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कब और कैसे होंगे मनपा चुनाव, संभ्रम बना

सदस्य संख्या और प्रभाग रचना को लेकर भी पशोपेश

अमरावती/दि.4– राज्य की पूर्ववर्ती महाविकास आघाडी सरकार द्वारा मुंबई को छोडकर राज्य की सभी महानगरपालिकाओं के चुनाव तीन सदस्यीय प्रभाग पध्दति से करवाने का निर्णय लेने के साथ-साथ सभी स्थानीय स्वायत्त निकायों की सदस्य संख्या को बढाने का फैसला किया गया था. जिसके चलते विगत छह-सात माह से राज्य की सभी महानगर पालिकाओं, जिला परिषदों, पंचायत समितियों, नगर पालिकाओं व नगर पंचायतों जैसे स्थानीय स्वायत्त निकायों में प्रभाग रचना से लेकर आरक्षण के ड्रॉ और प्रभागनिहाय मतदाता सूची के विभाजन की प्रक्रिया लगभग पूर्ण कर ली गई और अब अधिकांश स्थानों पर निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव करवाये जाने की तारीख घोषित किये जाने का इंतजार चल रहा है. लेकिन इसी बीच गत रोज राज्य की नई शिंदे-भाजपा सरकार ने पुरानी सरकार के फैसले को पलटते हुए राज्य की सभी महानगरपालिकाओं व जिला परिषदों में वर्ष 2011 की जनसंख्या को आधार मानते हुए वर्ष 2017 की प्रभाग पध्दति के हिसाब से ही चुनाव करवाये जाने का निर्णय लिया. गत रोज मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे व उपमुख्यमंत्री देवेेंद्र फडणवीस के मंत्रिमंडल द्वारा लिये गये इस फैसले के चलते राज्य में स्थानीय निकायों के चुनाव को लेकर विगत करीब सात-आठ माह से चल रही निर्वाचन प्रक्रिया को न केवल धक्का लगा है, बल्कि इसी पूरी प्रक्रिया के निरस्त होने का भी अंदेशा है. ऐसे में अब आम जनमानस सहित खुद राजनीतिक व प्रशासनिक स्तर पर इस बात को लेकर संभ्रम व पेशोपेश है कि, आखिर स्थानीय स्वायत्त निकायों के चुनाव कब व कैसे होंगे, कितने सदस्यीय प्रभाग पध्दति को अमल में लाया जायेगा तथा स्थानीय निकायों की सदस्य संख्या कितनी रहेगी.
बता दें कि, वर्ष 2011 में अंतिम बार जनगणना हुई थी. इसके बाद वर्ष 2021 में जनगणना होना प्रस्तावित था, लेकिन कोविड संक्रमण एवं लॉकडाउन जैसे हालात की वजह से यह जनगणना नहीं हो पायी. ऐसे में तत्कालीन महाविकास आघाडी सरकार ने दस वर्षों के दौरान औसत चार फीसद जनसंख्या वृध्दि को ग्राह्य मानते हुए सभी स्थानीय स्वायत्त निकायों में सदस्य संख्या को बढाने का निर्णय लिया. साथ ही मुंबई को छोडकर राज्य के सभी महानगरपालिकाओं में तीन सदस्यीय प्रभाग पध्दति को अमल में लाने का फैसला लिया गया है. जिसे राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा भी अपनी मान्यता दी गई थी. इस फैसले के चलते 87 सदस्यीय अमरावती महानगरपालिका की सदस्य संख्या को बढाकर 98 करने को मंजुरी मिली थी. उल्लेखनीय है कि, वर्ष 2017 में अमरावती महानगरपालिका का चुनाव चार सदस्यीय प्रभाग पध्दति से करवाया गया था और 87 सदस्य चुने गये थे. वही पिछली सरकार द्वारा लिये गये फैसले के मुताबिक अमरावती मनपा क्षेत्र में 98 सदस्यों का चुनाव करने हेतु 33 प्रभाग बनाये गये और नवंबर माह से