5 को मनेगी सम्राट अशोक की जयंती
इर्विन चौराहे पर होंगे विविध सामाजिक उपक्रम

* पत्रवार्ता में दी गई आयोजन की जानकारी
अमरावती/दि.1 – भारत के महान शासक चक्रवर्ती सम्राट अशोक की 2329 वीं जयंती आगामी 5 अप्रैल को संडे मिशन विहार व बुद्ध जयंती उत्सव समिति के संयुक्त तत्वावधान में बडी धूमधाम के साथ मनाई जाएगी. इस उपलक्ष्य में विविध सामाजिक उपक्रमों का आयोजन होगा, ऐसी जानकारी आज यहां बुलाई गई पत्रवार्ता में आयोजकों की ओर से दी गई.
इस पत्रवार्ता में बताया गया कि, ईसवी सन पूर्व 304 में जन्मे सम्राट अशोक इसवी सन पूर्व 268 में मौर्य साम्राज्य की गद्दी पर बैठे थे और इसवी सन पूर्व 261 में हुए कलिंग के युद्ध में लाखों सैनिकों की मौत देखकर हुए पश्चाताप के चलते सम्राट अशोक ने भविष्य में युद्ध नहीं करने का निर्णय लिया था और बौद्ध धम्म का स्वीकार किया था. उस समय एशिया महाद्वीप के अधिकांश भूभाग पर चक्रवर्ती सम्राट अशोक का राज्य था. सम्राट अशोक ने 84 हजार बौद्ध विहारों व अनेक बौद्ध स्तुपों का निर्माण कराया था. ऐसे में सम्राट अशोक के जीवनचरित्र पर प्रबोधन करते हुए उनका इतिहास नई पीढी के सामने रखने, सम्राट अशोक के जीवन पर आधारित परीक्षा आयोजित कर उनके इतिहास को घर-घर पहुंचाने, बौद्धकाल की धम्म नायिका को वर्तमान काल में प्रस्तुत करने एवं धम्मकार्य करनेवाले व्यक्तियों को चक्रवर्ती सम्राट अशोक धम्म प्रचार पुरस्कार देने का उद्देश्य सामने रखते हुए विगत दो वर्षों से सम्राट अशोक का जयंती उत्सव मनाया जा रहा है. जिसके तहत इस वर्ष 5 अप्रैल को इर्विन चौराहे पर आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन शहर पुलिस आयुक्त डॉ. नवीनचंद्र रेड्डी व निवासी उपजिलाधीश अनिल भटकर के हाथों होगा. इसके उपरांत संगाबा अमरावती विद्यापीठ के सिनेट सदस्य प्रा. डॉ. रवींद्र मुंद्रे की अध्यक्षता के तहत प्रबोधनात्मक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. जिसमें लेखक व इतिहासकार डॉ. सत्यजीत मोरे तथा प्रा. डॉ. चंद्रकांत सरदार (बाभूलगांव, जि. यवतमाल) द्वारा अपने विचार व्यक्त किए जाएंगे. इस समय मीनल शेंडे व उनकी टीम द्वारा स्वागतगीत की प्रस्तुति दी जाएगी तथा स्वागताध्यक्ष सुधाकर बेलसरे की देखरेख में आयोजित इस कार्यक्रम में आशा प्रधान द्वारा संचालन किया जाएगा. इसके अलावा सम्राट अशोक जयंती उत्सव के निमित्त ली गई परीक्षा के पुरस्कार वितरित किए जाएंगे.
इस पत्रवार्ता में दिलीप मसाने, सुनील रामटेके, अशोक मेश्राम, रत्नाकर शिरसाट, सुधाकर बेलसरे, डॉ. कमलाकर गोवर्धन, भारत पाटिल व मनोज शेगोकार आदि उपस्थित थे.