अमरावतीमहाराष्ट्र

शासकीय अस्पतालो में ‘एमआरआई’ सुविधा का अभाव

निजी तौर पर गिनने पडते है मरीजों को पैसे

* उपचार लेने के लिए भर्ती मरीजो को भागना पडता है निजी अस्पतालो में
अमरावती/दि. 7– जिले के सभी शासकीय अस्पताल अभी भी ‘एमआरआई’ सुविधा के बगैर है. इस कारण जरुरतमंद मरीजो को परेशानी हो रही है. उन्हें मजबूरन बडा खर्च कर निजी तौर पर ‘एमआरआई’ करना पड रहा है. लगातार प्रयास शुरु रहने के बावजूद जिला अस्पताल को ‘एमआरआई’ मशीन नहीं मिली है. सुपर स्पेशालिटी में ‘एमआरआई’ मशीन शासन द्वारा मंजूर की गई रही तो भी इंस्टॉल होकर शुरु होने में समय लगनेवाला है. इस कारण गरीब मरीजों के पास निजी तौर पर पैसे खर्च कर ‘एमआरआई’ निकालने के अलावा दूसरा कोई पर्याय नहीं है. इसे शासकीय अस्पतालों की उदासिनता ही कहा जा सकता है.
जिला अस्पताल में भर्ती मरीजो के ‘एमआरआई’ अस्पताल की तरफ से निजी तौर पर किए जाते है. ‘एमआरआई’ केंद्र के साथ ‘एमओयू’ हुआ है. इसके तहत मरीजों की आवश्यकता के मुताबिक ‘एमआरआई’ कर लिया जाता है, ऐसी जानकारी जिला अस्पताल प्रशासन द्वारा दी गई. अन्य मरीजो को ‘एमआरआई’ निजी तौर पर करना पडता है, ऐसा भी उन्होंने स्पष्ट किया. इस कारण अनेक गंभीर मरीजों को निजी अस्पताल में जांच करनी पडती है. इस ‘एमआरआई’ जांच के लिए मरीजों को करीबन 5 से 10 हजार रुपए चुकाना पडता है. साथ ही केवल ‘एमआरआई’ के लिए मरीजो को शासकीय अस्पताल से निजी अस्पताल में ले जाना पडता रहने से मरीज और रिश्तेदारों को काफी परेशानी उठानी पडती है. इस कारण शासकीय अस्पताल में ‘एमआरआई’ सुविधा कब शुरु होगी, ऐसा प्रश्न उपस्थित किया जा रहा है. जिला अस्पताल शुरु होने को करीबन 96 वर्ष पूर्ण हो गए है. इस अस्पताल में हर दिन औसतन 1000 से 1200 ओपीडी में मरीज आते है तथा उपलब्ध बेड की संख्या से अधिक मरीज यहां भर्ती रहते है. लेकिन अभी भी इस अस्पताल में स्वास्थ सुविधा कम है. दुर्घटना तथा अन्य आपातकालिन वैद्यकीय परिस्थिति में सीटी स्कैन की तरह ही ‘एमआरआई’ की आवश्यकता रहती है. लेकिन किसी भी सरकारी अस्पताल में ‘एमआरआई’ सुविधा उपलब्ध नहीं है. जिला अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती हुए मरीजों को ‘एमआरआई’ जांच की आवश्यकता रही तो डॉ. पंजाबराव देशमुख वैद्यकीय महाविद्यालय में रेफर किया जाता है. इन मरीजो के ‘एमआरआई’ का खर्च अस्पताल प्रशासन की तरफ से दिया जाता है. लेकिन इस संदर्भ के अनेक मरीजो को जानकारी नहीं है. इस कारण शासकीय अस्पताल में ‘एमआरआई’ सुविधा की मांग हो रही है.

* डेढ वर्ष पूर्व ही शासन ने दी ‘एमआरआई’ को मंजूरी
4 जुलाई 2023 को सार्वजनिक स्वास्थ विभाग के शासन निर्णय के मुताबिक सुपर स्पेशालिटी अस्पताल के वैद्यकीय उपकरण व साहित्य खरीदी के लिए 132 करोड 63 लाख रुपए मंजूर किए गए थे. इसमें विभागीय संदर्भ सेवा अस्पताल के लिए 15 करोड रुपए की ‘एमआरआई’ मशीन का भी समावेश था. लेकिन शासन की तरफ से यह मशीन अस्पताल प्रशासन को नहीं मिली. वह अब पहुंचनेवाली है, ऐसी जानकारी सुपर स्पेशालिटी हॉस्पिटल द्वारा दी गई.

* इर्विन, डफरीन में सोनोग्राफी मशीन
जिला अस्पताल, सुपर स्पेशालिटी हॉस्पिटल और जिला महिला अस्पताल इन तीनों शासकीय अस्पतालो में सोनोग्राफी मशीन है. क्योंकि इसके अलावा पेट की बीमारी सहित अन्य व्याधियों की जानकारी मिलना संभव नहीं है. इसे नसीब ही कहना पडेगा कि एमआरआई मशीन नहीं रही तो भी सोनोग्राफी मशीन रहने से सोनोग्राफी करने का खर्च जरुरतमंद मरीजो को करना नहीं पडता.

* एमआरआई के निजी भाव
कंधा – 5 हजार रुपए
हड्डी – 5 से 6 हजार रुपए
कैंसर – 10 से 15 हजार रुपए
टीबी – 10 हजार रुपए
गर्दन – 7 से 8 हजार रुपए
घुटना – 6 से 7 हजार रुपए

Back to top button