अमरावती

सस्ता नहीं होता घर में कुत्ता पालना

विदेशी नस्ल वाले कुत्तों को प्रतिमाह खर्च होते है 5 से 7 हजार रुपए

अमरावती/दि.26– शहरी क्षेत्र में कई लोग कुत्ते पालने का शौक रखते है. जिसके तहत अलग-अलग विदेशी नस्ल वाले कुत्तों को हजारों रुपए खर्च करते हुए खरीदकर घर लाया जाता है और उसे परिवार के किसी सदस्य की तरह पाला-पोसा जाता है. जिसमें प्रमुख तौर पर लैब्राडोर व जर्मन शेफर के साथ ही गोल्डन रिट्रीवर व शितजुलासा प्रजाती वाले कुत्तों का समावेश होता है.

कुत्ता पालने के शौक को लेकर बडे पैमाने पर आर्थिक लेन-देन भी होते है. किसी इंडीडॉग को पालने में साधारणत: ढाई हजार रुपए प्रतिमाह का खर्च होता है. वहीं विदेशी ब्रीड वाले कुत्तें को पालने हेतु हर महिने 5 से 7 हजार रुपए खर्च करने पडते है. विदेशी ब्रीड वाले कुत्तों पर होने वाले खर्च में से सबसे अधिक रकम उनके खाने-पीने और टीकाकरण पर खर्च होती है. विदेशी ब्रीड वाले कुत्तों का खाना काफी महंगा होता है. जिसके लिए बाजार से डॉग फुट खरीदकर लाना पडता है. जिसकी तुलना में इंडिडॉग को घर पर बना कोई भी खाद्य पदार्थ खाने के लिए दिया जा सकता है. इंडिडॉग को केवल सबसे पहले रैबिज का इंजेक्शन देना पडता है. यह इंजेक्शन देने के बाद अगले 3 वर्ष के दौरान यदि कुत्तें ने किसी को गलती से काट भी लिया, तो उस व्यक्ति को रैबिज होने का खतरा नहीं होता. जिसके चलते पशु वैद्यकीय कर्मचारियों द्बारा कुत्तों का टीकाकरण किया जाता है. साथ ही कुत्ता पालने वाले व्यक्ति द्बारा भी अपने कुत्तें के स्वास्थ्य की ओर विशेष ध्यान देते हुए उसे निजी पशु चिकित्सक के जरिए विविध तरह के टीके लगाए जाते है.

* विदेशी कुत्तों का टीकाकरण होता है अलग

जहां एक ओर इंडिडॉग को केवल रैबिज प्रतिबंधक टीके का इंजेक्शन लगाकर काम चल जाता है. वहीं लैब्राडोर, डॉबरमैन, जर्मन शेफर्ड, गोल्डन रिट्रीवर एवं शितजुलासा जैसे विदेशी ब्रीड वाले कुत्तों को अलग-अलग तरह का टीकाकरण कराना पडता है. क्योंकि विदेशी नस्ल वाले इन कुत्तों पर वातावरण में होने वाले बदलाव का भी परिणाम पडता है.

* विदेशी ब्रीड वाले कुत्तों को लेकर बढ रहा रुझान

सडकों पर आवारा भटकते कुत्तों के छोटे-छोटे पिल्लों को इंडिडॉग कहा जाता है. सहज तौर पर उपलब्ध होने वाले इन कुत्तों को पालने में खर्चा काफी कम होता है. परंतु स्टेटस व फैशन का जमाना रहने के चलते इन दिनों विदेशी ब्रीड वाले कुत्तों को पालने की प्रवृत्ति बढ गई है.

* बुजुर्गों को मिलता है सहारा

शहरी क्षेत्र में बुजुर्ग नागरिकों को कई बार अकेलेपन का एहसास होता है. ऐसे समय बुजुर्ग नागरिकों द्बारा लैब्राडोर या गोल्डन रिट्रीवर जैसे कुत्तों को पाला जाता है. जिन्हें अमूमन शांत और दोस्ताना स्वभाव वाला कुत्ता माना जाता है. इसके अलावा कई बुजुर्ग नागरिक रास्ते पर घुमते दिखाई देने वाले किसी सुंदर से इंडिडॉग को उठाकर अपने घर ले आते है और उसे अपने अकेलेपन का साथी बनाकर पालते है.

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