अमरावती

वनकर्मियों के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स

टायगर प्रोजेक्ट में प्रायोगीक तौर पर होगा उपयोग

अमरावती/ दि.17 – वन्यजीव संरक्षण के लिए कार्यरत दी. कुलाकासा फाउंडेशन और न्यू इंजीनियरिंग कॉलेज के सामंजस्य करार से तैयार किये इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स सेमाडोह के एक कार्यशाला में वन विभाग के हवाले किया है. इस गैजेट्स के माध्यम से वन्य कर्मचारी व वन्य जीव का संरक्षण होगा.
पिछले कुछ दिन पूर्व चंद्रपुर जिले में बाघ के हमले में वन कर्मचारी महिला की मौत हो गई थी. तब वन कर्मचारियों को ऐसा कौनसा इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण दिया जाए, जिससे वन कर्मचारी व वन्यजीव का संरक्षण हो इसपर विचार मंथन करने का आह्वान चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन सुनील लिमये ने किया था. इस बात को लेकर वन्यजीव संरक्षण के लिए कार्यरत अमरावती की दी.कुलाकासा फाउंडेशन ने उसपर विचार किया. इस बारे में उन्होंने प्रो.राम मेघे इंजीनियरिंग महाविद्यालय से सामंजस्य करार किया. इंजीनियरिंग महाविद्यालय ने एक इलेक्ट्रॉनिक्स बजेट तेैयार किया. वह बिजली पर चलता है. उससे भिन्न आवाज निकलती है और समय रहते हल्का करंट लगता है. इस गैजेट का उपयोग किया तो, वन क्षेत्र में पेट्रोलिंग कर रहे वन कर्मचारियों को वन्य प्राणियों से खुद का बचाव करना संभव होगा. इससे वन्य प्राणियों को किसी तरह का नुकसान नहीं होगा. इस तरह से 10 गैजेट दी.कुलाकासा फाउंडेशन के अध्यक्ष एड.उदय देशमुख ने सेमाडोह के शिविर में वन विभाग के हवाले किया. संबंधित गेैजेट प्राथमिक स्थर पर है. उसमें भविष्य में सुधार किया जाएगा. फिलहाल मेलघाट के 10 रेंज में उपलब्ध कराने की बात बताई गई है. प्रो.सावंत ने गैजेट का प्रात्याक्षिक दिया. इस समय कुलाकासा फाउंडेशन के अध्यक्ष एड.देशमुख, संजय जगताप, बडनेरा अभियांत्रिकी महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.अली, एड.देवदत्त गावंडे, सहायक वनसंरक्षक कमलेश पाटील, श्रीमती पाटील, निकम समेत मेलघाट के रेंज आफिसर, अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे.

 

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