उधारी लौटाने से बचने के लिए निकेतन ने काटा था दुर्योधन कडू का सिर
पुलिस ने सरमसपुरा थाना क्षेत्र से निकेतन कडू को लिया हिरासत में

* सरमसपुरा के एक पुलिस कर्मी की सतर्कता व चालाकी से पकडा गया निकेतन कडू
* आसेगांव के नाले से बरामद किया गया दुर्योधन कडू का कटा हुआ सिर
* सीपी रेड्डी ने पत्रवार्ता में पूरी घटना को लेकर दी सिलसिलेवार जानकारी
अमरावती/दि.30 – दो दिन पूर्व शहर के खोलापुरी गेट पुलिस थाना क्षेत्र अंतर्गत अकोली परिसर में स्मृतिविहार कालोनी के पास यादव नामक व्यक्ति के खेत के तार कम्पाउंड से सटकर एक व्यक्ति का सिर कटा शव बरामद हुआ था. जिसकी गत रोज दुर्योधन बाजीराव कडू (65, भुगांव, तह. अचलपुर) के तौर पर शिनाख्त कर ली गई थी. साथ ही अब पुलिस ने बडी तेजी के साथ जांच पडताल करते हुए दुर्योधन कडू को मौत के घाट उतारने वाले भुगांव निवासी सैन्य जवान निकेतन रामेश्वर कडू (29) को गिरफ्तार कर लिया है. जिसकी निशानदेही पर आसेगांव परिसर से होकर गुजरने वाले नाले से दुर्योधन कडू का कटा हुआ सिर भी बरामद कर लिया गया है. इसके साथ ही यह जानकारी भी सामने आयी है कि, निकेतन कडू ने दुर्योधन कडू से करीब पौने तीन लाख रुपए उधार ले रखे थे और उधारी के पैसे लौटाने के तगादे से तंग आकर उसने दुर्योधन कडू को गला काटकर मौत के घाट उतार दिया. इस आशय की जानकारी आज यहां बुलाई गई पत्रवार्ता में शहर पुलिस आयुक्त नवीनचंद्र रेड्डी द्वारा दी गई. इस पत्रवार्ता में शहर पुलिस उपायुक्त कल्पना बारवकर व गणेश शिंदे भी उपस्थित थे.
इस पत्रवार्ता में जानकारी देते हुए सीपी रेड्डी ने बताया कि, भारतीय सेना की 203 आर्टीलरी में कार्यरत व फिलहाल अंबाला में तैनात रहने वाला निकेतन कडू विगत लंबे समय से छुट्टी पर चल रहा था और अपने गांव में ही रहा करता था. निकेतन कडू को शेयर बाजार में पैसा निवेश करने का काफी शौक है और अब तक वह लाखों रुपए शेयर बाजार में लगा चुका है. साथ ही निकेतन कडू ने शेयर बाजार में लगाने के लिए दुर्योधन कडू से करीब 2 लाख 70 हजार रुपए ब्याज पर ले रखे थे और इसी रकम की वापसी के लिए दुर्योधन कडू अक्सर ही निकेतन कडू के पास तगादा लगाया करता था. निकेतन कडू के मुताबिक उसने दुर्योधन कडू का काफी पैसा लौटा दिया था. लेकिन इसके बावजूद दुर्योधन कडू हमेशा ही ब्याज की रकम जोडकर ली गई मूलधन की रकम से ज्यादा रकम लौटाने हेतु उसे परेशान किया करता था. जिससे तंग आकर निकेतन कडू ने 28 नवंबर को सुबह दुर्योधन कडू से संपर्क कर उसे अपने साथ दुपहिया पर सवार होकर अमरावती चलने हेतु कहा तथा अमरावती के अकोली परिसर में रहने वाले रिश्तेदार के यहां से पैसे वापिस दिलाने की बात कही. चूंकि निकेतन कडू का एक रिश्तेदार वाकई अकोली परिसर में रहता है. इस बात की जानकारी पहले से पता रहने के चलते दुर्योधन कडू ने निकेतन कडू की बात पर भरोसा कर लिया और वे दोनों दुपहिया वाहन पर सवार हाकर अमरावती के अकोली परिसर पहुंचे.
* घटनास्थल के चप्पे-चप्पे से पहले ही वाकिफ था निकेतन कडू
पुलिस के मुताबिक अकोली परिसर में एक रिश्तेदार के रहने के चलते निकेतन कडू का इस परिसर में अक्सर ही आना-जाना हुआ करता था. इसके चलते वह पूरे परिसर के चप्पे-चप्पे से वाकिफ था. यहीं वजह रही कि, निकेतन कडू ने दुर्योधन कडू को इस परिसर की सबसे सुनसान स्थान पर लाया और फिर लघुशंका के बहाने से उसे अपने दुपहिया वाहन से नीचे उतारा. इस समय जैसे ही दुर्योधन कडू लघुशंका से फारिग होने में व्यस्त हुआ, तो पहले से तैयारी में रहने वाले निकेतन कडू ने अपनी दुपहिया वाहन की डिक्की में छिपाकर रखे तेज धारदार सत्तुर को बाहर निकाला और पीछे से दुर्योधन कडू की गर्दन पर सपासप वार करते हुए उसके सिर को उसके धड से अलग कर दिया. इसके बाद निकेतन कडू ने दुर्योधन कडू के कटे हुए सिर को अपने साथ लायी प्लॉस्टिक की बैग में भरकर अपने दुपहिया वाहन की डिक्की में रख दिया और सत्तुर को वहीं लाश के पास फेककर मौके से भाग निकला. इसके बाद अपने गांव की ओर वापिस जाते समय निकेतन कडू ने आसेगांव के पास से होकर गुजरने वाले नाले के झाडियोें में दुर्योधन कडू के कटे हुए सिर को फेंक दिया और वह बडे आराम से अपने गांव चला गया.
