
* मंगरूल दस्तगीर के दो उत्साही युवाओं का अनूठा संकल्प
अमरावती/दि.3- दीपावली की रात समृध्दी व ऐश्वय का प्रतिक रहनेवाली लक्ष्मी का बडे विधि-विधानपूर्वक पूजन किया जाता है. जिसके तहत लोगबाग अपने घर में मौजूद चलनी सिक्कोें व करन्सी नोटों के साथ ही सोने-चांदी के आभूषणों की आरास माता लक्ष्मी के सामने रखते है. साथ ही कई लोगबाग पुरातनकालीन सिक्कों को भी लक्ष्मीपूजन के लिए बडे जतन से संभालकर रखते है. किंतु मंगरूल दस्तगीर गांव निवासी दिलीप महात्मे व नकूल प्रभे ने लक्ष्मीपूजन के लिए भारतीय करन्सी के साथ-साथ 151 देशों के सिक्के एवं 15 देशों के करन्सी नोटों को जमा करने का संकल्प लिया है और ये दोनों अब तक दुनिया के कई देशों के सिक्कों व नोटों को जमा भी कर चुके है. जिन्हें वे कल लक्ष्मीपूजन की आरास में रखेंगे.
बता दें कि, ग्रामीण क्षेत्र की स्कूल में पढनेवाले बच्चों को महत्वपूर्ण ऐतिहासिक प्रदर्शनी देखने हेतु अपने पास से पैसा खर्च कर बडे शहरों में जाना पडता है. इस बात के मद्देनजर धामणगांव रेल्वे तहसील अंतर्गत मंगरूल दस्तगीर गांव निवासी अग्निपंख एज्युकेशन फाउंडेशन के संस्थापक दिलीप वसंतराव महात्मे तथा नकूल विश्वनाथ प्रभे द्वारा विगत दस वर्षों से भारत सहित विश्व के अनेक देशोें के ऐतिहासिक सिक्कों व नोटों का संकलन किया जा रहा है. जिसके तहत उन्होंने विविध देशों केे करीब 3 हजार नोट व सिक्के संकलित किये गये है. इस जरिये दिलीप महात्मे व नकूल प्रभे ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को दुनिया के अलग-अलग दशों की करन्सी व इतिहास के बारे में नि:शुल्क जानकारी देने का इरादा रखते है. करीब 10 वर्ष पूर्व दिलीप महात्मे के पूजा घर में पुरातनकालीन 10-15 सिक्के थे. जिसके बाद उन्होंने ऐसे ही पुरातनकालीन सिक्कों के साथ-साथ दुनिया के अन्य देशों के सिक्के व नोट जमा करने का सिलसिला शुरू किया. जिसके तहत उन्हें उनके परिचित लोगों से भी ऐसे सिक्के व नोट प्राप्त हुए. साथ ही साथ परिचय का दायरा बढने के बाद उन्होंने कई शहरों में जाकर भी सिक्के व नोट संकलित किये. सबसे उल्लेखनीय यह रहा कि, उन्हें ऐसे सिक्कों व नोट को प्राप्त करने हेतु अपने पास से एक रूपये भी खर्च नहीं करना पडा. साथ ही इस काम में उन्हें नकूल प्रभे का भी भरपूर साथ व सहयोग मिला और आज इन दोनों के पास दूनिया के कई देशों के 3 हजार से अधिक सिक्के व नोट है. जिनके साथ वे कल लक्ष्मीपूजन का पर्व मनायेंगे.