विभागीय आयुक्त डॉ. पांढरपट्टे को हाईकोर्ट का समन्स
लोणार झील के संवर्धन से संबंधित मामला

नागपुर/दि.8 – पूरी दुनिया में विख्यात रहने वाली बुलढाणा जिले के लोणार में स्थित उल्का निर्मित झील का जतन, संवर्धन और विकास करने के मामले में असफल रहने के चलते अमरावती के विभागीय आयुक्त डॉ. दिलीप पांढरपट्टे को मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने गत रोज समन्स जारी किया. साथ ही उन्हें आगामी 21 दिसंबर को अदालत ने खुद हाजिर रहने का आदेश दिया गया है.
इस मामले को लेकर अदालत में प्रलंबित रहने वाले जनहित याचिका पर गत रोज न्या. सुनील शुक्रे व न्या. महेंद्र चांदवानी की खंडपीठ के समस्य सुनवाई हुई. इस याचिका में कहा गया है कि, लोणार सरोवर के जतन, संवर्धन व विकास हेतु प्रारुप तैयार करने के साथ ही इस प्रारुप पर अमल करने हेतु राज्य सरकार ने 369 करोड रुपए दिए है. परंतु इस रकम का कोई उपयोग ही नहीं किया गया. इस प्रारुप पर अमल करने की जिम्मेदारी लोणार सरोवर संवर्धन समिति की है. जिसके पद सिद्ध अध्यक्ष अमरावती के संभागीय आयुक्त होते है. न्यायालयीन आदेशानुसार संभागीय आयुक्त के लिए प्रतिमाह इस समिति की बैठक आयोजित करना आवश्यक होता है. लेकिन अमरावती की विभागीय आयुक्त ने विगत 4 माह से इस समिति की कोई बैठक नहीं ली है. जिसकी ओर इस मामले में न्यायालय मित्र के तौर पर काम देख रहे एड. एस. एस. सान्याल ने सुनवाई के दौरान अदालत का ध्यान दिलाया. जिसे गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने अमरावती के संभागीय आयुक्त को लेकर तल्ख टिपणी की और कहा कि, समिति की नियमित बैठक नहीं लेने, लोणार सरोवर के विकास हेतु आई निधि का उपयोग नहीं करने तथा राज्य सरकार व अदालत के आदेशों का पालन नहीं करने आदि बातों से यह साबित होता है कि, अमरावती के विभागीय आयुक्त अपने कर्तव्यों का पालन करने में असफल साबित हुए है. इस टिपणी के साथ ही अदालत में विभागीय आयुक्त के नाम समन्स जारी करते हुए उन्हें आगामी 21 दिसंबर को अदालत में प्रत्यक्ष उपस्थित रहने का निर्देश दिया है.
* समिति की बैठक लेने का निर्देश
इसके साथ ही अदालत ने आगामी 17 दिसंबर को लोणार सरोवर संवर्धन समिति की बैठक आयोजित करने और इस बैठक में लोणार सरोवर विकास प्रारुप पर त्वरीत अमल करने हेतु आवश्यक निर्णय लेने का आदेश पारित किया है. साथ ही 17 दिसंबर को ली जाने वाली बैठक की रिपोर्ट 21 दिसंबर को अदालत के समस्य प्रस्तुत करने का निर्देश भी हाईकोर्ट ने अमरावती के विभागीय आयुक्त कार्यालय को दिया है.