई क्षेत्र घटने की संभावना व्यक्त की जा रही है. इस साल खरीप के सीजन में कपास और तुअर का बुआई क्षेत्र घटेगा वही सोयाबीन का बुआई क्षेत्र बढने की संभावना बताई जा रही है. उसी दृष्टि से कृषि विभाग ने बीजों सहित खाद भी नियोजन किया है. मांग का प्रस्ताव तैयार हो चुका है. किंतु उस पर खरीप सीजन की समीक्षा बैठक मेंमुहर लगाई जायेगी.पालकमंत्री कीअध्यक्षता में यह बैठक नियोजित है. पिछले साल की तुुलना में इस साल कपास के बुआई क्षेत्र 15 हजार 430 हेक्टर तथा तुअर के बुआई क्षेत्र 6 हजार हेक्टर घटने की संभावना है. पिछले साल 2 लाख 64 हजार840 हेक्टर में कपास की बुआई की गई थी और तुअर की बुआई 2 लाख 17 हजार 996 हेक्टर में थी. दोनों ही फसलों को अपेक्षित दाम नहीं मिलने का इसके पीछे का कारण है. इस साल सोयाबीन के बुआई क्षेत्र में 31 हजार 153 हेक्टर की वृध्दि होने की संभावना है. आगामी खरीप की सीजन में कपास बुआई 2 लाख 49 हजार 500हेक्टर मे ं किए जाने की संभावनाएं है. जिसमें 89 हजार क्विंटल बीज की मांग की गई है. जनवरी में तुअर निकालने की शुरूआत हुई. उत्पादन समाधानकारक था. कुछ जगह पर तुअर का उत्पादन प्रति हेक्टर 3 से 4 क्विंटल था तो कुछ जगहों पर 8 से 10 क्विंटल प्रति हेक्टर था. फरवरी और मार्च के बीच तुअर के बाजार भाव में सिर्फ 6,500 रूपए क्विंटल तक थे. जिससे किसानों को ेआर्थिक नुकसान सहन करना पडा.

फसल निहाय बीजों की मांग
कपास             6 हजार क्विंटल
सोयाबीन          70 हजार क्विंटल
तुअर               4,240 क्विंटल
मूंग                 77 क्विंटल
उडद              115 क्विंटल

खाद की मांग
खरीप सीजन में फसल व बुआई क्षेत्र के अनुसार 9 लाख 43 हजार 669 मैट्रिक टन रासायनिक खाद की मांग कीगई है. जिसमें युरिया 35 हजार 405, डीएपी 29 हजार 244, एनओपी 4 हजार 520, एनपी के 44 हजार 600, एसएसपीए 37, 900 मैट्रिक टन का समावेश  है.

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