प्रभाग परिसिमन की प्रक्रिया शुरू हुई. जिसके बाद चरणबध्द ढंग से आगे बढते हुए अंतिम प्रभाग रचना, प्रभागनिहाय मतदाता सूची और आरक्षण के ड्रॉ की प्रक्रिया पूर्ण की गई. लेकिन अब नई सरकार ने वर्ष 2011 की जनसंख्या को ही ग्राह्य मानते हुए उसी आधार पर स्थानीय निकायों में सदस्य संख्या निर्धारित करने तथा वर्ष 2017 की प्रभाग पध्दति को ही अमल में लाने का निर्णय लिया है. जिसका सीधा मतलब है कि, तीन सदस्यीय पध्दति को ध्यान में रखते हुए किया गया प्रभाग परिसिमन अब किसी काम का नहीं बचा. वहीं मतदाता सूची का भी अब चार सदस्यीय प्रभाग पध्दति को ध्यान में रखते हुए नये सिरे से विभाजन करना होगा. साथ ही साथ एससी-एसटी, ओबीसी व महिला आरक्षण का ड्रॉ भी नये सिरे से निकालना पडेगा. लेकिन इन सबके बीच मनपा चुनाव लडने के इच्छुकों द्वारा मुख्य रूप से यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि, क्या अगला चुनाव 98 सीटों के लिए होगा, या फिर वर्ष 2017 की तरह 87 सीटों के लिए 22 प्रभाग ही रहेंगे.
इस सवाल का जवाब जानने हेतु स्थानीय प्रशासनिक सूत्रों एवं राजनीतिक विश्लेषकों से बात करने पर पता चला कि, चूंकि सरकार ने वर्ष 2011 की जनसंख्या को आधार मानने का निर्णय लिया है. ऐसे में जाहीर है कि, कुल जनसंख्या के आधार पर वर्ष 2017 में 87 सीटों के लिए चुनाव हुए थे, तो इस बार भी 87 सीटों के लिए ही चुनाव कराये जायेंगे और मनपा की सदस्य संख्या में कोई वृध्दि नहीं होगी. साथ ही सरकार ने वर्ष 2017 की प्रभाग पध्दति को ही अमल में लाने व उसी आधार पर चुनाव करवाने का निर्णय लिया है. ऐसे में नये सिरे से प्रभाग परिसिमन करने की नौबत ही नहीं आयेगी, बल्कि पिछली बार जो 22 प्रभाग तय किये गये थे, उन्हें यथावत कायम रखा जायेगा. ऐसे में मनपा की सदस्य संख्या बढने से उत्साहित और चुनाव लडने के इच्छुक कई संभावित प्रत्याशियों की आशाओं व अपेक्षाओं पर अभी से पानी फिर गया है, ऐसा कहा जा सकता है.
यहां यह विशेष उल्लेखनीय है कि, ओबीसी आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चली सुनवाई की वजह से भी स्थानीय निकायों के चुनाव का मामला लंबे समय तक अधर में अटका था. इसी दौरान चुनाव करवाये जाने से संबंधित अधिकारों को लेकर तत्कालीन महाविकास आघाडी सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. जिसके चलते कुछ समय तक निर्वाचन कामों की प्रक्रिया रूकी रही. कालांतर में दोनों ही मामलोें में सुप्रीम कोर्ट में निपटारा होने के बाद चुनाव संबंधी कामों ने गति पकडी और सुप्रीम कोर्ट द्वारा महाराष्ट्र में स्थानीय निकायोें के चुनाव ओबीसी आरक्षण के साथ करवाये जाने को लेकर आदेश दिये जाने के चलते अभी हाल-फिलहाल ही अमरावती मनपा क्षेत्र में ओबीसी संवर्ग के लिए सीटें आरक्षित करने हेतु आरक्षण का ड्रॉ निकाला गया. जिसमें 26 सीटे ओबीसी संवर्ग हेतु आरक्षित की गई. लेकिन चूंकि अब कुल सदस्य संख्या ही 98 से घटकर 87 हो जायेगी. ऐसे में सभी संवर्गों के हिस्से में आनेवाली सीटों की संख्या भी घटेगी.
