महिमापुर की ऐतिहासिक बावडी का मेकओवर

अमरावती /दि. 7– स्थापत्य कला का बेहतरीन उदाहरण रहनेवाली व ऐतिहासिक बावडी दर्यापुर तहसील के महिमापुर नामक छोटे से गांव में 14 वीं शताब्दी से लेकर अब तक बडी शान के साथ खडी है. इस सुंदर बावडी का जतन व संवर्धन करने हेतु राज्य सरकार के पर्यटन व सांस्कृतिक कार्य विभाग ने अगस्त 2023 में 2 करोड 88 लाख 81 हजार 510 रुपए की निधि 27 फरवरी 2025 को जारी सरकारी आदेश के जरिए मंजूर की है. इस निधि के जरिए इस ऐतिहासिक बावडी का ‘मेकओवर’ किया जाएगा.
महिमापुर स्थित सीढियों वाली बावडी को राज्य संरक्षित स्मारक का दर्जा दिया गया है. जिसके जतन व देखभाल संबंधि कामों के लिए सन 2023 के बजट में 2 करोड 88 लाख 81 हजार 510 रुपए की रकम को प्रशासकीय मान्यता दी गई है. इस काम का ठेका तुमसर स्थित एक ठेकेदार ने 2.67 करोड रुपयों में लिया है और इस काम की शुरुआत भी हो चुकी है. जिसके चलते 27 फरवरी को कुल खर्च में से 93.27 लाख रुपए के खर्च को प्रथम देयक के साथ मान्यता दी गई है. इस ऐतिहासिक राज्य संरक्षित स्मारक का जतन व दुरुस्ती संबंधि काम विशेष तरह से करने होते है और इन कामों को पुरातत्व शास्त्र संकेतानुसार करना आवश्यक है.
* पोस्ट कार्ड पर झलकी थी बावडी
खास बात है कि, राष्ट्रीय डाक दिवस का औचित्य साधकर केंद्रीय डाक विभाग ने अक्तूबर 2023 में महिमापुर स्थित ऐतिहासिक बावडी का छायाचित्र पोस्टकार्ड पर प्रकाशित किया था. जिसके चलते यह बावडी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुई थी. हालांकि इसके पहले अमरावती जिले का वैभव कही जा सकती यह बावडी पूरी तरह से दुर्लक्षित पडी थी. पुरातत्व विभाग के रिकॉर्ड में भले ही इस बावडी को राज्य संरक्षित स्मारक के तौर पर दर्ज किया गया है. परंतु इस बावडी के संवर्धन व जतन को लेकर हमेशा ही अनदेखी की जाती रही. परंतु अब करीब 2.88 करोड रुपयों की निधि से इस बावडी का जतन किया जा रहा है.
* ऐसी ही बावडी की रचना
अमरावती से करीब 40 किमी की दूरी पर आसेगांव पूर्णा से दर्यापुर मार्ग पर महिमापुर नामक गांव स्थित है और इसी गांव में यह ऐतिहासिक बावडी है. पूरी तरह पत्थरों से निर्मित चौकोन आकारवाली इस बावडी की गहराई 80 फीट, लंबाई 40 मीटर तथा चौडाई 25 मीटर है. इस बावडी में नीचे उतरने हेतु 85 प्रशस्त सीढियां है और सीढियों के मार्ग पर किले के प्रवेशद्वार की तरह पत्थरों की कमान बनाई गई है. प्रत्येक प्रवेशद्वार पर पत्थर में दो ध्यानाकर्षक पुष्प उकेरे गए है और सीढियों पर क्षणिक विश्राम हेतु टप्पे बनाए गए है. भीतर पहुंचने के बाद इस बावडी यानी कुएं के चारों ओर घूमने-फिरने व बैठने की व्यवस्था भी की गई है. इस बावडी के भीतर निर्माण कार्य के खत्म होने पर तल के चारों ओर चबुतरे की तरह रचना है और भीतर दो बेहद नकाशीदार ध्यानस्थ मूर्तियां भी है.
* अमरावती जिले के गैजेटीयर में उल्लेख
यह बावडी मुगलकालिन रहने का उल्लेख अमरावती जिले के गैजेटीयर में है. आज जमीन से तीन-चार फीट की उंचाई से बावडी के तले तक किया गया काम भले ही देखा जा सकता है, लेकिन माना जाता है कि, इस बावडी में और भी कई तरह की विशेषताएं थी जो समय के प्रवाह में नष्ट हो गई है. ऐसे में इस बावडी का जतन करना बेहद जरुरी है.