महावितरण ग्राहकों को केंद्रबिंदु में रखकर फैसला ले
राजनीति में क्रेडिट लेनेवालों को करें नजरअंदाज, महाराष्ट्र चेंबर के अध्यक्ष सतीश मंडलेचा का प्रतिपादन

अमरावती प्रतिनिधि/दि.२१ – वर्तमान में बिजली बिल के संदर्भ में राज्य के ग्राहकों में गुस्सा है. राज्य सरकार, महाराष्ट्र बिजली नियामक आयोग व महावितरण कंपनी की बारबार बदलती भूमिका की वजह से ग्राहकों में गुस्से का माहौल है. १ अप्रैल २०२० से नया नियम लागू किया गया है. देश में लॉकडाउन घोषित होने से व्यापार, उद्योग बंद रहने से आर्थिक स्थिति पूरी तरह डगमगा चुकी है. ऐसे परिस्थिति में महावितरण कंपनी ने ग्राहकों को प्रत्यक्ष बिजली बिल नहीं दे पायी. जिससे उन्हें ऑनलाइन बिल दिए गए. सरकार ने ग्राहकों को कोरोना के समय में बिल भरने के लिए मुदत वृद्धि दी, लेकिन बडी रकम के बिल मिलने से बडी संख्या में ग्राहकों ने बिजली बिल भरे ही नहीं. उर्जामंत्री राउत ने सीधे बिजली बील के वसूली के आदेश भी दिए है, यह अन्यायकारक है. ग्राहकों को परेशान कर सत्ताधारी पक्ष द्बारा अंतर्गत राजनीति का खेल जारी है. ऐसा अखबारों की खबरों से दिखायी दे रहा है. पिछले कुछ दिनों से राज्य में ग्राहकों द्बारा किए जा रहे आंदोलन, मोर्चा, जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपना आदि की राज्य सरकार द्बारा दखल नहीं ली जा रही ऐसा दिखायी दे रहा है. विधानसभा अध्यक्ष नाना पटोले ने सरकार ने बिजली बिल के संदर्भ में ग्राहकों को राहत देने के निर्देश दिए थे, उस संदर्भ में सरकार ने कुछ नहीं किया. सत्ताधारी आघाडी सरकार को बिजली ग्राहकों से कोई लेना देना नहीं है.
सत्ताधारी सरकार ने मतभेद को परे रखकर बिजली बिल ग्राहकों की समस्या को समझना जरुरी है. महाराष्ट्र चेंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एन्ड एग्रीकल्चर ने महाराष्ट्र बिजली नियामक आयोग की सुनवाई के समय बिजली दरवृद्धि को विरोध किया था व उस संदर्भ में उपमुख्यमंत्री, उर्जामंत्री, उद्योग मंत्री के पास ज्ञापन सौंपकर अपनी भूमिका रखी है. अब सत्ताधारी आघाडी सरकार ने बिजली दरवृद्धि व बिजली बिलों के बारे में अपनी नीति स्पष्ट जाहिर करें व सकारात्मक विचार कर ग्राहकों के हित में निर्णय ले. कोरोना की वजह से लोगों को आय नहीं है, आर्थिक चक्र रुक गया है. ऐसे में महाराष्ट्र के चेंबर के निर्देशों में राज्य के विविध चेंबर के प्रतिनिधियों ने उपमुख्यमंत्री, उर्जामंत्री, उद्योगमंत्री, सांसद, विधायक व जनप्रतिनिधियों से बिजली दरवृद्धि अन्यायकारक है. ऐसा कहकर उसे कम करने के बारे में बातचीत की व ज्ञापन सौंपा. उस समय सकारात्मक विचार कर रहे है. ऐसा कहकर मंत्रिमंडल की बैठक में प्रस्ताव रखकर जल्द ही अच्छा निर्णय लिया जाएंगा, ऐसा कहा गया था, लेकिन उर्जा मंत्री राउत ने सीधे कोई भी छूट दिए बगैर ग्राहकों से बिजली बिल वसूल के आदेश ही दिए है.
बिजली बिल के दामों में बढोत्तरी को लेकर विरोध करने के पश्चात १ अप्रैल २०२० से बढोत्तरी की गई है और अब वसूली के आदेश दिए गए है. महाराष्ट्र बिजली मंडल का कामकाज ठीकठाक चलने के लिए सरकार ने १५ वर्ष के पूर्व उसका विभाजन करते हुए तीन स्वतंत्र कंपनियों में बांट दिया था. लेकिन उसके बावजूद भी कंपनियों का कारोबार जनहित की दृष्टि से नहीं हो रहा. महावितरण कंपनी कैसी घाटे में है, उसकी वजह पहले की तरह ही बिजली बिल वसूली व बिजली चोरी है ऐसा उर्जा मंत्री कहते है. तो स्वतंत्र कंपनियां बनाकर क्या हासिल हुआ? यह बडा सवाल है. बिजली दरवृद्धि व बिजली बिल के संदर्भ के निर्णय का श्रेय किसी एक पक्ष को नहीं मिलेंगा, आघाडी सरकार को मिलने वाला है. श्रेयवाद की वजह से बिजली ग्राहकों के हित में बाधा आ रही है. इसलिए बिजली ग्राहकों को केंद्र स्थान में रखकर उनके हित का निर्णय जल्दी लेना जरुरी है. इस समस्या पर मुख्यमंत्री ने पहल कर हल ढूंढना जरुरी है.
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बिजली ग्राहकों के प्रति सरकार ने संवेदनशील होना जरुरी : विनोद कलंत्री
अमरावती चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष विनोद कलंत्री ने बताया कि बिजली ग्राहकों के प्रति सरकार ने संवेदनशील होना जरुरी है. कोविड-१९ के चलते व्यापार उद्योग के जूझ रहे थे. आर्थिक पहिये थम चुके थे. विद्युत ग्राहक परेशानियों से झुज रहे थे ऐसे में उनके प्रति संवेदनशीलता रखने के बजाय महाराष्ट्र सरकार, महावितरण प्रताडित कर रही है. उर्जा मंत्री के ‘जबरन वसूली‘ के वक्तव्य से जनमानस में काफी गहरा गुस्सा है. सरकार ने हालत को समझकर जनहित में निर्णय लेना सरकार का दायित्व है. अमरावती चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री महाराष्ट्र सरकार से अनुरोध करती है कि आज व्यापार उद्योग बुरे दौर से गुजर रहे है जिसका असर सर्वसाधारण नागरिक पर भी हो रहा है. ऐसे में इस तरह के नियम लगाकर छलावा ना करे ऐसा निवेदन चेंबर के अध्यक्ष विनोद कलंत्री ने प्रेस विज्ञप्ति में किया है.