अमरावतीमहाराष्ट्र

अब विवाह की पत्रिका व अक्षद का ट्रेंड खत्म

वॉटस्ऐप पर ही दिए जा रहे निमंत्रण

* परिवार के बुजुर्गो में नाराजी
अमरावती /दि.14– पहले विवाह समारोह का निमंत्रण बाकायदा रिश्तेदारों को घर-घर जाकर अक्षय और पत्रिका के साथ दिया जाता था और बाहरगांव रहनेवाले रिश्तेदारों को पोस्ट द्वारा निमंत्रण कार्ड भिजवाए जाते थे. किंतु अब बदलते समय में डिजिटल युग में यह ट्रेंड खत्म हो चुका है. अब वॉटस्ऐप पर ही निमंत्रण दिए जाने की प्रथा शुरु हो चुकी है. किंतु इस प्रथा से परिवार के बुजुर्ग संतुष्ट नहीं है. उनमें नाराजी दिखाई दे रही है.
आजकल के दौर में तकनीक इतनी आगे बढ गई है कि, जिससे हर क्षेत्र में अमूलचूल परिवर्तन हुआ है. आज सभी प्रकार के निमंत्रण ऑनलाइन भिजवाए जा रहे है. प्राचीन काल में रिश्तेदारों के घर जाकर गुड-खोपरा देकर विवाह तथा अन्य मांगलिक कार्यो का निमंत्रण दिया जाता था. उसके बाद सीधे कागज पर छपे हुए निमंत्रण कार्ड घर-घर जाकर दिए जाने लगे. आगे और भी सुधार हुआ. जिसमें आकर्षक और रंगीन निमंत्रण कार्ड घर-घर जाकर दिए जाने लगे. रिश्तेदार ऐसा निमंत्रण पसंद करते है. पूरा परिवार मांगलिक कार्यो में उपस्थित रहता है.
अब ऑनलाइन के जमाने में यही निमंत्रण सीधे वॉटस्ऐप के माध्यम से रिश्तेदारों तक पहुंचाए जा रहे है. यह सुविधा अधिकांश लोगों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है, वहीं बुजुर्गो में नाराजी है. वेडींग मार्केट का विस्तार तेजी से हो रहा है. आजकल ऑनलाइन निमंत्रण तथा सोशल साईड पर डिजिटल निमंत्रण कार्ड भेजने का ट्रेंड चल रहा है. युवकों को लिखित निमंत्रण की बजाए सीधा ऑडीओ-विजुअल निमंत्रण ज्यादा पसंद है. कुल मिलाकर निमंत्रण कार्ड छापकर बांटने के बजाए मोबाइल पर भेजने का प्रचलन जोरों पर चल रहा है. पहले घर-घर और गांव-गांव जाकर निमंत्रण कार्ड वितरित किए जाते थे. विवाह की तिथि समीप आने पर किस-किस को निमंत्रण पहुंचाने है. उसकी चिंता रहती थी. जो अब नहीं रही. मोबाइल क्रांति के कारण ऑनलाइन निमंत्रण में आवश्यक परिवर्तन किया जा सकता है. धीरे-धीरे निमंत्रण पत्रिका भेजने का प्रचलन कम होता जा रहा है.

ऑनलाइन निमंत्रण से समय और पैसों की बचत
पहले विवाह समारोह मेें अक्षद के साथ बाकायदा आकर्षक रंगों में छपे निमंत्रण कार्ड रिश्तेदारों को दिए जाते थे. उसके लिए काफी भागदौड करनी पडती थी और नियोजन के लिए कम समय कम रहता था. घर-घर जाकर निमंत्रण देना संभव नहीं रहता. किसी रिश्तेदार को कार्ड नहीं मिला तो वह रूठ जाता था. उस पर उपाय के तौर पर सोशल मीडिया पर कार्ड भेजकर फोन पर ही निमंत्रण दिया जा रहा है. हजारों की संख्या में छपनेवाले कार्ड में पैसा लगता था और समय भी लगता था. किंतु अब ऑनलाइन निमंत्रण भेजे जाने पर पैसा और समय की बचत हो रही है.

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