अमरावती

महावितरण को लगा जोरदार झटका

कृषिपंप धारको के पास 1200 करोड का बिजली बिल बकाया

1.39 लाख कृषिपंप धारको ने पांच वर्ष में एक बार भी बिल नहीं भरा
अमरावती/ दि. 14-बिजली बिल भरने का कम प्रतिसाद मिलने से महावितरण का जिले का 1 लाख 39 हजार कृषिपंप धारको के पास 1200 करोड रूपए बकाया है. यह बकाया इस बार की न होकर सितंबर 2020 से अभी तक की है. इस बकाया को सहूलियत देने के बाद भी बिल नहीं भरा जाता जिसके कारण महावितरण को जोरदार झटका सहन करना पड रहा है.
बार- बार खंडित होनेवाली बिजली आपूर्ति की शिकायत बढने के कारण महावितरण ने नवंबर 2020 से खराब होनेवाले रोहित्र बदलना आरंभ किया. अमरावती परिमंडल में अभी तक 1507 रोहित्र बदले गए. फिर भी कृषिपंपधारक बिजली बिल भरने के लिए सकारात्मक प्र्रतिसाद नहीं दे रहे है. महावितरण ने पहले 50 प्रतिशत, अब 30 प्रतिशत सहूलियत देने पर भी कृषिपंपधारक उस ओर ध्यान नहीं दे रहे है. कारण अब भी उनकी स्थिति जैसे थी वैसी ही है.
सितंबर 2020 तक 800 करोड कृषिपंप धारकों के पास बकाया थे. उस समय 50 प्रतिशत ब्याजमाफी की भी घोषणा भी की गई. यदि पहले वर्ष में कृषि नीति में भाग लेकर 400 करोड की बकाया दी होती तो शेष 400 करोड माफ हो जाते. परंतु वह न भरे जाने से बकाया और 400 करोड बढ गये. अब ब्याज और विलंब आकार पर 30 प्रतिशत ही सहूलियत है. कृषि नीति का दूसरा वर्ष 31 मार्च 2023 में खत्म होगा. उसके बाद तीसरा वर्ष शुरू होगा.
वर्तमान स्थिति में कृषिपंप धारको ने कृषि नीति में भाग लिया तथा 800 करोड में से 70 प्रतिशत अर्थात 30 प्रतिशत माफी सहित 560 करोड ही भरना पडा. परंतु आर्थिक वर्ष खत्म होने को आ रहा है फिर भी बिजली बिल बकाया ही है. उसमें चालू 400 करोड के बकाया बिल पडे है. जिसके कारण बकाया ब्याज, विलंब आकार सहित 1200 करोड तक पहुच गए है. जिसके कारण महावितरण सतर्कता से सहूलियत का लाभ लेने का आवाहन कृषिपंपधारको से कर रहे है.
आर्थिक स्थिति दयनीय होने से बिल बकाया
बिजली बिल बकाया न रहे, ऐसा हमें भी लगता है. परंतु निसर्ग की मार लगातार पडने से जैसी चाहिए वैसी फसल नहीं आती. इसके साथ ही गारंटी भाव भी नहीं मिलता. जिसके कारण हमारे पास कोई उपाय नहीं है. सरकार हमारा बिजली बिल माफ करे, ऐसा हमें लगता है. कारण की बिल भरना चाहते हुए भी हम भर नहीं सकते, ऐसा मत कुछ कृषिपंप धारको ने व्यक्त किया है.
अवसर का लाभ ले
पहले ही कृषि पंप धारको को 50 प्रतिशत तथा अब 30 प्रतिशत सहूलियत मिल रही है. इस अवसर का वे लाभ ले, कारण कृषिपंप धारक पर बकाया न रखे इस ओर घ्यान देना पडेगा.
डी. खानंदे, अधीक्षक अभियंता महावितरण
दृष्टि में
-सितंबर 2020 तक बकाया 800 करोड
-चालू बकाया बिल-400 करोड
– कृषि धोरण शुरू होने के बाद बकाया 1200 करोड
-पहले वर्ष में बकाया मिलनेवाली थी, 50 प्रतिशत माफी
– दूसरे वर्ष में मिल रही है 30 प्रतिशत माफी
-बकायादार कृषिपंप धारक- 139000

कृषि नीति में सहभाग लेने पर फायदा
कृषि पंपधारको ने कृषि नीति में सहभाग दर्शाया तो निश्चित रूप से फायदा होगा. अखंडित बिजली मिलेगी. जिसके कारण फसलों को समय पर पानी दे सकेंगे. साथ ही फसल भी अच्छी होगी. इतना ही नहीं बकाया में सहूलियत मिलने से बिल भरा तो पैसे बचेंगे, ऐसा महावितरण को लगता है.

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