
अमरावती-/दि.2 स्मार्ट फोन का अति इस्तेमाल होने के साथ ही मनोरंजन के रुप में रिल्स देखने का शौक बड़े पैमाने पर बढ़ा है. इसका असर युवाओं में ब्रेन फॅग यानि मानसिक थकावट बढ़ी है. वहीं मोबाइल के अति इस्तेमाल से युवाओं में अकेलापन व चिड़चिड़ाहट भी बड़े पैमाने पर बढ़ी है. जिसके चलते पालकों को अपने बच्चों पर अधिक ध्यान देना आवश्यक है.
कोविड काल में स्कूल बंद थी. जिसके चलते बच्चों की क्लास ऑनलाईन थी, लेकिन इसका असर यानि अनेक बच्चों को मोबाइल का व्यसन लग गया.कोविड काल से बच्चों का स्क्रीन टाईम बढ़ा है. युवाओं को मोबाइल, लॅपटॉप का एक प्रकार के व्यसन ने जकड़ लिया है. इस पर समाज माध्यम के रिल्स यानि कुछ सेकंद के शॉर्ट वीडियो देखने व रिल्स बनाने का प्रमाण भी बढ़ा है. कुछ युवाओं की रिल्स बनाते समय दुर्घटना में मृत्यु होने की घटनाएं भी कुछ पैमाने पर घटी है. जिसके चलते मोबाइल की आदत का छोटे बच्चों से लेकर युवाओं पर अनेक असर दिखाई देता है.
पालकों ने कम उम्र के बच्चों को मोबाइल ही नहीं देना चाहिए.बच्चों के मनोरंजन के लिए उन्हें अन्य खिलौने खेलने के लिए देने चाहिए. टीवी पर कार्टून देखने दे, लेकिन उसे भी उचित समय तय करने की आवश्यकता है. मोबाइल के अति इस्तेमाल से व रिल्स के कारण बच्चों में चिड़चिड़ापन, मानसिक थकावट आना, आंखों का तनाव बढ़ना, अन्यत्रों से दूर रहकर अकेलापन आना आदि परिणाम दिखाई देते हैं. अति मोबाइल के इस्तेमाल से ब्रेन फॅग यानि मानसिक थकावट होने की संभावना रहती है. इसमें मानसिक तनाव बढ़कर बच्चों में चिड़चिड़ापन, मानसिक स्वास्थ्य खराब होने की संभावना रहती है. इसके साथ ही युवाओं में रातभर मोबाइल पर रिल्स देने से रात के समय लाइट बंद कर देखने से आंखों पर असर होने की संभावना अधिक मात्रा में रहती है.