अमरावती

मृत्यु के बाद भी जिंदगी संभव

अंगदान के जरिये जारी रह सकता है जीवन

अमरावती/ दि.19 – किसी व्यक्ति के ब्रेन डेड की अवस्था में पहुंच जाने के बाद उसके शरीर के कई महत्वपूर्ण अंग कुछ मरीजों की जान बचाने के काम आ सकते है. इस जरिये मृत्यु के बाद भी अपने अंगों के जरिये कई शरीरों में जीवित रहा जा सकता है और किसी की आँखों में रोशनी बनकर अपनी मृत्यु के बाद भी दुनिया को देखा जा सकता है. ऐसे में बे्रन डेड की स्थिति में पहुंच चुके मरीजों के महत्वपूर्ण अंगों को प्रत्यारोपण हेतु दान किया जाना बेहद जरुरी होता है. जिसके लिए अंगदान के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं व्दारा व्यापक स्तर पर जनजागृति की जाती है. जिसके सकारात्मक अवसर भी दिखाई देने लग गए है और विगत पांच वर्षों के दौरान अमरावती जिले में अवयव दान के चार से पांच मामले हुए. वहीं जारी विगत एक वर्ष के दौरान परतवाडा में रहने वाली 65 वर्षीय महिला की दो किडनियों व लिवर को उसके परिजनों की अनुमति पश्चात जरुरतमंद मरीजों हेतु दान किया गया.
सालभर में 25 नेत्र प्रत्यारोपण व 5 किडनी प्रत्यारोपण
जिले में विगत एक वर्ष के दौरान नेत्र प्रत्यारोपण की 25 शल्यक्रियाएं हुई. वहीं सुपर स्पेशालिटी अस्पताल में किडनी प्रत्यारोपण की पांच शल्यक्रियाएं की गई.
अवयवों के लिए काफी लंबी वेटिंग लिस्ट
कई गंभीर बीमारियों से जुझ रहे मरीजों को कई महत्वपूर्ण अवयवों की जरुरत रहती है. जिसके तहत किसी को आँखे, किसी को किडनी, लिवर या दिल जैसे महत्वपूर्ण अंगों की जरुरत होती है. इसके लिए काफी लंबी वेटिंग लिस्ट है और जब भी कही से किसी ब्रेनडेड मरीज के अवयव दान की जानकारी अपडेट होती है, तो उन अंगों के साथ जरुरतमंद मरीज के ब्लडग्रुप सहित अन्य आवश्यक घटकों का मैच यानी मिलान किया जाता है. जिसके बाद अवयव दान की प्रक्रिया पूर्ण होती है.
जनजागृति की जरुरत
नेत्रदान को लेकर बडे पैमाने पर जनजागृति रहने के चलते कई लोग मरणोपरांत आँखे दान करने हेतु स्वयंस्फूर्त रुप से संकल्प लेते है, लेकिन अन्य अंगों के दान को लेकर जनजागृति कम रहने के चलते नागरिकों को मरणोपरांत अंगदान का महत्व सही तरिके से पता नहीं है. अत: इसके बारे में जानकारी देने में जनजागृति बेहद आवश्यक है.
किन-किन अंगों का हो सकता है दान
ब्रेनडेड होने वाले व्यक्ति के दिल, फेफडे, कान के पर्दे, आँखे, त्वचा, किडनी व लिवर सहित हड्डियों का दान किया जा सकता है. वहीं सामान्य तरीके से मौत होने की स्थिति में केवल आँखे ही दान हो सकती है.
ऐसे होती है अवयव दान की प्रक्रिया
संबंधित अस्पताल से संपर्क करते हुए अवयव दान के लिए पंजीयन किया जा सकता है.
– इस पंजीयन के समय दो साक्षीदारों का साथ में रहना बेहतद जरुरी होता है.
किसी भी व्यक्ति के बे्रनडेड अवस्था में पहुंचने के बाद अवयव दान करते हुए अपने मरीजों की जान बचाना संभव है. जिले में विगत पांच वर्षों के दौरान 25 नेत्र प्रत्यारोपण व 5 किडनी प्रत्यारोपण की शल्यक्रिया हुई है.
– डॉ. दिलीप सौंदले,
जिला शल्यचिकित्सक

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