* गेंद निर्वाचन आयोग के पाले में
ज्ञात रहे कि, पिछली सरकार द्वारा स्थानीय निकायों में सदस्य संख्या बढाने और प्रभाग पध्दति के संदर्भ में नीतिगत फैसला लेकर इससे संबंधित प्रस्ताव राज्य निर्वाचन आयोग के पास भेजा गया था. जिसे राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी मंजूरी प्रदान की थी, क्योेंकि चुनाव संबंधी मामलों मेंं कोई भी अंतिम निर्णय लेने का अधिकार निर्वाचन आयोग के पास होता है. इसी तरह अब शिंदे-फडणवीस मंत्रिमंडल द्वारा लिया गया फैसला भी प्रस्ताव के तौर पर राज्य निर्वाचन आयोग के पास भेजा जायेगा. जिसके बाद इस हिसाब से चुनाव करवाने को लेकर निर्वाचन आयोग द्वारा अपनी मंजूरी प्रदान की जायेगी. लेकिन निर्वाचन आयोग भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई एक शर्त के साथ बंधा हुआ है. ऐसे में सरकार के इस फैसले को मंजूरी देते समय निर्वाचन आयोग को भी दस बार आगे-पीछे सोचना पडेगा.
* कल खत्म हो रही है सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई 15 दिनों की अवधि
उल्लेखनीय है कि, ओबीसी आरक्षण सहित निर्वाचन आयोग व महाविकास आघाडी सरकार की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई व निपटारा करने के उपरांत विगत माह ही सुप्रीम कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को आगामी दो सप्ताह के भीतर स्थानीय निकायों के चुनाव करवाये जाने को लेकर घोषणा करने का निर्देश दिया था. सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई 15 दिनों की अवधि कल शुक्रवार 5 अगस्त को खत्म होने जा रही है. इससे पहले राज्य निर्वाचन आयोग को स्थानीय स्वायत्त निकायों की घोषणा करना जरूरी है और अब तक ऐसा हुआ नहीं है. वहीं अब राज्य में सत्ता परिवर्तन हो जाने के बाद अस्तित्व में आयी नई सरकार ने चुनाव को लेकर नई घोषणा की है. यदि इसे निर्वाचन आयोग द्वारा मंजुर किया जाता है, तो साफ है कि, महज एक दिन में यानी कल तक चुनाव करवाये जाने को लेकर निर्वाचन आयोग द्वारा कोई घोषणा नहीं की जा सकती. ऐसे में निर्वाचन आयोग को सुप्रीम कोर्ट में अब तक हुई तैयारियों की जानकारी देने के साथ-साथ चुनाव घोषित करने की तारीख को लेकर सामने आयी परेशानी व दिक्कत के बारे में हलफनामा पेश करना होगा. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले में क्या दिशानिर्देश जारी किये जाते है, इस ओर सभी की निगाहें लगी रहेगी.
