
अमरावती/दि.2 – कोविड संक्रमण काल के दौरान छोटे बच्चों द्वारा स्मार्ट फोन का प्रयोग करने का प्रमाण काफी अधिक बढ गया. क्योेंकि इस दौरान पढाई-लिखाई ऑनलाईन तरीके से हो रही थी. अत: छोटे बच्चों का ज्यादातर समय मोबाईल स्क्रीन के सामने ही बीतने लगा. लेकिन साथ ही अभिभावकों द्वारा की जानेवाली अनदेखी के चलते स्मार्ट फोन का दुरूपयोग भी होने लगा है. साथ ही लगातार मोबाईल में व्यस्त रहने की वजह से छोटे बच्चों में कई तरह के मानसिक विकार सहित तनाव की स्थिति में इजाफा होने लगा. जिसकी वजह से आये दिन घरेलू कलह बढने लगे है.
बता दें कि, इन दिनों छोटे बच्चों में ऑनलाईन गेमिंग व लाईव स्ट्रिमिंग के साथ ही अलग-अलग साईट पर जाकर कई अवांछित चीजों, विशेषकर अश्लील वीडियो देखने का प्रमाण काफी अधिक बढ गया है. साथ ही महंगी कीमतोंवाले और अत्याधुनिक फीचरवाले मोबाईल की मांग को लेकर बच्चों द्वारा जिद किये जाने का भी प्रमाण काफी अधिक बढ रहा है. वहीं जिद पूरी नहीं होने पर कई बच्चे अपना घर भी छोडकर भाग निकले है. ऐसी कुछ घटनाएं जिले में सामने आयी है. जिसके चलते बच्चों को कितनी देर मोबाईल प्रयोग करने हेतु दिया जाये और उसका किस तरह से प्रयोग हो रहा है, इसे लेकर अभिभावकों को जागरूक रहने की जरूरत है. साथ ही बच्चों के साथ स्मार्ट फोन के सही उपयोग व दुरूपयोग को लेकर अभिभावकों द्वारा मुक्त संवाद भी साधा जाना चाहिए, ताकि बच्चे मोबाईल का दुरूपयोग व दुष्परिणामों को लेकर पहले से सजग व सतर्क रह सके.
– इन दिनों 78 फीसद किशोरवयीन बच्चे व युवा मोबाईल की लत का शिकार है. इसमें से 72 फीसदी को लगता है कि, प्रत्येक बात बेहद आवश्यक है और वह जल्द से जल्द पूरी होनी ही चाहिए.
– एक ही समय एक ही स्क्रिन पर ऑनलाईन क्लास करते हुए कई बच्चे चैटिंग भी करते है और इसमें से 44 फीसद बच्चे भोजन करते समय भी मोबाईल का प्रयोग करते है.
– शुरूआती दौर में स्मार्ट फोन का अपना एक आकर्षण था. वहीं समयानुसार यह आज दैनिक वस्तुओं में शामिल हो गया है. किंतु इसका अतिप्रयोग करने से छोटे बच्चों में आत्मविश्वास कम होता है और उनमें एकांत की भावना बढती है.
– साथ ही मोबाईल का अतिप्रयोग करने की वजह से छोटे बच्चों का शारीरिक व बौध्दिक विकास प्रभावित होता है और दोनोें ही स्तर पर कई तरह की समस्याएं पैदा होती है.
– लगातार मोबाईल देखते रहने से जहां एक ओर बच्चों की आंखे खराब होती है, वहीं मस्तिष्क पर काफी अधिक तनाव बढता है. इसके अलावा मोबाईल लेकर लंबे समय तक एक ही स्थान पर बैठे रहने और मोबाईल देखते हुए ही भोजन करने की वजह से छोटे बच्चे मोटापे का भी शिकार हो रहे है.
क्या कहते है मानसोपचार विशेषज्ञ
इस संदर्भ में मानसोपचार विशेषज्ञों एवं समुपदेशकोें का कहना है कि, कोविड संक्रमण काल के दौरान सभी लोगों द्वारा स्मार्ट फोन का बडे पैमाने पर प्रयोग किया जाने लगा. जिनमें 3 से 18 वर्ष की आयुगुटवाले बच्चों व किशोरवयीन युवाओं का प्रमाण सर्वाधिक है. धीरे-धीरे इस आयुवर्ग के बच्चे मोबाईल के व्यसन का शिकार हो गये और अब हालत यह हो गई है कि, मोबाईल नहीं दिये जाने पर बच्चे हिंसक तक होने लगे है. मोबाईल के अति प्रयोग की वजह से बच्चों का शारीरिक व बौध्दिक विकास अवरूध्द होता है और उनमें आत्मविश्वास की कमी आती है. ऐसा नहीं होने देने पूरी तरह से अभिभावकों के हाथ में है. अत: बिना जरूरत छोटे बच्चों के हाथ में मोबाईल देना टाला जाये. साथ ही बेहद जरूरी होने पर मोबाईल देते समय इस बात की ओर ध्यान रखा जाये कि, बच्चे मोबाईल पर क्या कर रहे है.