अमरावतीमहाराष्ट्र

सामाजिक सुव्यवस्था में गाडगेबाबा अग्रगण्य समाज सुधारक लोकसंत थें

प्रमोद पोकले ने भजनों के माध्यम से किया प्रबोधन

अमरावती/दि. 27– समाज में जातिगत भेदभाव, असमानता, अंधविश्वास और कुरीतियों की भयावहता को झेलते हुए वैराग्यमूर्ति गाडगे बाबा ने गरीबों की सेवा और गांव की स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा, नशा मुक्ति एवं अंधविश्वास उन्मूलन जैसे सामाजिक कार्यों को अपनाकर समाज को कीर्तन के माध्यम से जागरूक किया. अत: कर्मयोगी गाडगेबाबा ने संत तुकाराम महाराज के विचारों की विरासत को संजोकर रखने वाले एवं सामाजिक चेतना से समाज का सुधार करने वाले आधुनिक समाज सुधारक एवं लोकसंत थें. ऐसा प्रतिपादन दूरदर्शन व आकाशवाणी गायक तथा लोक कलाकार प्रमोद पोकले ने किया.
संत गाडगेबाबा उत्सव समिति, इंदिरानगर एवं समस्त ग्रामवासी मंडली जुनिवस्ती बडनेरा द्वारा आयोजित वैराग्यमूर्ति संत गाडगेबाबा पुण्यतिथि महोत्सव में भजनों के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बोल रहे थे. कार्यक्रम की शुरुआत में तबला वादक विनायक ढोले और भजन गायक प्रमोद पोकले ने संत गाडगेबाबा, राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज और स्व.महादेवबुवा बडनेरकर महाराज की छवि का पूजन किया और उसके बाद भजनों का कार्यक्रम संपन्न हुआ. तबले पर विनायक ढोले और हारमोनियम पर सुरेश वानखड़े ने, जबकि ताल पर आदित्य वानखड़े ने संगत की. इस अवसर पर संत गाडगेबाबा विद्यापीठ, अमरावती के सहयोग से गाडगेबाबा चित्रों की एक भव्य प्रदर्शनी भी आयोजित की गई. भजन प्रस्तुति के पश्चात संत गाडगेबाबा अध्यासन अमरावती विद्यापीठ के प्रो.दिलीप काले और ज्येष्ठ साहित्यकार प्रो.सतीश तराल द्वारा व्याख्यान का आयोजन किया गया.
कार्यक्रम का संचालन श्याम बडनेरकर ने किया. इस वक्त दलित मित्र उत्तमराव भैसने, सामाजिक कार्यकर्ता विजय नागपुरे, शरद ठोसरे, उमेश वाठ, मनोहर धर्माले, शंकर गव्हाले, राहुल श्रृंगारे, गौरव बांते, नाना आमले, किरण अंबाडकर, सुरेश श्रीरामवार, गणेश महाराज खंडार, पुंडलिक सपाटे, गजानन कांडलकर, अरविंद वर्‍हेकर, अरुण मावंदे, सुचित्रा वनवे, नगरसेविका गंगाताई अंभोरे उपस्थित थी. कार्यक्रम के सफलतार्थ सुरेश वानखड़े, अजय खरबड़े, ज्ञानेश्वर वानखड़े, विट्ठल मोहोड, अशोक हरणे, नामदेव निकोरे, राजू चेडे, छोटू सोनोने, संजय रुईकर, पवन सपाटे, मनोज संभे, प्रसाद पोकले, विजय दारोकर, नितिन डेहनकर, गजेंद्र बडनेरकर, श्यामराव बांते, लक्ष्मण कैकाडे, तुषार पोकले, संजय चेडे, संदीप इंगोले और ज्ञानेश्वर कैकाडे ने अथक परिश्रम किए.

 

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