आय का प्रमाणपत्र नहीं रहने पर निराधारों की वित्तीय सहायता बंद!
प्रतिवर्ष जीवित रहने का प्रमाणपत्र भी देना होता है

अमरावती/दि.30– निराधारों को आर्थिक लाभ देने हेतु चलाई जानेवाली संजय गांधी निराधार योजना के लाभार्थियों को साल में एक बार अपने जीवित रहने का प्रमाणपत्र देना होता है. साथ ही केस मंजुर करते समय अपनी सालाना आय 21 हजार रूपये रहने का भी प्रमाणपत्र देना होता है. यदि संबंधितों द्वारा यह प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किये जाते, तो उन्हें दी जानेवाली आर्थिक सहायता को बंद किया जा सकता है. ऐसी जानकारी जिला प्रशासन द्वारा दी गई है.
इस संदर्भ में दी गई जानकारी में बताया गया कि, संजय गांधी निराधार योजना सहित अन्य विशेष अनुदान प्राप्त करनेवाले निराधार व्यक्तियों, दिव्यांगों व विधवा महिलाओं को आर्थिक लाभ प्राप्त करने हेतु आवेदन के साथ आय का प्रमाणपत्र भी देना होता है. संजय गांधी निराधार योजना के साथ ही श्रावणबाल सेवा राज्य निवृत्ती योजना, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा निवृत्ती वेतन आदि योजनाओं का लाभ प्राप्त करने हेतु प्राप्त लाभार्थियों द्वारा सामाजिक न्याय व विशेष सहायता विभाग के 20 अगस्त 2019 को जारी शासन निर्णय के अनुसार अप्रैल से जून की माह की कालावधि के दौरान आय का प्रमाणपत्र पेश करना अनिवार्य किया गया है. और यदि तय समय के भीतर यह प्रमाणपत्र पेश नहीं किया जाता, तो संबंधित लाभार्थियों की वित्तीय सहायता को बंद किया जा सकता है.
* तहसीलनिहाय लाभार्थी संख्या
अमरावती – 56,694
अचलपुर – 31,625
भातकुली – 19,882
नांदगांव – 23,226
चांदूर बाजार – 45,967
चांदूर रेल्वे – 16,561
धामणगांव – 12,882
तिवसा – 14,019
अंजनगांव – 12,478
दर्यापुर – 24,022
मोर्शी – 26,618
वरूड – 38,516
धारणी – 1,233
चिखलदरा – 11,775
कुल – 3,52,238
जिले में 3.52 लाख लाभार्थी
विशेष सहाय योजना अंतर्गत अमरावती जिले में कुल 3 लाख 52 हजार 238 लाभार्थी है. जिसमें से सर्वाधिक 60 हजार 18 लाभार्थी संजय गांधी निराधार योजना (सर्वसाधारण) में है. वहीं अनुसूचित जाति संवर्ग में 12,512 तथा अनुसूचित जमाति संवर्ग में 5 हजार 100 लाभार्थी है. इसके अलावा श्रावणबाल सेवा राज्य निवृत्ती वेतन में 1 लाख 61 हजार 746 लाभार्थी है.
* कहां प्रस्तुत करें आय का प्रमाणपत्र
पात्र लाभार्थियों द्वारा अपनी आय का प्रमाणपत्र अपने क्षेत्र से संबंधित तहसील कार्यालय के संजय गांधी निराधार अनुदान विभाग में देना महत्वपूर्ण होता है. इस प्रमाणपत्र के जरिये यह प्रमाणित किया जाता है कि, लाभ प्राप्त करनेवाले व्यक्ति की सालाना आय 21 हजार रूपये से कम है.
* 30 जून की डेडलाईन
संबंधित लाभार्थी का जिस बैंक अथवा पोस्ट ऑफिस में बचत खाता है, वहां पर बैंक मैनेजर अथवा पोस्ट मास्टर के समक्ष खुद उपस्थित रहकर संबंधित लाभार्थी को अपना जीवित प्रमाणपत्र (लाईफ सर्टिफिकेट) प्रस्तुत करना होता है. इसके अलावा 1 अप्रैल से 30 जून की कालावधी के दौरान तहसील कार्यालय में अपनी आय का प्रमाणपत्र देना होता है.
* किन-किन योजनाओं का है समावेश
निराधारों, दिव्यांगों व विधवा महिलाओं के लिए सरकार द्वारा संजय गांधी निराधार योजना, श्रावणबाल सेवा राज्य निवृत्ती वेतन योजना, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृध्दावस्था निवृत्ती वेतन योजना तथा राष्ट्रीय कुटूंब लाभ योजना चलाई जाती है. ये सभी योजनाएं राज्य सरकार द्वारा चलाई जाती है और कुछ योजनाओं में केंद्र सरकार द्वारा भी अनुदान दिया जाता है.
सालभर में एक बार जीवित रहने का प्रमाणपत्र बैंक के पास जमा कराना होता है और संबंधित तहसील कार्यालय को 30 जून से पहले आय का प्रमाणपत्र देना होता है. ऐसे में इस समय संबंधित लाभार्थियों की अच्छी-खासी दौडभाग चल रही है. हमारे विभाग द्वारा लाभार्थियों की ओर से आनेवाले सभी दस्तावेजों की जांच-पडताल करते हुए उनमें रहनेवाली त्रृटियों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि की कोई भी लाभार्थी योजना के लाभ से वंचित न रहे.
– राजीव वानखडे
नायब तहसीलदार, विशेष सहाय योजना