अमरावती

उचित दाम नहीं मिलने से गावरानी हल्दी का रंग हुआ फिका

घटने लगा उत्पादन, कृषि विभाग की अनदेखी

वरूड/दि. ३- हल्दी की नई किस्म बाजार में आने से गावरानी हल्दी के दाम दिन ब दिन कम हो रहे है. जिसका असर उत्पादन होकर हर साल हल्दी का क्षेत्र कम हो रहा है. एक समय तहसील अंतर्गत आने वाला शेंदुरजना घाट हल्दी के उत्पादन में अग्रसर था. यहां की हल्दी की डिमांड पूरे देश में थी, किंतु अब दिन ब दिन हल्दी का उत्पादन घट रहा है. बाजार नहीं रहने से घाट की हल्दी का रंग फिका पड़ने लगा है. कृषि विभाग ने इस ओर ध्यान देने की जरूरत है. शेंदुरजनाघाट में हल्दी खरीदने व्यापारियों द्वारा दिलचस्पी नहीं दिखाई जाती. जिसके कारण कवडीमोल दाम से हल्दी की बिक्री करना पड़ता है. इस वर्ष समाधानकारक दाम मिलेंगे, ऐसी उम्मीद हल्दी उत्पादक किसानों को है.
* बॉयलर मशीन का उपयोग
शेंदुरजनाघाट में दो स्थानों पर हल्दी उबालने का काम चलता था. हल्दी उबालना, सूखाना आदि काम रहने से सैकड़ों महिला-पुरूषों को काम मिलता था, किंतु हल्दी का क्षेत्र घटने से रोजगार की समस्या निर्माण हो गई है. पहले दो उकडे में हल्दी पकाई जाती थी. अब एकही उकडे पर काम आ गया है. कुछ किसान बॉयलर मशीन से हल्दी उबालकर सुखा रहे है.
* हल्दी का उत्पादन
हल्दी फसल की लागत जहां करनी है, उस कृषि भूमि की मशागत कर जमीन तैयार की जाती है. मृग नक्षत्र में संतोषजनक बारिश होने पर कुदाली की सहायता से जमीन तैयार कर हल्दी के बीज बोए जाते है. मशागत और कटाई के समय हल्दी फसल खुदाई कर निकाली जाती है. यह काम मार्च में पूरा होता है. खुदाई कर निकाली गई हल्दी को उबाला जाता है. इसके बाद सुखाकर बिक्री के लिए बाजार में लाई जाती है. सुखी हुई हल्दी के दाम १२५०० रुपए प्रति क्विंटल बताए जाते है.
* फसल नष्ट होने की कगार पर
हल्दी का उत्पादन लेना किसानों को असंभव रहने से अनेक किसानों ने हल्दी को बगैर उबाले बेच दिया. तथा कुछ किसानों ने हल्दी के बीज भी बेच दिए. जिसके कारण शेंदुरजनाघाट में हल्दी की फसल नष्ट होने की कगार पर है.

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