* ऐसे आया निकेतन कडू पकड में
28 नवंबर की सुबह दुर्योधन कडू और निकेतन कडू एकसाथ एक ही दुपहिया वाहन पर सवार होकर भुगांव से अमरावती जाने हेतु रवाना हुए थे. लेकिन दोपहर बाद निकेतन कडू अकेला ही गांव वापिस लौटा. जिसने दुर्योधन कडू के परिवार वालों द्वारा दुर्योधन कडू के बारे में पूछे जाने पर टालमटोल वाले जवाब दिये. ऐसे में दुर्योधन कडू के परिजनों को कुछ शंका हुई, तो उन्होंने सरमसपुरा पुलिस थाने में दुर्योधन कडू की गुमशुदगी को लेकर शिकायत दर्ज कराई. वहीं दूसरी ओर गत रोज अमरावती में एक सिर कटी लाश मिलने के बाद अमरावती शहर पुलिस द्वारा आसपास के सभी पुलिस थानों को अलर्ट किया गया और शाम होते-होते शव की शिनाख्त दुर्योधन कडू के तौर पर कर ली गई. साथ ही इस हत्याकांड में निकेतन कडू के शामिल रहने की संभावना भी सामने आयी. ऐसे में निकेतन कडू को पहचानने वाले सरमसपुरा पुलिस थाने के पुलिस कर्मी सचिन भोगे ने बडी सतर्कता व होशियारी के साथ काम किया तथा निकेतन कडू के भाई को संदेश पहुंचाया कि, भारतीय सेना से निकेतन कडू के लिए एक पत्र व कुछ पैसे आये है. जिन्हें हासिल करने के लिए निकेतन कडू को मिलने हेतु भेजा जाये. इस संदेश के मिलते ही फरार होने की तैयारी कर रहा निकेतन कडू तुरंत ही पुलिस कर्मी सचिन भोगे से मिलने के लिए चला गया. जिसे सचिन भोगे ने तुरंत अपनी हिरासत में लेकर पुलिस थाने पहुंचा दिया. जहां से उसे अमरावती शहर पुलिस के हवाले किया गया और फिर दुर्योधन कडू के कटे हुए सिर को आसेगांव के नाले से बरामद करने के साथ ही पुलिस ने इस पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया.
* सभी की भूमिका रही बेहद सराहनीय
दो दिन पूर्व अकोली परिसर में बरामद हुई सिर कटी लाश की गुत्थी को सुलझाने के साथ ही आरोपी को पकडने व लाश के कटे हुए सिर को बरामद करने हेतु चलाये गये अभियान में शहर पुलिस आयुक्त नवीनचंद्र रेड्डी, पुलिस उपायुक्त कल्पना बारवकर व गणेश शिंदे एवं राजापेठ विभाग के सहायक पुलिस आयुक्त जयदत्त भंवर के मार्गदर्शन के तहत खोलापुरी गेट पुलिस थाने में पीआई गौतम पातरे, पीएसआई चौधरी, एएसआई खैरकर, राम लोखंडे, खुफिया प्रदीप राजुरकर, पोकां अमोल नकाशे, इरफान मंगेश भेलाए, राजेश मोहोड, अमोल पोखले, चालक पोकां संतोष सरोदे व प्रवीण परखडे, स्पेशल स्क्वॉड के पीआई आसाराम चोरमले व पुलिस कर्मी मंगेश लोखंडे, ईशा खांडे, छोटेलाल यादव, निवृत्ति काकड, रणजीत गावंडे, अमोल मनोहरे, आशीष ढवले, सागर गाडे, चालक पोकां गजानन सातंगे व सचिन भांबे, समरसपुरा पुलिस स्टेशन के एएसआई सावर्डीकर, अपराध शाखा के पीएसआई जाधव, एपीआई मनीष वाकोडे, मनीष इंगोले व पुलिस कर्मी फिरोज खान, सतीश देशमुख, नाजीमोद्दीन सैयद, विकास गुडधे, सूरज चव्हाण, रोशन माहुरे, किशोर खंगेरे व निखिल, साइबर पुलिस स्टेशन के पीआई योगेश चव्हाण, एपीआई कासार, पोहेकां अनिकेत वानखडे व निखिल की भूमिका बेहद सराहनीय रही तथा सभी ने दिन-रात परिश्रम करते हुए इस अजीबो गरीब हत्याकांड का पर्दाफाश करने में अपना सहयोग प्रदान किया.