संचालक नहीं, अध्यक्ष व सीईओ है गडबडी के जिम्मेदार
मध्यवर्ती बैंक के संचालको का पत्र वार्ता में कथन

* निवेश एंव कमीशन घोटाले से अपना पल्ला झाड़ा
* दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग उठाई
अमरावती/दि.१३- जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक द्वारा म्यूच्युअल फंड में किए गये निवेश को लेकर जिला विशेष लेखा परीक्षक की ओर से किए गये लेखा परीक्षण में पाया गया है कि बैंक द्वारा निवेश के लिए तय नियमों व निर्देशों का उल्लंघन किया गया. ऐसे में बैंक के तत्कालीन संचालक मंडल को इसके लिए दोषी बताया जा रहा है. किंतु हकीकत यह है कि बैंक के दैनिक कामकाज से संबंधित सभी अधिकार संचालक मंडल द्वारा बैंक के अध्यक्ष व सीईओ को दिए गये है और उनके द्वारा नाबार्ड, आरबीआई व सहकार विभाग के नियमों के तहत काम करना जरूरी था. किंतु ऐसा नहीं हुआ. अत: इसके लिए बैंक के तत्कालीन अध्यक्ष व सीईओं सहित उस समय इस गड़बडी की अनदेखी करनेवाले संबंधित महकमों के अधिकारियों से खुलासा मांगा जाए. साथ ही दोषी पाए जानेवाले लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाए. इस आशय का प्रतिपादन बैंक के तीन निवर्तमान संचालको द्वारा यहां बुलाई गई पत्रकार परिषद में किया गया.
बैंक के संचालक मंडल में शामिल रहे निनित बाबुराव हिवसे, रविन्द्र विठ्ठलराव गायगोले तथा सुभाष जर्नादनराव पावडे द्वारा बुलाई गई इस पत्रकार परिषद में कहा गया कि उन्होंने बैंक द्वारा अलग-अलग समय पर म्यूच्युअल फंड में नियमों का उल्लंघन कर राशि निवेश करने को लेकर अपनी आपत्ति भी दर्ज कराई थी. किंतु बावजूद इसके बैंक के तत्कालीन अध्यक्ष सीईओ सहित संबंधित महकमों के अधिकारियों द्वारा उस पर ध्यान नहीं दिया गया. यदि समय रहते इन आपत्तियों पर ध्यान दे दिया जाता तो आगे चलकर बैंक के व्यवहार में यह गड़बड़ी नहीं होती.
इस पत्रवार्ता में विशेष लेखा परीक्षक की ओर से तैयार की गई लेखा परीक्षण रिपोर्ट को पेश करने के साथ ही इसमें उल्लेखित विभिन्न मुद्दों पर इन तीनों संचालको ने अपनी बात रखी और कहा कि बैंक के तत्कालीन पदाधिकारी व अधिकारी ने संबंधित महकमों के अधिकारियों के साथ मिली भगत करते हुए बैंक के संचालक मंडल को अंधेरे में रखा और अपनी मनमर्जी से काम किया. यदि उस समय जिला उपनिबंधक व नाबार्ड अधिकारियों द्वारा अपनी जिम्मेदारियों का सही ढंग से पालन किया जाता तो बैंक में आर्थिक गड़बडी नहीं होती. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि विशेष लेखा परीक्षक ने संचालक मंडल के सदस्यों के साथ साथ जिला उपनिबंधक व नाबार्ड अधिकारियों को स्पष्टीकरण हेतु नोटिस क्यों नहीं दी. इस सवाल के साथ ही इन तीनों संचालको ने यह भी कहा कि बैंक के कामकाज की वजह से किसानों, निवेशको और कर्मचारियों में काफी विपरित असर पड रहा है. अत: लेखा नियंत्रण द्वारा विशेष अंकेक्षण करते हुए दोषियों के खिलाफ कडी कार्रवाई की जानी चाहिए.