
* सिनेट चुनाव को लेकर प्रा. दिनेश सूर्यवंशी ने दिया स्पष्टीकरण
अमरावती/ दि. 5 – आगामी 20 नवंबर को विद्यापीठ के सिनेट चुनाव होने जा रहे है. ऐसे में षडयंत्रकारियों व्दारा पोस्ट वायरल कर मैं राष्ट्रवादी प्राध्यापक संगठना की ओर से सिनेट चुनाव के लिए प्रत्याशी खडे कर रहा हूं, इस तरह षडयंत्र रचकर बेवजह मुझे बदनाम किया जा रहा है. जबकि ऐसा नहीं है और भविष्य में भी नहीं होगा. कल विड्रॉल का समय था, ऐसे वक्त में कौन बेवकुफ ऐसा कहेगा. चुनाव में शिक्षण मंच के विद्यमान अध्यक्ष को छोडकर सभी सदस्यों का समर्थन कर चुनाव में उनका प्रचार भी करुंगा, ऐसा स्पष्टीकरण शिक्षण मंच के सदस्य प्रा. दिनेश सूर्यवंशी ने आज पत्रकार परिषद के माध्यम से दिया.
पत्रकार परिषद में प्रा. दिनेश सूर्यवंशी के साथ सागर पाटील, अजय सारस्कर, विशाल जाधव, सिध्दार्थ डोंगरे आदि उपस्थित थे. पत्रकारों को संबोधित करते हुए सूर्यवंशी ने कहा कि, आगामी 20 नवंबर को विद्यापीठ का सिनेट चुनाव है. वर्ष 1982 से उन्होंने इस क्षेत्र का कार्य शुरु किया. 1995 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से प्रत्याशी के रुप में चुनावी मैदान में उतरे थे. वर्ष 2000 में भी भारी वोटों से जीते थे. 2006 में सिनेट में मेंबर अधिकारी के रुप में प्रवेश करने का अवसर मिला. उन्होंने विद्यार्थी, शिक्षकों के हित में भ्रष्टाचार के खिलाफ कई आंदोलन कर सफलतापूर्वक हल निकाला.
प्रा.सूर्यवंशी ने बताया कि, सोशल मीडिया पर चुनाव के मुहाने पर एक पोस्ट सोशल मीडिया पर जमकर वायरल किया जा रहा है. जिसमेें कहा गया है कि, मैं राष्ट्रवादी प्राध्यापक संगठना की ओर से सिनेट में प्रत्याशी खडा कर रहा हूं. जबकि यह सरासर झूठ है और भविष्य में भी मैं ऐसा कभी नहीं करुंगा. यह केवल चुनावी फायदे के लिए मुझे बदनाम करने का षडयंत्र रचा जा रहा है. कल विड्रॉल करने का दिन था. ऐसे वक्त में कौन बेवकुफ ऐसा निर्णय लेकर अपना पैनल खडा करेगा. उन्होंने यह भी बताया कि, राष्ट्रवादी के प्रफुल्ल राउत 1986 में नेतृत्व करते थे. परंतु कांग्रेस को एक ओर रख वीएलसी को समर्थ करते थे. विद्यापीठ में जबरन पप्पू को लाने का प्रयास किया जा रहा है. वे केवल अपने काम से मतलब रखे, मुझे बदनाम करने का प्रयास न करे, तो बेहतर होगा.
सूर्यवंशी ने यह भी कहा कि, अभाविप में सभी प्रत्याशियों का वे समर्थन करते है. वे उस संस्था से जुडे है, उस संस्था की बदौलत ही आज वे इस जगह पर है. इन प्रत्याशियों को जीताने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे, परंतु उन्होंने नाम न लेते हुए यह भी स्पष्ट किया कि, विद्यमान अध्यक्ष छोडकर सभी का साथ देंगे, परंतु पत्रकारों व्दारा जोर देने से प्रा. प्रदीप खेडकर का नाम लेते हुए उनका साथ नहीं देने की बात कही. उन्होंने बताया कि, वह पोस्ट सभी स्तर पर षडयंत्र के तहत पहुंचाई जा रही है. जबकि उस पोस्ट से मेरा कोई संबंध है और ना कभी रहेगा, मैं कोई पैनल भी खडा नहीं करुंगा, मुझे करना रहता तो मैं पहले कर लेता था. वे सोच रहे है कि, मुुझे इस तरह बदनाम कर वे चुनाव जीत जाएंगे, मगर ऐसा नहीं होगा, वे निचले दर्जे की राजनीति कर रहे है, दुहेरी भूमिका अपनाकर कार्यकर्ताओं को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि, कई लोगों ने उन्हें पैनल डालने का आग्रह किया था, मगर उन्होंने साफ इनकार कर दिया, वे अपनी कल होने वाली नाकामी मेरे मत्थे मडने का प्रयास कर रहे है, ऐसा भी इस समय स्पष्ट किया.