कार्यकाल खत्म होने से पहले चुनाव करवाना है जरूरी
* या कार्यकाल खत्म होने के बाद छह माह के भीतर पुनर्गठन करना आवश्यक
बता दें कि, संविधान में हुए 74 वें संशोधन के मुताबिक किसी भी स्थानीय स्वायत्त निकाय का कार्यकाल खत्म होने से पहले ही उसका चुनाव करवाया जाना जरूरी होता है, ताकि पुराने सदस्यों के निवृत्त होने से पहले-पहले नये सदस्यों का चयन हो जाये. वही यदि किसी कारणवश ऐसा नहीं हो पाता और यदि स्थानीय स्वायत्त निकाय को भंग करना पडता है, तो स्थानीय निकाय का कार्यकाल खत्म होने की तारीख से अगले छह माह के भीतर सदन का पुनर्गठन करना जरूरी होता है. उल्लेखनीय है कि, अमरावती महानगर पालिका के पिछले सदन का कार्यकाल विगत 8 मार्च को खत्म हो गया था. इससे पहले अमरावती महानगरपालिका के चुनाव करवाना विभिन्न कारणों की वजह से संभव नहीं हो पाया था. ऐसे में मनपा में प्रशासक राज शुरू हुआ, लेकिन नियमानुसार छह माह के भीतर यानी 8 सितंबर से पहले मनपा के चुनाव होकर नये सदन का गठन होना जरूरी है और अब तक चल रही निर्वाचन प्रक्रिया को देखते हुए ऐसा होने की उम्मीद भी जताई जा रही थी. लेकिन अब राज्य सरकार द्वारा एक अलग ही फैसला लिये जाने के चलते आगामी दो माह में पूरी प्रक्रिया दोबारा नये सिरे से पूर्ण करते हुए चुनाव करवा लिये जाने की संभावना बेहद कम दिखाई दे रही है.
* दिसंबर-जनवरी तक लटक सकता है चुनाव
राजनीतिक एवं प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक अगर मौजूदा तीन सदस्यीय प्रभाग पध्दति को रद्द कर पहले की तरह चार सदस्यीय प्रभाग पध्दति को अमल में लाया जाता है, तो भी काफी हद तक प्रभाग परिसिमन में संशोधन करना पडेगा, क्योंकि विगत पांच वर्षों के दौरान शहर के सीमावर्ती क्षेत्रोें में कई नई रिहायशी बस्तियां अस्तित्व में आयी है. जिन्हें संबंधित प्रभागों में चिन्हीत व उल्लेखित करना पडेगा. इसके अलावा मतदाता सूची का नये सिरे से विभाजन करते हुए एससी-एसटी, ओबीसी व महिला आरक्षण का ड्रॉ भी नये सिरे से निकालना पडेगा. साथ ही इन सभी कामों को लेकर आपत्ति व आक्षेप की प्रक्रिया भी पूरी करनी पडेगी. जिसके बाद निर्वाचन आयोग द्वारा चुनावी अधिसूचना जारी करते हुए चुनाव की तारीखें घोषित की जायेगी. ये सभी काम अगले दो माह के भीतर होने फिलहाल तो मुश्किल दिखाई दे रहे है. ऐसे में पूरी संभावना है कि, अमरावती मनपा का चुनाव आगामी दिसंबर या जनवरी माह के आसपास ही हो पाये. यहां यह भी उल्लेखनीय है कि, इसी दौरान पडोसी राज्य गुजरात के भी चुनाव होने है. जिसे भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. चूंकि इस समय केंद्र में भाजपा की सरकार है और गुजरात में लंबे समय से भाजपा का ही राज है. साथ ही साथ महाराष्ट्र की सत्ता में भी भाजपा मुख्य भागीदार है. ऐसे में यह संभावना भी बनती दिखाई दे रही है कि, गुजरात का चुनाव निपटने के बाद ही महाराष्ट्र में महानगर पालिका के चुनाव का मोर्चा खोला जाये.
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* जिला परिषद में भी 59 सदस्य ही रहेंगे
– पुराने निर्वाचन क्षेत्रों को रखा जायेगा यथावत
राज्य मंत्रिमंडल द्वारा लिये गये फैसले के चलते महानगरपालिका के साथ-साथ जिला परिषद की निर्वाचन प्रक्रिया भी प्रभावित होती नजर आ रही है. इससे पहले जिला परिषद में 59 सदस्य हुआ करते थे. जिसे बढाकर 66 करने का फैसला राज्य की पिछली महाविकास आघाडी सरकार द्वारा लिया गया था. लेकिन अब नई सरकार ने इस फैसले को पलटकर पुरानी सदस्य संख्या व पुराने निर्वाचन क्षेत्रों को कायम रखने का निर्णय लिया है. ऐसे में यह स्पष्ट है कि, अब जिला परिषद में पहले की तरह 59 सदस्य ही चुने जायेंगे.

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