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21 को गुरु गजानन धाम में भव्य महापारायण

2100 भक्तों द्वारा किया जाएगा विजयग्रंथ का पारायण

* मुखोद्गत वाचक विद्या पडवल की रहेगी प्रमुख उपस्थिति
* गुरु गजानन धाम मंदिर प्रबंधन का उपक्रम
* बिरला ओपन माइंड स्कूल कैम्पस में होगा आयोजन
अमरावती/दि.14 – स्थानीय रेवसा रोड पर बिरला ओपन माइंड स्कूल कैम्पस परिसर स्थित श्री गुरु गजानन धाम में निर्मित गुरु गजानन धाम मंदिर में आगामी 21 दिसंबर की सुबह 2100 गजानन भक्तों की उपस्थिति में श्री विजयग्रंथ का भव्य एक दिवसीय महापारायण समारोह आयोजित किया जा रहा है. जिसमें ठाणे निवासी विख्यात मुखोद्गत वाचक विद्या पडवल (उजवने) की प्रमुख उपस्थिति रहेगी. जिनके मार्गदर्शन में 2100 गजानन भक्तों द्वारा श्री गजानन विजयग्रंथ का महापारायण किया जाएगा.

* प्रति शेगांव के रुप में विख्यात है श्री गुरु गजानन धाम
बता दें कि, श्री गुरु गजानन धाम नामक रिहायशी परिसर को साकार करने वाले एवं बिरला ओपन माइंड स्कूल के संचालक सुधीर वाकोडे हमेशा से ही शेगांव के संत गजानन महाराज के परम भक्त रहे और उन्होंने रेवसा परिसर स्थित अपनी जमीन पर श्री गुरु गजानन धाम की संकल्पना को साकार करने से पहले उस जमीन पर भव्य महापारायण का आयोजन करवाया था. वह आयोजन अमरावती शहर सहित जिले के लिहाज से ‘न भूतो, न भविष्यति’ साबित हुआ था. जिसकी चर्चा आज भी अमरावती शहर के गजानन भक्तों में होती है. उसी स्थान पर आगे चलकर सुधीर वाकोडे ने श्री गुरु गजानन धाम मंदिर का निर्माण करवाया. जिसके आसपास श्री गुरु गजानन धाम मंदिर रिहायशी परिसर विकसित किया गया. यह पूरा परिसर अपने आप में इतना सुंदर व नयनरम्य है कि, देखते ही देखते इसकी ख्याति अमरावती शहर में ‘प्रति शेगांव’ के प्रति शेगांव हो गई है. साथ ही उस आयोजन के चलते नवसारी-चांगापुर मार्ग से रेवसा स्थित गुरु गजानन धाम की ओर जाने वाले मोड को महापारायण चौक का नाम दिया गया है.

* पारंपारिक भारतीय मूल्यों का शिक्षा के साथ जतन
विशेष उल्लेखनीय है कि, शेगांव के संत गजानन महाराज एवं वारकरी परंपराओं के प्रति अगाध श्रद्धा रखने वाले श्री गुरु गजानन धाम के संस्थापक सुधीर वाकोडे द्वारा बिरला ओपन माइंड स्कूल में पढने वाले बच्चों को मौजूदा दौर की अत्याधुनिक शिक्षा दीक्षा देने के साथ ही उन्हें पारंपारिक भारतीय मूल्यों के साथ जोडे रखने के साथ बिरली ओपन माइंड स्कूल में आषाढी व कार्तिक एकादशी पर वारकरी दिंडी, रिंगण समारोह व संत गजानन महाराज का प्राकट्योत्सव मनाने के साथ ही खेती-किसानी से वास्ता रखने वाले बैल पोला जैसे उत्सव को बडी धूमधाम के साथ मनाया जाता है, ताकि नई पीढी का अपने मूल्यों व जडों के साथ जुडाव बना रहे.

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